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सेक्स कहानी ससुर बहु की चुदाई की-1

में अभी तक आपने पढ़ा कि देवर भाभी और भाई बहन आपस में चुदाई में लगे हुए थे.

इस घर के हॉल में लगे सोफे पर दो जोड़े जबरदस्त चुदाई में लगे हुए थे. दोनों जोड़ों की चुदाई के कारण हॉल में हच हच.. की आवाज़ें गूंज रही थीं. इन दो जोड़ों में एक भाई-बहन थे और दूसरा देवर-भाभी लंड चूत के खेल में लगे थे.

पर इस समय सब लोग सेक्स की भूख में अंधे हुए पड़े थे. उनको सिर्फ एक ही चीज़ चाहिए थी और वो थी चुदाई. उन्हें किसी बात की कोई परवाह नहीं थी.

पर उनको परवाह करनी चाहिए थी. उनको परवाह करनी चाहिए थी कि अब मोहन लाल (इन भाई-बहन का पिता और मयूरी का ससुर) घर आ चुका था और वो हॉल में दरवाज़े के पास खड़ा, ये दृश्य देख रहा था. वो देख रहा था कि उसके घर के अपने ही बच्चे आपस में चुदाई में व्यस्त थे.

अचानक काजल की नज़र अपने पापा पर पड़ी. उसके मुँह से आवाज़ ठीक से निकल नहीं पाई क्योंकि इस समय रमेश उसको बहुत ही तेज़ तेज़ धक्के लगाकर चोद रहा था. वो लगभग फिर से काजल की चूत में दुबारा झड़ने वाला था. पर काजल के मुँह से कांपती हुई आवाज़ निकली, जो डर और चुदाई की उत्तेजना से मिली जुली थी.

काजल- पा..पाआआ..?

रमेश की जोरदार चुदाई वाले धक्के की वजह से उसकी आवाज़ रुक रुक कर निकल पा रही थी. तभी, रमेश ने अपना वीर्य काजल की चूत में छोड़ दिया और उसने पीछे मुड़कर देखा तो उसको अपने पिता के दर्शन हुए.

अब सुरेश और मयूरी भी दरवाजे की तरफ खड़े अपने पिता और ससुर को देखने लगे.

आज इस घर में बहुत बार अप्रत्याशित घटनाएं हो रही थीं. सुरेश और काजल के लिए ये तीसरी बार था, जब वो नाजायज चुदाई करते हुए पकड़े गए थे और रमेश के लिए दूसरी बार था.

सब फिर से चुप हो गए. कोई कुछ बोल नहीं रहा था. चुदाई और धक्के की आवाज़ें रुक गई थीं और सब एक दूसरे को देखने लगे.

इस सन्नाटे के थोड़ी देर बाद मयूरी ने ही शुरुआत करने की सोची. इसके कई कारण थे. एक तो वो इस घर की बेटी नहीं थी, वो इस फैमिली से बाहर की लड़की थी, जबकि बाकियों के बीच में खून का रिश्ता था. दूसरा, वो ऐसे माहौल से निपटना पहले से ही जानती थी. उसको अपने मायके में अपने पिता और भाइयों से चुदाने के कारण इस तरह की स्थिति से निपटने का अनुभव था.

मयूरी धीरे से गम्भीरतापूर्वक ऐसे सामान्य लहजे में बोली, जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो- पापा.. आप आ गए?
फिर वो उठी और उसने अपनी ब्लैक कलर की पैंटी को उठा कर पहन लिया. उसने सबको शांत रहने का इशारा किया जैसे वो सब संभाल लेगी. फिर उसने पास ही पड़ा एक दुपट्टा उठाया जो 90% तक पारदर्शी था, उस दुपट्टे को उसने अपनी चूचियों पर डाला, जैसे उसको छुपाना चाहती हो. पर पारदर्शी होने के कारण कुछ भी नहीं छुपा और वो ये बात भली भांति जानती भी थी.

वो अपनी गांड मटकाते हुए मोहन लाल के पास गई और मुस्कुराते हुए बड़े ही कामुक अंदाज में बोली- आप आ गए पापा?

मयूरी मोहन लाल के इतने पास खड़ी थी कि वो चाहता तो उसकी चूचियों को पकड़ कर मसल देता, पर मोहन लाल ने ऐसा कुछ नहीं किया. वो कुछ भी नहीं बोला और चुपचाप खड़ा रहा पर उसकी आँखें नियत्रण में नहीं थीं. वो मयूरी की चूचियों को उसके पारदर्शी दुपट्टे के ऊपर से ताक रहा था.

मयूरी फिर बोली- दरवाज़ा अन्दर से बंद कर दिया पापा? क्योंकि मैं नहीं चाहती कि इस अवस्था में हमें कोई बाहर का आदमी देखे. ये हमारे घर की बात है, बाहर नहीं जानी चाहिए.
मोहन लाल कुछ नहीं बोला. वो एकटक मयूरी की उन दो मनमोहक चूचियों को देखता ही जा रहा था, ऐसे जैसे उनको नोंच खाएगा.

फिर मयूरी खुद ही दरवाज़े की तरफ बढ़ी और ऐसे झुकी जैसे पीछे से मोहन लाल को अपनी गांड के दर्शन करवाना चाहती हो और दरवाज़े को अन्दर से बंद करने की कोशिश करने लगी. इस कोशिश में उसने थोड़ा वक़्त लिया और अपनी गांड जानबूझ कर हिला हिला कर मटकाती रही.

मोहन लाल पीछे से मयूरी को ही देख रहा था. पैंटी में होने की वजह से उसको अपनी बहू की गांड इतनी कामुक लग रही थी कि अब तक उसके पायजामे के नीचे से उसका लंड टेंट बना चुका था.

मयूरी बहुत ही तेज़ तर्रार शातिर औरत थी. उसको मोहन लाल की स्थिति का पूरा पता चल गया था. उसने अंदाजा लगाया कि इस आदमी की उम्र 48 साल है और 7-8 साल पहले इसकी पत्नी गुजर चुकी है, इसका मतलब इसको बहुत सालों से चूत नहीं मिली है. ऐसे आदमी को अपने वश में करना बहुत मुश्किल काम नहीं था, ये बात मयूरी अच्छे तरह से जानती थी. चाहे वो उसका ससुर हो, पर सेक्स की भूख इंसान को रिश्तों को समझने के लायक नहीं छोड़ती.

मयूरी समझ गई थी कि इस 48 साल के आदमी ने अभी अभी अपने बच्चों आपस में सेक्स करते हुए देखा है और इसके मुँह से एक आवाज़ तक नहीं निकली थी, इसका मतलब ये जरूर कुछ न कुछ सोच रहा था, जोकि इस घर में हो रही चुदाई की पक्ष में था.

और मयूरी ने मोहन लाल के स्थिति का लगभग बिल्कुल सही अंदाजा लगाया था. वो बेचारा कई वर्षों से सेक्स का भूखा था. कुछ बात जिसका अंदाजा मयूरी नहीं लगा पा रही थी, वो था मोहन लाल का अतीत या उसका गुजरा हुआ कल.

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मोहन लाल अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था. पर जब वो जवान थी तो उसको प्यार करने वाला वो अकेला इंसान नहीं था. मोहन लाल की पत्नी के पिता यानि के मोहन लाल के ससुर भी उसको उतना ही प्यार करते थे, जितना वो उसको करता था. मोहन लाल और उसकी पत्नी के पिता दोनों अक्सर मिल कर उसकी चुदाई किया करते थे. वैसे भी कई सालों तक मोहन लाल की पत्नी को दो लोगों से चुदने की आदत हो चुकी थी. वैसे वो चरित्रहीन नहीं थी, क्योंकि अपने पिता के एक दुर्घटना में गुजर जाने के बाद उसने किसी और मर्द की तरफ नज़र भी नहीं उठाया. पर जब तक वो जिन्दा थे, उसको चुदाई का मजा सबसे ज्यादा तभी आता था, जब उसके पिता और पति दोनों एक साथ उसको जोर जोर से चोदते थे.

मोहन लाल के इस राज का किसी को यहाँ पता नहीं था, क्योंकि उसकी पत्नी और ससुर पहले ही गुजर चुके थे. इन सब बातों की वजह से उसके लिए अपने परिवार के सदस्यों के बीच चुदाई कोई नई बात नहीं थी. वो इन सबको आपस में चुदाई करते हुए देख कर थोड़ा आश्चर्यचकित जरूर था, पर उसे कुछ बुरा नहीं लग रहा था.

इधर अपनी बहू मयूरी को देख देख कर वो अक्सर उसके नाम का मुठ मारा करता था. कितनी बार वो उसकी ब्रा पैंटी को चोरी-छुपे छू कर मजे लेते लेते मुठ मार लिया करता था.

और आज साक्षात् वही मयूरी उसके सामने नंगी खड़ी होकर उसको रिझा रही थी. उसको पता था कि थोड़ी ही देर में उसका लंड मयूरी की चूत की ठुकाई कर रहा होगा. ये सब उसके लिए जैसे सपने के साकार होने जैसा था.

कुछ पल बाद मयूरी दरवाजे को ठीक से अन्दर से बंद करने के बाद वापिस मोहन लाल के पास आई, उसने दुपट्टे का एक भाग अपने सर पर रखा और उसके पैर छूती हुई बोली.

मयूरी- बाबूजी, मुझे आशीर्वाद दीजिये.. अभी थोड़ी देर पहले ही मैं मंदिर से पूजा करके आई हूँ. बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद के बिना पूजा पाठ कभी पूरा नहीं होता.
मोहन लाल- बहू, ईश्वर तुमको दुनिया की सारी खुशियां दे.. तुम तो बहुत ही चरित्रवान हो, इस घर की देवी हो. अभी चुदाई करते करते भी तुमने मेरा कितना मान-सम्मान रखा. नंगी होने के वावजूद तुमने पहले अपनी पैंटी पहनी और अपनी चूचियों पर दुपट्टा डाला, उसके बाद ही मेरे पास आई. और अब इस अवस्था में भी मेरे से आशीर्वाद ले रही हो जबकि तुम्हें अच्छी तरह पता है कि कुछ ही देर में मैं तुम्हारी चूत में अपना लंड डालकर तुम्हें जबरदस्त चोदने वाला हूँ. तुम्हें बहू के रूप में पाकर मैं धन्य हो गया!

मयूरी ने अपने ससुर का खड़ा लंड पकड़ते हुए कहा- बाबूजी, आप मुझे अपनी माशूका के रूप में पाकर और भी ज्यादा धन्य हो जाएंगे. बताइये बाबूजी, आप पहले मेरी चूचियों का मजा लेना चाहते हैं कि मैं आपके इस खड़े लंड को चूस चूस कर इसको सम्मान दूँ?
मोहन लाल- पहले मैं तुम्हारे इन रसीले होंठों का रस पियूँगा बहू. फिर उसके बाद ही कुछ करूँगा.

मोहन लाल ने अपने बच्चों की तरफ मुड़ते हुए कहा- काजल, तुम अपने दोनों भाइयों के लंड का मजा लो. मैं तुम्हारी चूत का शिकार थोड़ी देर में करूँगा. पहले मैं अपने सपने की इस परी से निपट लूँ.

यह सुन कर रमेश, सुरेश और काजल को मयूरी पर बड़ा ही गर्व महसूस हुआ और उन्होंने राहत की साँस ली. उन्होंने देखा कि मयूरी ने उनके पिता को पूरी तरह से अपने काबू में कर लिया है. अब घर में माहौल फिर से सामान्य हो गया था. यहाँ पर चुदाई का सैलाब आने वाला था.

अब दोनों भाइयों ने काजल को सोफे पर बीच में बिठाया और दोनों ने एक एक चूचियों को अपने हाथों से मसलना शुरू कर दिया. सुरेश ने काजल के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और अपनी जुबान उसके मुँह में डाल कर चलाने लगा. उसे थोड़ी देर पहले जो मयूरी ने सिखाया था, उस ज्ञान का वो सम्पूर्ण उपयोग कर रहा था.

इधर रमेश एक हाथ से काजल की चूत पर हमला किया जा रहा था और दूसरे हाथ से उसने उसकी एक चुची को संभाल रखा था. काजल अपने दोनों भाइयों के इस चौतरफे हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी. वो उत्तेजना के मारे जोर जोर से सांसे लेने लगी. उसकी धड़कनें अभी सड़क पर दौड़ती हुई किसी गाड़ी की रफ़्तार की तरह चल रही थीं. वो इस पल का पूरा आनन्द ले रही थी. उसको लग रहा था कि ईश्वर ने आज उसको छप्पर फाड़ के खुशियाँ दी हैं. उसको लग रहा था कि इतनी खुशियों की वजह से उसकी गांड फटने वाली है.

अगले ही पल सुरेश ने रमेश से कहा- भैया, मैं काजल की चूत में अपना लंड डाल कर उसको चोदना चाहता हूँ.
रमेश- जरूर मेरे भाई.. आज अपनी बहन को दिखा दो कि तुम उससे कितना प्यार करते हो.
और ऐसा कहकर रमेश ने काजल की चूत से हाथ हटा लिया.

सुरेश ने काजल की टांगों को फिर से फैलाया और उसकी चूत के छेद पर अपना लंड सैट करके धक्का लगाना चालू कर दिया. सुरेश का लंड रमेश के लंड से बड़ा होने की काजल के लिए फिर से थोड़ा मुश्किल हो रहा था, पर ज्यादा उत्तेजना के कारण वो फिर से झड़ गई और उसका चूत पानी से भर गया. इस वजह से उसकी चूत में चिकनाई बढ़ गई और सुरेश का बड़ा लंड आराम से अन्दर बाहर आने-जाने लगा. उसकी चूत से फिर से हच हच की आवाज़ आने लगीं.

रमेश ने काजल के मुँह का रुख किया और उसके मुँह पर बैठ गया. उसने काजल के मुँह में अपना लंड घुसाया और उसके मुँह को अपने लंड से चोदने लगा. अब काजल के मुँह और चूत दोनों लंड से घमासान चुदाई हो रही थी. वो तो जैसे स्वर्ग की सैर कर रही थी. क्योंकि ये दोनों लंड उसके अपने ही भाइयों के थे.
सुरेश उसकी चूत पर हमला करने के साथ साथ उसकी चूचियों को भी मसल रहा था. आज तीनों भाई बहन जैसे एक हो गए थे.

इधर मोहन लाल ने मयूरी के होंठों के रस का स्वाद लेते हुए पहले तो उसका दुपट्टा निकाल फेंका. फिर उसकी पैंटी को पकड़कर फाड़ दिया और उसके शरीर से अलग कर दिया. वो 48 साल का आदमी पता नहीं कहां से गजब की शारीरिक ताकत का प्रदर्शन कर रहा था.
मयूरी को ये सब कारगुजारियां एक नई उम्मीद दिला रही थीं कि ये नया लंड उसकी जम कर चुदाई करने वाला है.

फिर थोड़ी देर में मोहन लाल उसके नीचे बैठ गया. मयूरी को लगा कि शायद वो उसकी चूत चाटने वाला है. पर मोहन लाल के दिमाग में तो कुछ और चल रहा था. उसने मयूरी से कहा- बहू तुम पलट जाओ और झुक कर मुझे अपनी गांड की छेद के दर्शन करा दो..
मयूरी- जी बाबूजी..

मयूरी झट से पलट कर झुक गई और मोहन लाल को अपनी जानलेवा मक्खन जैसी गांड के दर्शन कराने लगी.
मोहन लाल ने मयूरी से कहा- बहू.. मैंने तेरी इस गांड के बहुत सपने देखे हैं. जिस दिन से मैंने तुमको रमेश के लिए पसंद किया था, उसी दिन से हमेशा ही सपना देखा है कि काश मुझे तुम्हारी ये गांड मारने को मिल जाए.
मयूरी- ओह बाबूजी.. मुझे आपकी इस भावना का जरा भी अंदाजा नहीं था, नहीं तो मैं आपको अपनी सुहागरात में ही अपनी गांड के दर्शन करवा देती. खैर अब ये पूरी तरह आपका छेद है और आपके लंड के सामने है.

इस चुदक्कड़ परिवार की सेक्स स्टोरी की रसधार का अगले अंक में फिर से मजा लीजिएगा. मेल जरूर कीजिएगा.

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