loading...

गये थे नौकरी करने और मिल गई रण्डी

Antarvasna sex story दोस्तो, मेरा नाम राज शर्मा है। अभी तक आप मेरी कई कहानियाँ पढ़ चुके हैं। हर कहानी के बाद आपके प्रसंशा की अनेक मेल मिल रही हैं। मैं केवल अपने व्यक्तिगत अनुभव ही लिखता हूँ, जिसे आप पसंद कर रहे हैं।
सुन्दर औरतें मेरी कमजोरी हैं और इस बारे में भगवान की मुझ पर बहुत मेहरबानी रही है।
मेरा अगला अनुभव:

बात उन दिनों की है जब मैं 19 वर्ष का था और मैंने कॉलेज से ग्रेजुएशन के फाइनल इयर के पेपर दिए थे। हमारे एक रिश्तेदार कोलकाता में बिजनेस करते थे। वह एक रोज हमारे घर आए हुए थे और मेरे पापा से कहने लगे- राज अब क्या करता है?
पापा ने कहा- अभी तो वह कुछ नहीं कर रहा, जब इसके एग्जाम का रिजल्ट आएगा तो फिर आगे की पढ़ाई चालू होगी!
मेरा रिजल्ट आने में 3 महीने थे।

हमारे उस रिश्तेदार का नाम शेखर शर्मा था जिसे कोलकाता में लोग शेखर बाबू के नाम से जानते थे। दूर के रिश्ते में वे मेरे भाई लगते थे।
उन्होंने मेरे पापा से कहा- आजकल पढ़ाई में क्या रखा है, क्यों नहीं इसको बिजनेस में लगा दिया जाए?
मेरे पापा कहने लगे- हमारी बिजनेस की कोई बैकग्राउंड तो है नहीं, इसलिए यह क्या बिजनेस करेगा?
शेखर बाबू कहने लगे- इसे मैं कोलकाता ले जाता हूं और वहां बिजनेस की ट्रेनिंग दूंगा, साथ ही मैं हर महीने आपको 5000 रूपये भेजता रहूंगा।

बात मेरे और पापा की समझ में आ गई, पापा कहने लगे चलो- अभी रिजल्ट आने में 3 महीने हैं, तो हम इसे कोलकाता आपके पास भेज देते हैं.

कुछ दिन बाद हमने कोलकाता की टिकट बुक करवाई और मैं कोलकाता के लिए रवाना हो गया।
कोलकाता पहुंचने के बाद मुझे पता चला कि शेखर बाबू के घर केवल उनकी बीवी और वे ही थे। शेखर बाबू लगभग 45 साल की उम्र के थे, उनकी हाईट लगभग 5 फुट 2 इंच रही होगी और दुबला पतला शरीर था, लगभग 45-50 किलो वजन होगा। वैसे देखने में भैया स्मार्ट लगते थे, परंतु शरीर से कमजोर थे, जबकि भाभी जी की उम्र लगभग 27-28 साल की थी और पूरी मस्त जवानी चढ़ी हुई थी.

जब मैंने पहली बार भाभी जी को देखा तो मैं उन्हें भैया की बेटी समझ बैठा था, परंतु बाद में पता लगा कि वह उनकी बीवी है, उनकी शादी को लगभग 7 साल हो चुके थे और उनकी कोई संतान नहीं थी। शेखर भैया की पहली बीवी जो गांव से थी, उनका देहांत हो गया था, शेखर बाबू ने दूसरी शादी कर ली थी, उनकी दूसरी बीवी जिनका नाम मधु था, वह कोलकाता से एक बंगाली परिवार से थी।

जब मैंने पहली बार भाभी जी को देखा तो लगा कि वह एक कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की है। वह हमेशा घर पर स्कर्ट और टॉप पहनती थी. भाभी जी का एकदम गोरा रंग और गदराया हुआ बदन था। उनकी हाईट भी लगभग 5 फुट 2 इंच थी। बहुत ही सुंदर गोल चेहरा, सुन्दर बड़ी बड़ी आँखें, बड़ी बड़ी चूचियाँ, सुन्दर चिकना पेट और अच्छे भरे भरे चूतड़ थे। उनकी स्कर्ट में से उनकी गोरी, मोटी और चौड़ी गुदाज पिंडलियाँ और घुटने दिखाई देते रहते थे। जब वे झुकती थी तो पीछे से उनके पट काफी दिखाई दे जाते थे और आगे झुकती थी तो खुले गले के टॉप से मस्त मम्मे दिखाई देते थे.

कोलकाता में उन्होंने जो मकान किराए पर लिया हुआ था वह दो कमरों का एक सेट था, जो एक बहुत बड़ी कोठी के ऊपर था। उसकी सीढ़ियां कोठी के एक बहुत बड़े हाल के अंदर से होती हुई ऊपर जाती थी। उन दो कमरों में एक कमरा बड़ा था, जिसके फर्श के ऊपर एक कोने में जमीन पर बेड साइज का मोटा गद्दा लगा हुआ था और उसके ऊपर बहुत बड़ी मच्छरदानी लगी हुई थी, जिसे दिन में ऊपर कर देते थे.

दूसरा कमरा बहुत ही छोटा था, जिसमें एक आदमी सो सकता था, परंतु उसमें पंखा नहीं लगा हुआ था। उस सेट के साथ ही एक किचन, एक बाथरूम था। क्योंकि छोटे कमरे में पंखा नहीं था इसलिए हम तीनों को उस एक ही गद्दे पर सोना था।

जिस दिन मैं कोलकाता पहुंचा उस दिन कुछ औपचारिक बातें हुई और मैं दोपहर का खाना खाकर उसी गद्दे पर सो गया।

शेखर बाबू का ट्यूबवैल के पाइप और उसके पार्ट्स सप्लाई करने का बिजनेस था। वह पहले यूपी और बिहार में ऑर्डर बुक कर के लाते थे और बाद में माल तैयार करवा कर, पैक करवा कर उसे ट्रांसपोर्ट से भेजते थे.

उनका बिजनेस कोई बहुत अच्छा बिजनेस नहीं चल रहा था। बस घर में खाना पीना और रहना सहना ठीक तरह से हो जाता था। ऑफिस के नाम पर उस बड़े कमरे में ही एक कोने में एक मेज के ऊपर एक छोटा सा टाइपराइटर रखा था जिसके ऊपर वह कुछ टाइप कर लेते थे। कुछ फाइलें व फर्म के लैटर हेड्स रखे थे। अधिकतर काम लेटर्स लिखने, बिल भेजने, और जो पेमेंट के रूप में चेक आते थे, वे खाते में जमा करवाने का था, जो भैया ने मुझे समझा दिया था। भैया का कोलकत्ता में काफी रसूक था.

शेखर बाबू बहुत ज्यादा पढ़े लिखे भी नहीं थे और उनको अंग्रेजी नहीं आती थी जिसमें वह मेरी मदद लेते थे। शेखर बाबू घर पर बहुत कम रहते थे और अधिकतर बाहर मार्केट में ही अपना सारा दिन बिताते थे।

पहले दिन जब हम रात को सोने लगे तो मुझे दीवार की तरफ सोने को बोला गया। बीच में शेखर बाबू सो गए और उनके साथ भाभी जी सो गई। उस गद्दे के ऊपर एक बहुत बड़ी मच्छरदानी लगी थी और रात को कमरे में जीरो पॉवर का एक कोने में टेबल लैंप जलता रहता था, जिससे अँधेरा तो नहीं लगता था परंतु कुछ साफ़ भी नहीं दिखाई देता था.

पहले दिन क्योंकि मैं थका हुआ था अतः मुझे दोबारा फिर लेटते ही नींद आ गई। रात को लगभग मेरी 1:00 बजे आंख खुली तो मैंने देखा मेरा लण्ड पूरा तन कर खड़ा था और उस पर कुछ आगे पानी सा भी लगा था। शेखर भैया लुंगी और बनियान पहन कर पेट के बल उल्टे सोए हुए थे और भाभी जी ने अपनी एक टांग को उनके ऊपर रखा हुआ था जो बिल्कुल नंगी थी।

भाभी जी एक गाउन पहनकर सोई हुई थी और सोते वक्त जब उन्होंने अपनी टांग शेखर भैया के ऊपर रखी तो उनका गाउन सरक कर उनके चूतड़ों तक आ गया था और उनकी एक नंगी टांग मेरी तरफ आई हुई थी। शेखर भैया इतने पतले और छोटे से थे कि भाभी के लगभग नीचे दबे हुए थे। भाभी का ऊपर तक नंगा गोरा पांव और जांघ देख कर मैं बेचैन हो गया और कई देर तक लेटे लेटे उनके उस पट्ट (पंजाब में जांघ को पट्ट कहते हैं.) को देखता रहा।
वे दोनों पूरी तरह से नींद में थे। भैया रात को सोते वक्त तम्बाकू का पान खा कर गहरी नींद में सोते थे। वैसे भी वे दिन भर की भाग दौड़ में थक जाते थे.

भाभी को आधी नंगी देख कर मेरा 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड तन कर मेरे लोअर में खड़ा हो गया था। मैं लोअर और एक लूज टीशर्ट पहन कर सोता था। रात को मुझे अंडरवियर पहनने की आदत नहीं थी। कुछ देर मैं देखता रहा फिर थोड़ा और ऊपर उठ कर देखा तो भाभी की दूसरी टांग भी लगभग नंगी थी। बहुत साफ़ तो सब कुछ नजर नहीं आ रहा था, परंतु भाभी गोरी इतनी थी कि थोड़ी देर देखने पर सब दिखाई भी देने लगा था। मेरे मन में तरह तरह के सवाल आते रहे। कभी सोचता कि बेचारी को पता नहीं है, ढक दूँ, कभी सोचता, मौका है रूप का रस पान करता रहूँ। लण्ड पूरा तन चुका था, परंतु मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था.

उसके बाद मैं उठ कर मच्छरदानी से बाहर निकला और कमरा खोल कर बाथरूम में पेशाब करने गया। जब मैं आया तो भाभी वैसे ही लेटी हुई थी और उनका गाउन उनके पाँव के ऊपर से और भी सरक कर ऊपर की तरफ हो गया था जिससे उनके गोरे चूतड़ों का कुछ हिस्सा दिखाई देने लग गया था।

मुझसे रहा नहीं गया। मैंने अपने लोअर में हाथ देकर मुठ मारी और अपने लंड को ठंडा करके सो गया.

जिस दिन मैं वहां गया था तो दूसरे दिन से ही उन दोनों मियां बीवी ने मुझसे अश्लील प्रकार के हंसी मजाक करने शुरू कर दिए थे। शेखर बाबू द्वारा बातों में चूत, लौड़ा, चोदना आदि शब्दों का खूब प्रयोग किया जाता था। हम तीनों बैठ कर अक्सर सेक्स की बातें करते थे। पहले तो मुझे शर्म आई, फिर मैं भी उनके साथ हंसी मजाक और नॉन वेज जोक्स करने लगा।

अगले दिन इतवार था। सुबह ही हम नहा धोकर तैयार हो गए और तीनों ने एक टैक्सी की और कोलकाता घूमने के लिए निकल पड़े। उस दिन भाभी ने साड़ी पहनी थी जिसमें वह बला की सुंदर लग रही थी। उनकी स्लीवलेस गोल बाहें और चिकना पेट गजब ढा रहा था। टाइट साड़ी में उनकी गाण्ड भी पूरी उभरी हुई दिखाई दे रही थी। हम सारा दिन घूमते रहे और जहां कहीं भी हमें कोई सुंदर लड़की दिखाई देती तो हम उसके बारे में अश्लील बातें करते। बातें सिर्फ यही होती थीं कि बताओ यह चुदी हुई है या नहीं? चुदी होगी तो कितनी बार चुद चुकी होगी? आदि.

सारा दिन घूम फिर कर हम शाम को घर आ गए और फिर रात को खाना खाकर सोने लगे। सोने से पहले शेखर भैया ने मुझे कुछ नंगी तस्वीरों वाली मैगजीन दिखाई। उनके पास एक ताश की गड्डी थी जिसके हर पत्ते पर आदमी और औरत के सेक्स के अलग-अलग आसन प्रिंट हुए थे। और भी उन्होंने बहुत सा ऐसा मैटेरियल दिखाया जिसमें ब्लू फिल्मों जैसे फ़ोटो थे। जब हम दोनों ये देख रहे थे तो भाभी जी वहीं आस पास घूम रही थीं.

बात बातों में उन्होंने मुझसे पूछा कि मैंने अभी तक किस किस के साथ और कितना सेक्स किया है? वैसे तो मैंने मेरे जीवन में जो शुरूआती सत्य घटना घटी थी, उस पर कहानियाँ भी लिख चुका हूँ, परंतु ये बातें मैंने उन्हें नहीं बताई और छिपा ली। मैंने समझा कि बात पता लगने पर पता नहीं ये मेरे बारे में क्या सोचें? हो सकता है ये मेरा कोई इम्तिहान ले रहे हों? अतः मैंने कहा- अभी तक तो मैंने किसी औरत को नंगा भी नहीं देखा है।
यह सुनकर भाभी खुश नज़र आई.

वे दोनों पति-पत्नी अपनी अपनी बातें बताते रहते थे और अश्लील हंसी मजाक करते रहते थे.

loading...

भैया के घर एक काम वाली सांवली सी लड़की आती थी जिसका नाम चन्दा था।
एक रोज भैया कहने लगे- राज, इसे पकड़ कर चोद दे।

वह बाथरूम में कपड़े धो रही थी। परंतु भाभी ने एक दम मना कर दिया और वह इस बात से नाराज भी हो गई.

भैया के साथ में सुबह थोड़ी देर बैंक के काम से निकलता था और 11 बजे तक वापिस आ जाता था। फिर सारा दिन भाभी के साथ ही रहता था।

भाभी ने एक दिन कहा- राज! तुम चन्दा को बिल्कुल कुछ नहीं कहोगे, यदि तुम चाहोगे तो मैं कभी बढ़िया चीज तुम्हें दिलवा दूँगी।
मैंने कहा- आपसे बढ़िया मुझे और कहाँ मिलेगी?
भाभी शरमा गई और बोली- मैं तुम्हारी भाभी हूँ, इतने गंदे ख्याल रखते हो।
मैं फिर डर गया.

मैं भाभी को सोने के बाद हर रोज देखने लगा। वे लगभग नंगी होती थी। मैं धीरे धीरे उनके अंगों को सोते हुए टच करने लगा। जैसे ही वे अपना पाँव, भैया के ऊपर से मेरी तरफ डालती तो, मैं अनजान बनकर आगे सरक कर उनके पट से अपना पट करवट लेकर चिपका देता था और कभी कभी धीरे से उस पर हाथ फिरा देता था। कभी धीरे से उनके चूतड़ों पर हाथ रख देता था, जैसे अनजाने में रखा गया हो। यह खेल हर रोज होने लगा और मैं मुठ मार कर सोने लगा.

एक रात जब मेरी आँख खुली तो भाभी रात को मेरी तरफ आकर भैया के ऊपर दूसरी टांग डाल कर सो रही थी। उनका एक पट नीचे मेरी तरफ था और गाण्ड आधी उघड़ी हुई थी। उस रात भाभी ने एक बहुत ही छोटा सा नाईट गाउन पहना था। उस गाउन के आगे के बटन खुले थे जिससे उनके मम्मे भी आधे बाहर निकले हुए थे.

मैंने उस दिन थोड़ी हिम्मत की और मैंने भाभी की निचली टांग पर अपनी टांग रख ली और भाभी के शरीर से चिपक गया। मेरा लण्ड भी भाभी के चूतड़ों में घुस गया और मैंने धीरे धीरे अपना दाहिना हाथ भाभी के ऊपर से ले जाकर उनके एक चुचे पर रख दिया। भाभी ने कोई हरकत नहीं की। मैं धीरे धीरे मजा लेता रहा और उनके दोनों चूचियों पर धीरे धीरे हाथ फिराता रहा। मुझे उनका शरीर इतना गर्म लग रहा था कि मेरे लण्ड ने पानी छोड़ दिया और मैं पीछे हट कर सो गया। लगभग एक घंटे बाद मेरी आँख खुली तो भाभी नींद में मेरे और भैया के बीच में सीधी सो रही थी। उनकी दोनों टांगों पर से कपड़ा चूत के नीचे तक ऊपर हट गया था। परंतु चूत दिखाई नहीं दे रही थी.

मैंने धीरे धीरे कपड़ा ऊपर करने की कोशिश की तो कपड़ा चूतड़ों के नीचे दबा हुआ था, अतः निकल नहीं सका। मुझे भाभी के मम्मे खुले दिखाई दे रहे थे। मैंने भाभी के दोनों पटों और चूत पर अपनी एक टांग को रखा और सोने का बहाना करने लगा। मुझे नहीं पता मेरी इन सारी हरकतों का भाभी को पता चल रहा था या नहीं, परंतु, न कभी उन्होंने विरोध किया और न मैंने ज्यादा कोशिश की। कभी उधर और कभी उधर सोना भाभी की आदत थी। ऐसे ही सूखा मजा लेते हुए लगभग 10 दिन निकल गए.

एक रोज जब भैया बाहर गए हुए थे तो मैंने पूछा- भाभी आप तो इतनी छोटी हो, भैया इतने बड़े, आपकी सुहागरात और सेक्स लाइफ के बारे में थोड़ा बताओ।
यह सुन कर भाभी थोड़ी उदास हो गई, उन्होंने बताया- तुम्हारे भैया ने मेरे पापा को पटा लिया था और अपनी उम्र कम बताई और न ही पहली बीवी की बात बताई, अतः हमारे साथ धोखा किया है। भाभी ने बताया- यह अच्छा आदमी नहीं है, बहुत ज्यादा चालू आदमी है। सोनागाछी एक बदनाम जगह है, वहां वेश्याओं के पास भी जाता है.

भाभी से जब मैंने सुहाग रात की बात पूछी तो उन्होंने बताया- सुहागरात को इन्होंने शराब पी रखी थी। बस कमरे में आये, मेरी साड़ी उतारी और बड़ी बेदर्दी से मेरी चूत में अपना छोटा सा लण्ड डालने लगे। मुझे दर्द होता रहा, क्योंकि मैं उस समय 18 साल की ही थी। थोड़ा सा अंदर डाल कर जोर से अंदर बाहर करने लगे और झड़ गए, झड़ते ही सो गए। मैं न इधर की रही न उधर की, इनका खड़ा लण्ड भी कोई 3 इंच के साइज़ का पतला सा है, जो सुकड़ने के बाद कटहल का बीज सा रह जाता है.

भाभी जब अपनी सुहागरात की बात बता रही थी तो मेरा लण्ड मेरे लोअर में टाइट होने लगा था। भाभी ने ये बात नोटिस कर ली थी।
भाभी ने मुझसे पूछा- सच सच बताओ तुमने कभी किसी के साथ सेक्स किया है या नहीं?
वे कहने लगी- मुझे पता है, तुम उस दिन कुछ छिपा रहे थे.

दोनों शुरुआत की कहानियों के बारे में विस्तार से मजा ले- ले कर बता दिया, जिससे भाभी पूरी तरह से चुदासी हो गई। मेरा लण्ड भी तन चुका था.

जब भाभी को मैंने बताया कि मेरा लण्ड लेडी डॉक्टर ने 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा कर दिया था तो भाभी बोली- मैं नहीं मानती, मुझे दिखाओ।
मैंने भाभी से कहा- पहले आप अपनी चूत दिखाओ?
तो वे कहने लगी- नहीं, मैं फीता लाती हूँ और तुम्हारा नाप कर देखती हूँ।

भाभी दराज से फीता निकाल लाई और बोली निकालो.
मैं बिस्तर पर लेट गया और कहा- खुद निकाल लो।
भाभी मेरे पास आई और उन्होंने जैसे ही मेरा लोअर नीचे किया मेरा मूसल सा लण्ड बाहर निकल कर झटके मारने लगा।

भाभी की एकदम चीख निकल गई, बोली- हाय दैया! इत्ता बड़ा!
मुझे फीता देकर कहने लगी- नापो तो जरा।
मैंने कहा- आप खुद क्यों नहीं नाप लेती?

भाभी ने मेरे लण्ड को हाथ में पकड़ कर ऊपर नीचे किया और फीता रख कर बोली- ये तो सचमुच 8 इंच है!
फिर उन्होंने फीता गोलाई में नापा तो तीन इंच हुआ। भाभी बोली- इतनी छोटी उम्र में इत्ता बड़ा लण्ड?

मैंने भाभी को खींच कर अपने ऊपर लिटा लिया और उन्हें एक जोर का किस कर लिया। भाभी नाराज हो गई और बोली- छोड़ो मुझे, गंदे कहीं के.
मैंने कहा- अब आप अपनी चूत दिखाओ?
तो वे बोली- हर रोज रात को तो देखते हो।
मैंने कहा- कब देखी?

भाभी कहने लगी- देवर जी, मैं सब जानती हूँ, सोते हुए क्या क्या करते हो?
मैंने कहा- जब आपको सब पता था तो चुप क्यों रहती थी?
वे बोली- मैं देखना चाहती थी कि तुम क्या क्या तमाशा करते हो, फिर तुम्हारे भैया भी तो होते हैं।
मैंने कहा- अच्छा अब तो दिखा दो, रात को अँधेरे में तो कुछ दिखाई भी नहीं देता और चूत तो वैसे भी नहीं देखी है, हमेशा गाण्ड ही देखी है।
भाभी पूरी सेक्सी हो गई थी, उन्होंने कहा- बस एक बार दिखाऊँगी, और तुम दूर खड़े हो जाओ.

मैं बेड से दूर खड़ा हो गया, भाभी ने धीरे धीरे बैठे बैठे अपनी स्कर्ट उठाई और एक सेकंड के लिए चूत दिखा कर वापिस ढक लिया।
मैंने कहा- ये क्या मतलब, दिखाना है तो अच्छी तरह दिखाओ वर्ना मैं नीचे पार्क में जा रहा हूँ।
भाभी कहने लगी- अच्छा नाराज मत हो!
और उन्होंने बेड पर लेट कर कहा- तुम देख लो, जैसे देखना है, परंतु छूना नहीं है।

मैं भाभी के पास बैठ गया, भाभी ने आँखें बंद कर ली और जैसे ही मैं उनकी स्कर्ट को उठाने लगा तभी डोर बैल बज गई.
हम एकदम खड़े हो गए। चूंकि मेरा लण्ड खड़ा था अतः मैं बाथरूम में चला गया और भाभी नीचे सीढ़ियों में दरवाजा खोलने चली गई।

उस दिन भैया जल्दी 5 बजे ही आ गए थे। मैं कुछ देर बाद, जब लण्ड बैठ गया, तब बाहर निकला.

सेक्स स्टोरी अगले भाग में जारी रहेगी. आप मुझे मेल से अपने विचार भेज सकते हैं.
राज शर्मा.

loading...

Leave a Comment