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स्वामी जी का लंड

Chudai ki kahani,sex kahani, लेकिन आँचल के मामले में स्वामी ये देखकर खुश था की ये खूबसूरत औरत तो खुद ही चुदवाने को इतना बेचैन है. क्यूंकी वो अपनी सेक्स लाइफ से संतुष्ट नही थी , बाकी औरतें इतनी जल्दी गरम नही होती और बहुत ना नुकुर नखरे करती थीं . आँचल को उत्तेजना से तड़पता देखकर स्वामी सोचने लगा , इसको चोदने में तो बहुत ही मज़ा आएगा.

आँचल जबसे मायके से आई थी , तबसे उसकी ढंग से चुदाई नहीं हो पाई थी. मायके में रामू और दूसरे नौकर ने रामू के कमरे में उसको जी भरके छोड़ा था लेकिन उस बात को अब काफ़ी दिन बीत चुके थे. एक अच्छी चुदाई के लिए वो तरस रही थी. अपने सामने खड़े नंगे स्वामी और उसके फनफनाते लंड को देखकर उसकी चूत गीली हो गयी और रस निकलकर जांघों में बहने लगा.

आश्रम में पहले दो लड़कियों ने बदन की मालिश करके उसे उत्तेजित किया था फिर स्वामी ने टॉवेल से बदन रगड़कर और उत्तेजित कर दिया था. आँचल ने देखा ये स्वामी का शरीर तो किसी पहलवान जैसा लंबा चौड़ा है , वो उसका लंड अपनी चूत में लेने को मचल उठी. लेकिन उसकी समझ में नही आ रहा था की स्वामी उसको मना क्यूँ कर रहा है ?

“मुझे चोद स्वामी …ओह…”, आँचल ने फिर से कहा.

स्वामी घुटनो के बल अपने सामने बैठी खूबसूरत आँचल के मुँह से ये शब्द सुनकर बहुत खुश हुआ और अपने लंड को हाथ में पकड़कर , आँचल के चेहरे के करीब लाया. आँचल ने लंड मुँह में लेने के लिए होंठ खोल दिए लेकिन स्वामी उसको तड़पाते हुए लंड को मुँह के अंदर डालने के बजे होठों के दोनो तरफ घुमाने लगा. उसने देखा की ये औरत मेरे लंड को अपने मुँह में लेने को कितना तड़प रही है. उसने हंसते हुए अपने लंड से आँचल के गाल पर दो तीन थप्पड़ मारे और फिर उन दोनो लड़कियों से आँचल को दूसरे कमरे में ले जाने को कहा.

वो दोनो लड़कियाँ आँचल को पकड़कर एक दूसरे कमरे में ले गयी. उस कमरे के बीच मे एक बड़ा बेड था और पूरी छत पर शीशे (मिरर्स) लगे हुए थे. कमरे में एसी लगा हुआ था और दीवारों पर हर तरफ संभोग करते स्त्री-पुरुषों की पिक्चर्स लगी हुई थी. 

स्वामी कमरे में आया और उन दोनो लड़कियों से बाहर जाने को कहा. जब वो दोनो बाहर चली गयी तो उसने आँचल को उठाया और बेड पर पटक दिया. आँचल स्वामी की ताक़त देखकर हैरान रह गयी. उसने आँचल को एक बच्चे के जैसे उठा लिया था और बेड पर फेंक दिया. आँचल की हाइट 5’4” थी और वेट 62 किलो था. और स्वामी ने बिना परेशानी के उसे उठा के नरम बिस्तर पर पटक दिया था. वो स्वामी से इंप्रेस होकर उसके चोदने का इंतज़ार करने लगी.

आँचल को बेड पर पड़े हुए अपना इंतज़ार करते देखकर स्वामी भोगानंद मुस्कुराया और बोला, “ तुम्हारा पति तुम्हें बच्चा नही दे सकता , कोई बात नही……….मैं तुम्हें बच्चा दूँगा.”

जवाब में आँचल सिर्फ़ सिसकारियाँ लेती रही. स्वामी ने अपना लंड आँचल की प्यासी परंतु गीली चूत पर लगाया और उत्तेजना से फूले हुए चूत के होठों के भीतर डालकर एक झटके में सुपाड़ा अंदर घुसा दिया. 

“आह…उन्न्ञन्…..ओइईईईईईईई…माआआआअ….”, आँचल की टाइट चूत की दीवारों को फैलाते हुए जैसे ही सुपाड़ा अंदर घुसा , आँचल के मुँह से चीख निकल गयी.
फिर पूरे लंड को आँचल की चूत में गहराई तक घुसाकर स्वामी ने लम्बे लेकिन धीमे स्ट्रोक लगाने शुरू कर दिए. स्वामी के ताकतवर धक्कों से आँचल का जिस्म हिल गया. उत्तेजना में अब वो भी अपनी गांड ऊपर को उछालकर स्वामी के धक्कों का जवाब देने लगी.

“उंगग्घह….अहह……और ज़ोर से चोदो ……अहह”, आँचल ने स्वामीजी से आग्रह किया.

स्वामी आँचल की चूत की टाइटनेस से बड़ा खुश हुआ की इस शादीशुदा औरत की चूत तो कुँवारी लड़की जैसी टाइट है , ज़रूर इसके पति का लंड पतला होगा जिससे चूत फैल ना पाने से टाइट ही रह गयी है. उसने आँचल के आग्रह करने पर फटाफट तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए. तेज तेज धक्कों से आँचल की बड़ी बड़ी गोरी चूचियाँ धक्कों के साथ ही तेज़ी से हिलने लगी. इस मादक दृश्य को देखकर स्वामी कामानंद से पागल हो उठा और कुछ देर तक धक्के लगाने के बाद खूबसूरत आँचल की टाइट चूत को उसने अपने गरम वीर्य से पूरा भर दिया.

आँचल ने अपनी चूत में गरम वीर्य को महसूस किया और इस बात का शुक्र मनाया की उसने पिल ले ली थी , नही तो इतने वीर्य के अपनी चूत की गहराई में घुसने से वो ज़रूर प्रेग्नेंट हो जाती.

तभी स्वामी ने उसको गुड़िया के जैसे उठाया और अपनी गोद में बैठा लिया. फिर वो आँचल के खूबसूरत चेहरे को चूमने, चाटने लगा और बड़ी बड़ी चूचियों को मसलने और दांतो से काटने लगा.
उसके चेहरे को चाटते हुए स्वामी बोला, “ अच्छा लगा तुम्हें ?”

“ उम्म्म्म…..स्वामीजी….उउउम्म्म्मम..”, आँचल ने मदहोशी में जवाब दिया. 

उसके नितंबों में नीचे से स्वामी का खड़ा लंड चुभ रहा था.
फिर स्वामी ने आँचल की दोनो टांगों को आपस में चिपका कर सीधा ऊपर को कर दिया और उसकी चूत में लंड डाल दिया. दोनो टांगों के आपस में सटे होने से इस पोज़ में आँचल की चूत और भी टाइट हो गयी और स्वामी के मोटे लंड से आँचल को लगा की उसकी चूत की दीवारें बिल्कुल स्ट्रेच हो गयी हैं. फिर स्वामी ने आँचल को अपनी गोद में उछालना शुरू किया और उसका लंड किसी पिस्टन की तरह चूत में अंदर बाहर होने लगा. आँचल की चूचियाँ स्वामी के चेहरे के सामने उछलने लगी . स्वामी ने उनपर मुँह लगाकर उन्हे जितना हो सके मुँह में भर लिया और उनपर दाँत काटने लगा. आँचल उत्तेजना और दर्द से चीखने लगी. फिर आँचल को गोद में उछाल कर चोदते हुए स्वामी ने उसकी गांड के छेद में अपनी उंगली डाल दी.

आँचल उत्तेजना से सिसकारियाँ ले रही थी , गांड में उंगली जाने से उसको बर्दाश्त से बाहर हो गया और ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेते हुए उसको जबरदस्त ओर्गास्म आ गया , कामसुख और दर्द की लहरें उसके जिस्म में उठी और वो झड़ गयी. वो ज़ोर से चिल्लाई,” स्वामीईई……….. उईईईईईई……… माआआआअ…..”

Last edited by story_4_u : 7th November 2017 at 09:36 PM.

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  #224  

 9th August 2017

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फिर स्वामी ने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और उसको गोद में उठाकर बेड पर ले गया. बेड में बिठाकर उसने आँचल से उस उंगली को चूसने को कहा जो आँचल की गांड में घुसाई थी. आँचल के चेहरे पर आए ह्युमिलिएशन के भाव देखकर उसे बहुत मज़ा आया. फिर उसने आँचल को पलट कर घुटनो के बल कुतिया बना दिया. फिर उसके बड़े गोल नितंबों को हाथ से मसलते हुए डॉगी पोज़ में लंड आँचल की चूत में डाल दिया. चोदते चोदते स्वामी आँचल के नितंबों पर थप्पड़ मारने लगा. आँचल को चुदाई का आनंद और थप्पड़ का दर्द एक साथ मिलने लगा. स्वामी उत्तेजना से पागल होकर आँचल को बुरी तरह से रौंदने लगा और साथ ही साथ नितंबों पर थप्पड़ भी लगाता रहा. थप्पड़ों की मार से आँचल के नितंबों पर लाल निशान बन गये. अपनी चूत पर स्वामी के लंड से पड़ते धक्कों से उसको ओर्गास्म पर ओर्गास्म आते रहे और वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेते हुए कई बार झड़ गयी. स्वामी ने भी आँचल की चूत अपने वीर्य से एक बार फिर से भर दी और उसके बदन पर ही लेट गया. स्वामी के वेट से आँचल का बदन दब गया और वो दोनो पसीने से भीगे हुए कुछ पल तक ऐसे ही लेटे रहे.

फिर स्वामी आँचल के ऊपर से हट कर बगल में लेट गया. तभी वो दोनो लड़कियाँ कमरे में आई और उन्होने आँचल को बेड से उठाया. आँचल लड़खड़ाते कदमों से उनकी सहायता से चलने लगी. आँचल ने देखा स्वामी बेड पर लेटे हुए मुस्कुरा रहा है.

स्वामी बोला, “ कल फिर ठीक टाइम पर आ जाना . और चोदना है तुम्हें.”

आँचल ने झिझकते हुए कहा, “ आऊँगी…”

तो ये थी स्वामी की स्पेशल पूजा जिसके लिए उसने आँचल की सास से 25000 रुपये रखवा लिए थे.

फिर वो दोनो लड़कियाँ आँचल को बाथरूम में ले गयी. वहाँ उन्होने आँचल के बदन में साबुन लगाया और शावर के नीचे ठंडे पानी से उसे नहलाने लगी.

तभी बाथरूम में स्वामी आ गया. उसका लंड तन के खड़ा था. उसने आँचल को अपनी तरफ खींचा. फिर उसकी एक टाँग उठाकर एक धक्का मारकर लंड फिर से चूत में घुसेड दिया.

इस अचानक हुए हमले से आँचल सिसक उठी, “…..ह…..उउउनघगह…”

स्वामी ने उसको एक हाथ से सपोर्ट देते हुए ज़ोर ज़ोर से खड़े खड़े ही चोदना शुरू कर दिया.

दोनो लड़कियाँ आँख फाडे हैरानी से ये सब देख रही थी. ऐसा पहले कभी नही हुआ था. शायद स्वामी ने आँचल जैसी मादक औरत पहले कभी नही देखी थी. वो अपने आश्रम के कायदे भी भूल गया और अपनी सेविकाओ के सामने ही अपनी कामान्धता से पागल हो गया.

अपने सामने आँचल को स्वामी से चुदते देखकर वो दोनो लड़कियाँ भी उत्तेजित हो गयी. आँचल ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेते हुए चुद रही थी. अब उनमे से एक लड़की से रहा नही गया और उसने अपनी चूत में उंगली डालकर मूठ मारनी शुरू कर दी.
जोरदार चुदाई से स्वामी और आँचल एक बार और झड़ गये . फिर अपना मुरझाया हुआ लंड लेकर स्वामी बाथरूम से बाहर चला गया. आँचल की टाँगे कंपकपा रही थी वो फर्श पर शावर के नीचे गिर पड़ी. 

स्वामी के जाने के बाद वो दोनो लड़कियाँ आँचल पर टूट पड़ी. उनमे से एक ने आँचल के चेहरे और चूचियों को चूमना , चाटना शुरू कर दिया और दूसरी लड़की आँचल की चूत चाटने लगी. उन दोनो लड़कियों ने आँचल को फिर और कई बार झड़ा दिया.

थोड़ी देर बाद स्वामी फिर वहाँ आया और आँचल से तैयार होने को कहने लगा क्यूंकी उसका पति सुनील उसे घर ले जाने आ चुका था और वेटिंग रूम में बैठ उसका इंतज़ार कर रहा था.

वो दोनो लड़कियाँ आँचल को कपड़े पहनाने लगी. आँचल मन ही मन सोचने लगी 4 घंटे कैसे निकल गये पता ही नही चला. क्या मस्त चुदाई का आनंद मिला है मुझे आज.

आँचल स्वामीजी के साथ वेटिंग रूम में आई, सुनील ने स्वामी को देखकर हाथ जोड़ दिए. आँचल के चेहरे पर परम संतुष्टि के भाव देखकर सुनील खुश हुआ ,उसने सोचा पूजा बहुत अच्छी तरह से हुई , लग रहा है.

स्वामी ने सुनील से कहा , “ कल इसको फिर टाइम पर ले आना.”
और फिर आँचल के चेहरे पर आई शरम को देखकर मुस्कुराने लगा.

घर पहुँचने के बाद सुनील वापस फैक्ट्री चला गया. 

लंच टाइम में आँचल के ससुर ने उससे पूछा , “ पूजा कैसी रही ?”

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आँचल ने सर झुकाकर जवाब दिया, “ स्वामीजी ने बहुत अच्छे ढंग से पूजा की.”

फिर ससुर बोला,” कल मैं तुम्हें पूजा के बाद आश्रम से लेने आऊँगा क्यूंकी बैंक में कुछ पेपर्स पर तुम्हारे साइन करवाने हैं.”

लेकिन आँचल को मालूम नही था की ठरकी बुड्ढा बैंक के बहाने से उसको उसी दोस्त के होटेल में ले जाना चाहता है जहाँ वो अपने दोस्त के साथ मिलकर कभी कभी रंडी चोदता है. ससुर मन ही मन सोच रहा था कल तो होटेल में इस सेक्सी बहू को मैं चोदूँगा ही चोदूँगा.
लंच के बाद आँचल अपने बेडरूम में चली गयी और दरवाज़ा बंद करके बाथरूम में बाथटब में गरम पानी भरके टब में बैठकर नहाने लगी. आज के दिन जो उसको मज़ा मिला था उन पलों के बारे में सोचने लगी. स्वामी भोगानंद वास्तव में एक अनुभवी चोदू था. स्वामी और उसकी चुदाई के बारे में सोचने से आँचल उत्तेजना महसूस करने लगी. अभी दो दिन तक और स्वामी उसको पूजा के बहाने चोदने वाला था.

वो दोनो लड़कियाँ भी सेक्सी थी और ख़ासकर जिस लड़की ने आँचल की चूत चाटी थी , उसका ऐसा करना आँचल को बहुत पसंद आया था. आँचल सोचने लगी काश स्वामी उन दोनो लड़कियों को भी सेक्स करते समय बुला ले तो मज़ा बढ़ जाएगा.आँचल उन दोनो लड़कियों को अपने सामने स्वामी से चुदते हुए देखना चाहती थी. इन सब कामुक ख़यालों को सोचते हुए आँचल की चूत से रस बहकर बाथटब के गरम पानी में मिल गया. आँचल चूत में उंगली डालकर मूठ मारने लगी. फिर आँचल को याद आया की उन दोनो लड़कियों ने अपनी चूत में बाल साफ किए हुए थे. 

आँचल ने कभी भी अपनी चूत शेव नही की थी उसकी चूत में काले घने बाल थे. वो बाथटब से उठी और सुनील के रेज़र से चूत के सारे बाल साफ कर दिए. अपनी चिकनी साफ चूत को देखकर उसे ऐसा लगा की जैसे ये शादीशुदा औरत की ना होकर किसी कुँवारी लड़की की चूत है. उस टाइट चूत की वजह से ही उसे चोदने वालों को इतना ज़्यादा मज़ा मिलता था की वो कामोन्माद से पागल हो जाते थे. 

फिर चिकनी चूत पर हाथ फेरते हुए वो अपनी क्लिट को मसलने लगी और जल्दी ही ओर्गास्म से झड़ गयी. गरम पानी से नहाने के बाद उसने एक पारदर्शी नाइटी पहनी और दोपहर की नींद लेने के लिए बेड में लेट गयी. जैसे ही उसको नींद आने लगी , किसी ने उसका दरवाज़ा खटखटाया. कौन आ मरा ये नींद खराब करने ! हद है .

आँचल ने उठ कर दरवाज़ा खोला , कौन था भाई ?
और कौन होगा वही ठरकी ससुर था.

ससुर कहने लगा की ताश के पत्ते खेलने का मूड हो रहा है. आँचल ना नुकुर करने लगी लेकिन बुड्ढा सीधे अंदर आकर बेड में बैठ गया और ताश के पत्ते फेटने लगा. आँचल को ना चाहते हुए भी खेलने के लिए ससुर के साथ बैठना पड़ा.

खेलते वक़्त ससुर की नज़रे देखकर आँचल समझ गयी की ये पारदर्शी नाइटी के मज़े ले रहा है. आँचल ने तो सोने के लिए वो नाइटी पहनी थी उसे क्या पता था की ससुर उसके बेडरूम में आ धमकेगा . उसका मन हुआ की बाथरूम जाकर नाइटी बदल के आए. लेकिन फिर उसने सोचा की उस दिन सलीम के चोदने के बाद मुझे बेड पर नंगी रोते हुए ससुर देख ही चुका है , तो रहने देती हूँ.

वैसे भी आँचल को अपने ससुर को टीज़ करने में मज़ा आता था . उसने सोचा चलो बुड्ढे को तड़पाकर मज़े लेती हूँ. घर में सास है तो ये कुछ गड़बड़ कर नही पाएगा. आँचल पत्ते उठाने के बहाने जानबूझकर झुकने लगी और ससुर को अपनी चूचियाँ दिखाने लगी. ससुर समझ गया ये सेक्सी बहू फिर मुझे टीज़ कर रही है. वो उत्तेजित होने लगा. मन ही मन सोचने लगा कल तुझे पूजा के बाद मैं आश्रम में लेने आऊँगा और फिर दोस्त के होटेल ले जाकर जी भरके चोदूँगा.

फिर आँचल खेलने के बहाने ससुर की बाँह टच करने लगी और सेक्सी सा चेहरा बनाकर मंद मंद मुस्कुराने लगी. अब ससुर से कंट्रोल नही हो पाया और उसने आँचल का हाथ पकड़कर अपने पैंट में खड़े लंड के ऊपर रख दिया. आँचल हैरानी से अवाक रह गयी उसकी हालत देखकर ससुर मुस्कुराने लगा.

आँचल ने अपने हाथ में पैंट के अंदर फनफनाते लंड को महसूस किया , जो लोहे की तरह सख़्त हो चुका था. आँचल धीरे से बोली, “ उन्ह……..ससुरजी ये आप क्या कर रहे हैं ?”

ससुर भी धीरे से बोला, “ देखोगी क्या ?”

“नही…नही…उम्म्म…कोई आ जाएगा,” आँचल ने जवाब दिया.

जब ससुर ने देखा की बहू तो अपना हाथ नही छुड़ा रही है तो उसकी हिम्मत और बढ़ गयी, वो बोला, “ ज़ोर से पकड़ो, खुद ही देख लो , मैं अभी भी जवान हूँ.”

ससुर ने देखा की उसके कहने से, आँचल ने उसके लंड को पैंट के बाहर से थोड़ा ज़ोर से पकड़ लिया है , वो उत्तेजना में बोला, “ कल देखना मैं तुम्हे चोदूँगा और तुम्हारी जवानी की प्यास बुझाऊँगा , मेरी आँचल रानी.”

ससुर के खड़े लंड को पकड़ने से और उसके मुँह से कल को अपनी चुदाई के इरादे की बात सुनकर आँचल की उत्तेजना बढ़ गयी और उसकी साँसे भारी हो गयी. उसके दिमाग़ की बजाय फिर जिस्म की प्यास हावी होने लगी. उसका ससुर के लंड से हाथ हटाने को मन ही नही कर रहा था . वो सोचने लगी ससुरजी का लंड कितना सख़्त और मोटा लग रहा है पैंट के बाहर से ही. आँचल की चूत से रस बहने लगा.

अपनी बहू को विरोध ना करते देखकर और गहरी गहरी साँसे लेते हुए देखकर , ससुर बोला,” मेरी आँचल रानी, मैं तुम्हें बहुत मज़ा दूँगा, तुम्हें चोदकर मस्त कर दूँगा.”

फिर वो आँचल के करीब आ गया और उसको अपने आलिंगन में जकड़ लिया. 

अपने ससुर के टाइट आलिंगन से आँचल कसमसाई,”…उउउन्न्ह….ओह्ह ससुरजी….”

ससुर आँचल की पीठ पर हाथ फिराने लगा. ससुर की गंदी बातों और अपने बदन से छेड़खानी से आँचल मदहोश हो गयी. अगर ससुर चाहता तो बहू को इस समय आराम से चोद सकता था क्यूंकी आँचल मदहोशी से विरोध नही कर पाती. लेकिन घर में सास के होने से ऐसा करने में बहुत ख़तरा था.

ससुर उसको आलिंगन में लेकर उसके बदन पर हाथ फेरते हुए बोला,” मैं तुम्हारी चूत से तुम्हारा रस पीयूँगा , मेरी आँचल रानी.”

ससुर के मुँह से ऐसी कामुक बातें सुनकर आँचल ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी. ससुर की फट गयी कोई सुन ना ले , उसने जल्दी से आँचल के मुँह पर अपना हाथ रख दिया. आँचल की पैंटी चूतरस से पूरी भीग चुकी थी और चूत के होंठ उत्तेजना से फूल चुके थे. उसको ओर्गास्म आ गया और वो ससुर के आलिंगन में झड़ गयी.

तभी उनको सास की आवाज़ सुनाई दी जो नौकर से पूछ रही थी , “ तुमने साहब को कहीं देखा ?”

सास बेडरूम की तरफ ही आ रही थी.
आँचल बेड से कूदकर बाथरूम में भागी , वो अभी भी उत्तेजना से कांप रही थी.

ससुर अपने लंड के इरेक्शन को छुपाने की कोशिश करने लगा और उत्तेजना से छलक आए पसीने को चेहरे से पोछने लगा. फिर जल्दी से हाथ में ताश के पत्ते लेकर बैठ गया.

तभी सास बेडरूम में आ गयी. 

ससुर को वहाँ बैठे देखकर वो भड़क गयी और बोली,” यहाँ पत्ते लेकर क्या बैठे हो. बहू सुबह उतनी देर तक पूजा से थककर लौटी है .थोड़ी देर दोपहर में उसको आराम तो करने देते. अब चलो यहाँ से.”

बीवी की डांट खाकर ससुर चुपचाप सास के पीछे पीछे आँचल के बेडरूम से बाहर चला गया.

आँचल अपने बाथरूम से सब सुन रही थी और डर और उत्तेजना से कांप रही थी. उसने सोचा अभी सास ने पकड़ ही लिया था ससुर के साथ. ससुर के साथ तो बहुत ही ख़तरा है. मुझे अपने जिस्म पर काबू रखना चाहिए. 

लेकिन वो अपने जिस्म पर काबू कैसे रख सकती थी ? वो सेक्सुअली फ्रस्टरेटेड थी क्यूंकी उसका पति बिस्तर में उसको सैटिस्फाई नही कर पाता था. वो जवान थी, खूबसूरत थी और अब जब उसने असली चुदाई का स्वाद चख लिया था तो वो कैसे कंट्रोल कर सकती थी. उसको चुदाई में बहुत मज़ा आता था लेकिन उसका पति जल्दी झड़ जाने के कारण उसकी प्यास नही बुझा पाता था. 

लेकिन ससुर के साथ कोई भी संबंध बहुत रिस्की था , ये उसने अभी देख लिया था की वो कैसे सास द्वारा पकड़े जाने से बाल बाल बची थी. इसलिए आँचल ने फ़ैसला किया की वो ससुर को अपने से दूर ही रखेगी. वो ससुर के साथ कल बैंक जाने से बचने का रास्ता ढूंढने लगी.

फिर उसने अपने बेडरूम का दरवाजा बंद किया और बेड में सोचते सोचते उसे नींद आ गयी.

उठने के बाद आँचल ने बैडमिंटन खेलने के लिए क्लब जाने की सोची. इससे उसकी थोड़ी एक्सर्साइज़ भी हो जाएगी और सुनील के घर आने तक वो अपने सास ससुर से दूर भी रह पाएगी. क्लब पहुँचने के बाद उसने लेडीज लॉकर रूम में कपड़े बदलकर सफेद टीशर्ट और सफेद स्कर्ट पहन ली. क्लब में ड्रेस के मामले में बहुत सख्ती थी और कैज़ुअल ड्रेस में खेलने की मनाही थी.

आँचल क्लब में किसी को भी नही पहचानती थी इसलिए उसने वहाँ के एक कर्मचारी से एक गेम खेलने की रिक्वेस्ट की. वो 20 मिनिट का गेम खेलने को तैयार हो गया. उस बुड्ढे कर्मचारी ने आँचल को पूरे कोर्ट में दौड़ा दौड़ा कर खूब एक्सर्साइज़ करवा दी.

वहीं कुछ स्कूल के लड़के भी खड़े थे , वो सब आँचल को देख रहे थे. सेक्सी आँचल को कोर्ट में इधर उधर दौड़ते और उसकी चूचियों को टीशर्ट में उपर नीचे हिलते देखकर उन्हे बहुत मज़ा आ रहा था. आँचल जब शट्लकॉक उठाने के लिए झुकती थी तो वो उसकी पैंटी देखने की कोशिश करते थे. आँचल का ध्यान उनकी तरफ नही था. वो लड़के क्लब में बैडमिंटन खेलने अपने ग्रुप के साथ आया करते थे और आज मादक आँचल को टीशर्ट और स्कर्ट में बैडमिंटन खेलते देखकर अपना खेलना भूल गये थे. उनकी निगाहे आँचल पर ही जमी थी.

गेम खत्म होने के बाद आँचल पसीने से लथपथ हो गयी. उसकी टीशर्ट पसीने से भीगकर उसके बदन से चिपक गयी और गीली होने से थोड़ी पारदर्शी हो गयी. आँचल कोर्ट के किनारे बैठकर टॉवेल से अपने को पोछने लगी. तभी वो 3 लड़के उसके पास आए और उसे गुड आफ्टरनून बोले. फिर उन्होने आँचल से 2-2 का जोड़ा बनाकर डबल्स गेम खेलने की रिक्वेस्ट की. आँचल ने कहा थोड़ा रेस्ट कर लेती हूँ फिर खेलेंगे.

उनमे से 2 लड़के कोर्ट में खेलने लगे लेकिन जो सबसे लंबा लड़का था वो आँचल के पास बैठा रहा. उसने अपना नाम विकी बताया और अपने दोस्तों के बारे में आँचल को बताने लगा. बोलते हुए वो आँचल को ऊपर से नीचे तक घूर रहा था. विकी ने आँचल की खूबसूरती की तारीफ की और उससे पूछा की वो किस कॉलेज में पढ़ती है ? जब आँचल ने बातया की वो शादीशुदा है और मिसेज जोशी है तो विकी कहने लगा, आप टीशर्ट और स्कर्ट में बहुत खूबसूरत लग रही हो, शादीशुदा औरत कौन बताएगा आपको.

आँचल विकी के मुँह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर शरमा गयी और मन में उसे खुशी हुई की मैं इतनी सुंदर दिखती हूँ. फिर विकी के साथ जोड़ा बनाकर उसने गेम खेलना शुरू किया. विकी बैडमिंटन खेलने में एक्सपर्ट था उसको खेलते देखकर आँचल उसकी चुस्ती और फिजिक से प्रभावित हुई. 

गेम के दौरान जब भी शट्लकॉक आँचल के पास गिरती तो विकी फटाफट उठाने आ जाता और आँचल की स्कर्ट के अंदर झाँककर उसकी जांघें और पैंटी देखने का आनंद लेता. दो तीन बार उसने गेम के बहाने से आँचल की जांघों और उसकी चूचियों को छू भी दिया पर हर बार सॉरी कहकर ऐसा दिखाता जैसे ग़लती से टच हुआ है.

जब आँचल थक गयी तो लेडीज रूम में जाकर उसने शावर के नीचे नहाया. लेडीज रूम मे लाइन से शावर बने हुए थे लेकिन ओपन थे. आँचल ने वहाँ कुछ लड़कियों को तारीफ भरी निगाहों से अपने बदन को ताकते पाया. आँचल को पता नही था की उन लड़कियों में एक विकी की गर्लफ्रेंड करिश्मा भी थी. करिश्मा ने देखा था की कैसे गेम खेलने के बहाने उसका BF आँचल के बदन को छूने की कोशिश कर रहा था. करिश्मा को जलन महसूस हुई. जब उसने आँचल को लॉकर रूम में जाते देखा तो वो भी उसके पीछे चली आई. नहाते समय आँचल के मादक जिस्म को देखकर करिश्मा को उत्तेजना महसूस हुई.

नहाने के बाद फटाफट कपड़े पहनकर आँचल अपने घर चली गयी.

रात में डिनर करते समय आँचल ने देखा आज ससुर बहुत खुश है . उसको कुछ ज़्यादा ही खुश और मुस्कुराते देखकर वो समझ गयी की ये कल के अपने चुदाई के प्लान से इतना खुश हो रहा है . वो परेशान हो गयी की इस समस्या का हल कैसे निकाले.

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