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ससुर और उनके दोस्ते ने मुझे मिलकर चोदा

हेल्लो दोस्तों, मैं सबना खान आप सभी का में बहुत बहुत स्वागत करती हूँ। मैं पिछले कई सालों से की नियमित पाठिका रहीं हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती तब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ती हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रही हूँ। मैं उम्मीद करती हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी।
मैं बहुत ग़रीब घर की लड़की थी, मेरे अब्बा एक मजदूर थे। उनके पास मेरी शादी करने के पैसे भी नही थे। पर मैं बहुत खूबसूरत और जवान लडकी थी इसलिए मेरे अब्बा के पास अपने आप शादी के रिश्ते आने लगे। कुछ दिनों बाद एक आदमी आया। वो अपने लड़के की शादी के लिए एक अच्छी और सुंदर लड़की ढूढ़ रहा था। वो बार बार अपने खानदान का बखान कर रहा था। उसका नाम सुलतान था। वो 6 फुट का मोटा तगड़ा आदमी था और देखने में बिलकुल कसाई लगता था। मुझे वो आदमी कुछ ठीक नही लग रहा था। जब मेरे अब्बा ने पूछा की वो कितना दहेज़ लेगा तो वो हसने लगा और कोई दहेज़ लेने से मना कर दिया। मेरे अब्बा ने कहा की उनके पास शादी करने के पैसे भी नहीं है, तो सुलतान ने अब्बू को २ लाख रुपया दे दिया। वो मेरा होने वाला ससुर था।
मुझे कुछ ठीक नही लग रहा था पर मुझे शादी करनी पड़ी। क्यूंकि मेरी 5 बहने और थी। अगर मैं शादी नही करती तो बाकी बहने भी बैठी रहती। मैंने दिल पर पत्थर रखकर शादी कर ली। निकाह होने के बाद मेरी विदाई हो गयी और मैं ट्रेन से अपने होने वाली पति, ससुर, सास, और बाकी परिवार के साथ औरंगाबाद आ गयी। यहाँ पर रात में मेरे ससुर मेरे कमरे में आ गए और मेरे पति बाहर चले गये। उन्होंने मुझे नंगा करके बेदर्दी से चोदा। मेरी चूत से खूब खून निकला। पूरे १ महीने तक वो मेरी चूत मारते रहे और मेरी गांड भी ससुर जी ने मार ली। बाद में मुझे पता चला की उसके पूरे खानदान में ऐसा ही होता था। औरंगाबाद साइड नई नवेली दुल्हन को ससुर रखता था। वहां पर ऐसी प्रथा थी। ससुर ही बहू की नई चूत को चोदकर उद्घाटन करता था। यहाँ पर लड़को को कम तरजीह दी जाती थी और ससुर का पहला हक बनता था। जब १ महीने बाद मेरे पति मुझे चोदने आये तो मेरी चूत और गांड दोनों ढीली हो चुकी थी। मैं उसके बावजूद भी मैं बहुत मस्त माल थी इसलिए मेरे पति को मेरी चुद्दी मारने में बहुत मजा मिला।
मैं बहुत रोई भी थी इस बात पर। मन हुआ की अपने पति को तलाक दे दूँ पर फिर मैं कहाँ जाती। मैं चुपचाप सब कुछ सहती रही। मेरी ससुराल वाले तो मुझे नौकर ही समझते थे। सुबह उठकर मैं ३० लोगो का खाना बनाती थी। सबको खिलाती थी। सबके कपड़े धोती थी तब तक शाम हो जाती थी और रात का खाना बनाना शुरू हो जाता था। उपर से मेरे ससुर रोज रात में मुझसे पैर दबवाते थे और तेल लगवाते थे। पूरे बदन में मालिश करवाते थे और जब मन करता था मेरी रसीली चूत में लंड डालकर चोद लेते थे।
“अब्बू ये सब ठीक नही है। आप कैसे रोज रोज मेरे साथ ये गंदी हरकत कर सकते है??” मैं कई बार विरोध करती थी तो वो तलाक देने की बात करते थे। बस यही समझिय की मैं किसी तरह जिन्दगी काट रही थी। फिर मेरे २ बच्चे भी हो गये। एक दिन मेरे ससुर ने खूब शराब पी ली और अपने एक दोस्त के साथ रात में 10 बजे घर आए। उनका दोस्त भी एक मोटा सा काला कलूटा आदमी था। उसका नाम बशीर था। वो मेरे ससुर के साथ फलो की आढत का काम करता था। दूसरे शहरों से आम, अमरुद, केला, सेब के बड़े बड़े ट्रक लाता था और औरंगाबाद की फल मंडी में छोटे छोटे दुकानदारों को बेचता था। वो मेरे ससुर के साथ ही बिजनेस पार्टनर था।
“सबना ???? सबना ??? कहा मर गयी???” अब्बू ने मुझे आवाज लगाई।
मैं सो रही थी। इसलिए मैं देर में सुन पायी थी। फिर मैं आई।

“क्या है अब्बू??” मैंने कहा
“माँ की लौड़ी.एक बार में सुन नही पा रही थी। क्या अपनी माँ चुदा रही थी। जा हम दोनों के पीने के लिए गिलास लेकर आ और कुछ चखना भी लेकर आ” मेरे ससुर चिल्लाकर बोले। मैं दौड़ी दौड़ी गयी और गिलास लाकर दिया। मेरे ससुर बहुत बदतमीज और बददिमाग आदमी थे। वो अक्सर मुझ पर हाथ उठा देते थे। इसलिए मैं उसने बहुत डरती थी। मेरे पति की तो घर में कोई इज्जत ही नही थी। वो पैसा नही कमा पाते थे इसलिए उसकी कोई वेलू नही थी। मेरे ससुर ही पूरे ३० लोगो का खर्चा उठाते थे। मेरी नई नई देवरानी की चूत भी वो नियम से मारते थे। हम दोनों बहुओ की चूत वो खूब चोदते थे क्यूंकि हम दोनों को रोटी वही देते थे। इसलिए हम पर उनका हक था। ऐसा मेरे ससुर का सोचना था। मैं जल्दी जल्दी २ ग्लास में शराब उड़ेलने लगी। ससुर और उनका दोस्त बशीर मजे से शराब पीने लगे।

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