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जीजा ने साली की सील तोड़ी

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हैल्लो दोस्तों मैं खुश्बू कलकत्ता से हूँ, और मेरी उम्र 25 साल की है | मैं प्राइवेट कंपनी में जॉब करती हूँ और मेरे घर मैं मेरी मम्मी और पापा रहते हैं | मेरी एक बड़ी बहन थी जिसकी शादी हो चुकी है आज से दो साल पहले | और उनकी शादी बहुत ही अच्छे घर में हुई है और मेरे जीजा जी ट्रांसपोर्ट के काम में अच्छा खासा कमा लेते हैं लेकिन मेरे जीजा जी एक नंबर के ठरकी इंसान हैं | मैं आप लोगों का ज्यादा टाइम नहीं लूंगी और अब मैं सीधा स्टोरी पर आती हूँ |
शादी के दूसरे दिन से ही मेरे जीजा जी की मुझपे नियत खराब थी वो मुझे हवस भरी निघाहों से घूरा करते थे | उन्हें जब मौका मिलता कभी वो मेरी छातियों को छूते और कभी मेरी गांड पर हाथ फेरते थे | मैं ये बात अपने घर में किसी को नहीं बताती थी क्यूंकि मैं डरती थी की अगर मैंने किसी को ये बात बताई तो लोग कहीं मुझे ही न गलत समझ बैठे | इसलिए मैं चुप ही रहती थी और जीजा जी की गलती पर पर्दा डालती जाती थी | मेरे कॉलेज की पढाई ख़त्म हो चुकी थी तो मैंने सोचा कि खाली बैठे रहने से अच्छा है की कुछ कोर्स ही कर लूं तो मैं मैं दिल्ली चली गई एनीमेशन के कोर्स के लिए | मैं वहाँ अकेले रूम ले के रहती थी | मैं सीधी सादी तो नहीं थी शुरू से ही पर ज्यादा बिगड़ी हुई भी नहीं थी | वहाँ मुझे नए नए दोस्त मिले में एक भाग्यश्री नाम की लड़की से मिली वो मेरी एक दम पक्की वाली दोस्त बन चुकी थी | हम दोनों साथ में ही ज्यादातर वक़्त बिताते थे घूमना,फिरना,शौपिंग, खाना पीना सब हमारा साथ में ही होता था | उस कॉलेज के बहुत सारे लड़के मेरे पीछे पड़े रहते थे कई सारे काल्स आए पर मैंने कभी किसी को भाव नहीं दिया था क्यूंकि मैं वहां पढने गई थी गुलछर्रे उड़ाने नहीं | मैंने शुरू से अपना ऐम एनीमेशन की दुनिया में बनाना चाहती थी |
एक राजेश नाम का लड़का जो कि मेरी ही क्लास में था वो मुझे रोजाना लाइन देता था पर मैंने उसे नजरंदाज कर देती थी पर उसने मुझे कभी कोई कमेंट नहीं किया था और न ही मुझे रोक कर प्रोपोस किया था | मुझे लगा था की शायद वो सच्चा प्यार करता है पर मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता उसके प्यार से | एक दिन की बात है मैं रस्ते में थी और मुझे मेट्रो स्टेशन जाना था तो मैं ऑटो का इंतजार कर रही थी मेरा रूम चाबड़ी बाजार में था जो की जहाँगीरपूरी से दूर था | राजेश भी वहीँ रहता था हमारा सफ़र रोज का साथ में था पर हम आपस में कभी बात नही किये थे फिर अचनाक से समीर मेरे साथ इंतजार करने लगा वो बहुत जल्दी में था | वो भी बाहर से था तो उसे भी ऑटो या मेट्रो ट्रेन का समय नहीं पता था उसने मुझसे पुछा की खुश्बू क्या तुम्हे पता है सिविल लाइन्स के लिए मेट्रो कितने बजे मिलेगी ? तो मैंने कहा की यार मैं भी यहाँ नयी हूँ और मुझे भी ज्यादा कुछ नही पता है और वैसे तुम तो चाबड़ी बाजार में रहते हो तो सिविल लाइन्स क्यूँ पुछा रहे हो ? तो उसने बताया कि मेरे एक दोस्त का एक्सीडेंट हो गया है और वो भी बाहर से है उसे कुछ समझ नही आ रहा है की वो कहाँ जाए तो मैंने बोला कि मैंने एक ऑटो को रोका और हम दोनों मेट्रो स्टेशन की तरफ चल दिए फिर वहाँ से मैं अपने रूम आ गई और वो सिविल लाइन्स के लिए निकल गया | मुझे उसे ऐसे मुसीबत में छोड़ के जाना तो अच्छा नही लग रहा था पर आप लोगो को तो पता ही है दिल्ली लड़कियों के लिए सुरक्षित नहीं है इस वजह से मैं नहीं गई | फिर अगले दिन वो कॉलेज नहीं आया.दो तीन दिन हो गए तब भी नहीं आया तो मुझे थोड़ी सी चिंता होने लगी थी की यार क्या स्याप्पा हो गया होगा उसके साथ जो ये बंदा नहीं आ रहा है कॉलेज | मैंने उसके दोस्तों से भी पूछा तो कोई नहीं बता पाया | मुझे ऐसे परेशान देख कर भाग्यश्री ने मुझसे पुछा की क्या बात है तू उस लड़के लिए इतना परेशान क्यूँ हो रही है कहीं तुझे प्यार तो नहीं हो गया उससे (उसने ऐसे ही मजाक में मुझसे कहा) | मैंने बोली नहीं यार असल में मैं उसकी हेल्प कर सकती थी पर मैं जान बूझकर उसकी हेल्प नहीं की | फिर उसने मुझसे कहा कि चल कैंटीन में बैठ कर आराम से बात करते हैं मैंने कहा ओके | फिर हम दोनों बात करने लगे मैंने उसे बात बताई की ऐसा ऐसा हुआ था तब उसके समझ में आई पूरी बात |

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