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रक्षाबंधन के दिन बहन की चुदाई

अंतरवासना की देसी कहानी के पाठकों को अंकित त्रिपाठी का प्रणाम. मैं हरियाणा के एक शहर में रहता हूँ, मेरी उम्र 22 साल है, कद 5 फीट 7 इंच है, दिखने में सामान्य हूँ लेकिन गाँव का होने के कारण मेरा डील डौल अच्छा है.
यह कहानी है जब मेरी बुआ मधु हमारे घर राखी का त्यौहार मनाने दो दिन के लिए रहने के लिए आयी थी. बुआ की उम्र लगभग 42 साल है, उनकी एक बेटी अंजलि जिसकी उम्र लगभग 20 साल और एक बेटा माणिक है जो करीब 23 साल का है. बुआ तलाकशुदा है और शहर में एक छोटा सा प्ले वे स्कूल चलाती हैं जिसे उनका गुजारा हो जाता है. माणिक दिल्ली में कोई छोटी मोटी नौकरी करता था और उसे राखी पर छुट्टी नहीं मिली थी.

बुआ जब हमारे घर आई तो उनके साथ में उनकी जवान बेटी अंजलि भी थी. मैंने अंजलि को कोई दो ढाई साल बाद देखा था, इन दो ढाई सालों में वो एकदम बदल गई थी, उसकी जवानी खिल कर निखर गई थी.

अंजलि का कद कोई 5 फीट 3 इंच, एकदम गोरी अपनी मम्मी की तरह, दुबली पतली फीगर होगा कोई 32-26-30, वो अपने शहर में बी ए की पढ़ाई कर रही थी.
अंजलि मुझे बहुत सेक्सी लगी. आते ही हमारी नजरें मिली और वो मुस्कुरा दी. मैं समझ गया कि इसके मन में चोर है और मेरे मन का चोर तो उसे देखते ही जाग गया था.

हम आपस में बात करने लगे, उसकी बातों से मुझे स्पष्ट लग रहा था कि उसकी जवानी, उसकी कामुकता उबाल ले रही है, अगर मैं पहल करूं तो वो मुझसे चुद सकती है.
दिन भर मैं अपनी फुफेरी बहन की चुदाई के प्लान बनाता रहा.

हम सब रात को देर तक टीवी देखते रहे, फिर एक एक करके सब जाकर सो गए, अब मैं और अंजलि ही रह गए थे टीवी वाले कमरे में…
अंजलि टीवी देखते देखते उस कमरे में ही सो गयी.

मैं तो इसी मौके की तलाश में था, मैं भी सो गया उसके साथ.
फिर करीब एक बजे मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराना शुरू किया, एक हाथ से उसके दूध दबाने शुरू किये.
मेरी कामुक हरकत से वो जाग गई, फिर उसे भी सेक्स चढ़ने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी.
मैंने उसके होंठों पर होंठ रख कर काफी देर तक उसे चूमा चाटा, फिर उसका टॉप उतार दिया और ब्रा के नीचे से उसकी चूची निकाल कर चूसने लगा, वो कामुकता वश सिसकारियाँ भरने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह…
मैंने अंजलि का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखा तो उसने शर्मा कर अपना हाथ पीछे खींच लिया.

मैंने अब अंजलि की ब्रा उसके जिस्म से बिल्कुल अलग कर दी और उसे सोफे पर लिटा कर उसके ऊपर आ गया. मैंने उसकी टांगें फैला ड़ी और खुद को उसकी जांघों के बीच सेट कर लिया. मेरा लैंड अपन कपड़ों की तह के साथ बिल्कुल उसकी चूत के ऊपर चुभ रहा था. उसके मुख से कामुकता भरी सिसकारी निकल गई.
अब मैं कभी उसके लबों को चूस रहा था तो कभी उसके निप्पल को… साथ साथ मैं उसकी चूत पर अपना लंड घिस रहा था तो उसे बहुत मजा आ रहा था और मुझे भी.

जब अंजलि पूरी उत्तेजित हो गई तो मैंने उसके लोअर के अंदर हाथ घुसाया. थोड़ी आना कानी के बाद उसने मेरा हाथ अपने लोअर में घुसवा लिया. मेरा हाथ सीधे उसकी पेंटी के अंदर ही घुस गया था. उसकी चूत पर कोई बाल महसूस नहीं हुए मुझे… इसका मतलब या तो उसकी झांटें अभी आई नहीं थी या उसने आज ही अपनी झांटें साफ़ की होंगी.

खैर जो भी है… मेरा हाथ अंजलि की चिकनी चूत पर था, उसकी वहुत गर्म थी, मैंने चूत की दरार में उंगली फिराई तो मेरी उंगली गीली हो गई और साथ ही अंजलि उत्तेजना और आनन्द के वशीभूत होकर उछल सी पड़ी जैसे उसे कोई बिजली का झटका लगा हो.
मैंने अंजलि के होंठों को अपने होंठों में दबाया और अपनी उनकी उसकी चूत में फिराने लगा, उंगली से उसकी चूत कुरेदने लगा. वो खूब मचल रही थी, उसे खूब मजा आ रहा था.

अब मुझे लगा कि अब अंजलि को नीचे से नंगी किया जा सकता है, मैंने अपना हाथ बाहर निकाला और उसके लोअर को नीचे खिसकाने लगा. अब फिर उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोकने की कोशिश की लेकिन मैं रुका नहीं और उसका लोअर उतार ही दिया.
अब अंजलि सिर्फ पैंटी में मेरे सामने नंगी थी.
मैं उसकी चूची को चूसते चूसते नीचे सरका और उसका पेट नाभि चाटते हुए उसकी पेंटी पर आ गया.
अंजलि की चूत की कामुक सुगन्ध मेरे नाक में भर कई और मेरे लंड को एक झटका सा लगा एक जवान लड़की की चूत की खुशबू लेकर!

मैंने उसकी चूत पर पैंटी के ऊपर से ही किस किया और अपने नाक से उसकी चूत कुरेदने लगा. अंजलि को गुदगुदी हो रही थी और वो मेरा सर पकड़ पर अपनी चूत से हटा रही थी. अब मैंने उसकी पैंटी नीचे सरकानी शुरू की तो अंजलि ने पानी जांघों को भींच लिया मगर मुझे पैंटी उतारने से नहीं रोका.

मैंने पूरी पैंटी उतार दी और उसकी नंगी चूत पर अपना नाक लगा कर सूंघने लगा. अब मुझसे रुका नहीं गया तो मैं अपनी जीभ निकाल कर उसकी चूत के बाह्य विशाल लबों को चाटने लगा. मेरे आनन्द का पारावार नहीं था क्योंकि मैं अपनी बहन की चूत चाट रहा था.

मैंने अंजलि की चूत की दरार में अपनी जीभ घुसाई तो एक बार फिर अंजलि मचल उठी और उसके मुख से सीत्कारें निकलने लगी.
मैं अपनी बुआ की बेटी की नंगी चूत को चाट रहा था.
कुछ देर बाद मैंने सोचा कि अब मेरी बहन चुदाई के लिए पूरी तरह तैयार है तो मैं अपना लोअर निकालने लगा.
लेकिन अंजलि ने मुझसे पूछा- कंडोम है क्या?

मैं उसके मुख से कंडोम की बात सुन कर हैरान रह गया, अब तक मैं सोच रहा था कि ये मासूम सी लड़की होगी तो कामवासना की अग्नि में जल रही थी लेकिन यह बात सुन कर मुझे लगा कि यह लड़की जरूर खाई खेली है.

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खैर जो भी हो… कंडोम न होने के कारण चुदाई की बात दूसरे दिन के लिये टल गई.
फिर उस रात हमने खूब मस्ती की पर चूत चुदाई नहीं की, मैंने उसकी चूत चाट चाट कर उसे एक बार स्खलित करवा दिया. मैंने उसे अपना लंड चूसने को कहा लेकिन उसने नहीं चूसा, मेरा लंड पकड़ कर उसने मेरी मुठ मार कर मेरी वासना भी कुछ समय के लिए शांत कर दी.
अंजलि ने अपने कपड़े पहने और हम दोनों सो गए.

लेकिन उसी रात 4 बजे लंड फिर खड़ा हो गया, मैंने अंजलि की ओर देखा तो वो तो सो रही थी. मैं उसे जगाने के लिए उसके ऊपर लेट गया तो वो जाग गई.
मगर शायद वो तृप्त हो चुकी थी इसलिये वो मुझसे कहने लगी- यार सोने दो ना…
मैंने कहा- अंजलि यार, मेरा बहुत दिल कर रहा है.
वो बोली- कल तक रुको ना, कंडोम ले आना फिर करेंगे.
तो मैंने कहा- बहनचोद! ना मत कर! मेरा लंड मान नहीं रहा!
तो वो बोली- अगर बच्चा रुक गया तो?
मैंने कहा- मैं बाहर निकाल लूंगा, कुछ नहीं होगा.
तो वो फिर मन करने लगी- यार बहुत डर लगता है… अगर कुछ हो गया तो मैं कहीं की नहीं रहूँगी.
मैंने उसे बहुत समझाया तो वो आखिरकार राजी हो ही गयी.

फिर मैंने उसके तन से सारे कपड़े अलग कर दिए और अपने भी पूरे कपड़े उतार दिए, कुछ देर चूमा चाटी की, उसकी चूचियां चूसी, चूत में उंगली डाली तो मेरी उंगली बड़े आराम से उसकी चूत में घुस गई. मतलब वो पहले ही चुदी हुई थी.
मेरा उत्साह थोड़ा कम सा हुआ मगर फिर भी मैंने फिर अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर लगाया और एक झटके में उसकी चूत में पेल दिया.
वो चिल्लाने लगी- छोड़ बहन के लोड़े! फट जायेगी!
मैंने उसकी बात न सुनते हुए उसकी चूत पर एक और धक्का मारा और अपना पूरा लंड पेल कर कर जोर जोर से अपनी बहन चोदने लगा.

जब उसे मजा आने लगा तो वो भी उचकने लगी. 10-12 मिनट बाद जब मेरी छूट होने को आयी तो मैंने लंड बाहर कर उसके पेट पर पाँच पिचकारी मारी. मेरे साथ साथ अंजलि ने भी परम आनन्द को प्राप्त कर लिया था जो उसके चूतड़ उछालने और उसकी सिसकारियों, किलकारियों से स्पष्ट दिखाई दे रहा था.
मैं उसके ऊपर से हट कर उसकी बगल में लेट गया और उसने अपने पेट से मेरा वीर्य साफ़ किया, अपनी चूत का रस साफ किया और लेट गयी.

मुझे नहीं पता कि मुझे कब नींद आई. लेकिन अंजलि ने मुझे जबरन जगाया और कपड़े पहनने को कहा, वो अपने कपड़े पहन चुकी थी.
मैं तो वहीँ सो गया वो शायद अंदर कहीं जाकर सो गई.

मैं सुबह आठ बजे तब उठा जब मेरी मम्मी ने मुझे जगाया. मम्मी ने कहा- अंकित जल्दी से उठ कर नहा धो ले… आज राखी का त्यौहार है, देख तेरी बुआ और बहन तुझे राखी बाँधने के लिए तैयार हो रही हैं, तू भी हो जा…
मैंने मन ही मन सोचा कि बहन के साथ तो अभी चार घंटे पहले मैंने पूरा त्यौहार मना लिया है.
मैं उठ कर बाथरूम जाने लगा तो सामने से अंजलि आ रही थी, उसके चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान थी. मैं भी उसे देख कर मुस्कुरा दिया.

तैयार होकर हम सबने राखी का त्यौहार मनाया, बुआ ने पापा को और मुझे राखी बांधी और पापा को मेरी दूसरी बुआ से राखी बंधवाने जाना था तो उन्होंने मुझे जल्दी से स्टेशन छोड़ कर आने को कहा. मैं एकदम से स्कूटर उठा कर पापा को स्टेशन छोड़ने चला गया और अंजलि की मुझे राखी बांधने वाली बात वहीँ ख़त्म हो गई.
मुझे इस बात की खुशी थी कि मुझे अंजलि से राखी नहीं बंधवानी पड़ी. नहीं तो मम्मी और बुआ के सामने हम मना नहीं कर सकते थे.

दोपहर का खान वगैरा सबने खा लिया तो मम्मी और बुआ एक कमरे में आराम करने के लिए लेट गई और बातें करने लगी. मुझे पता था कि ये दोनों बातें करते करते सो जायेंगी और दो घंटे नहीं उठेंगी.
मैंने अंजलि को इशारा किया ऊपर वाली मंजिल पर आने के लिए और म्मैने मम्मी को कहा कि मैं ऊपर वाले कमरे में जा रहा हूँ.

मम्मी ने अंजलि को कहा- अंजलि बेटा, तू आ जा हमारे पास लेट जा, आराम कर ले!
लेकिन अंजलि बोली- मामी, मुझे आप बड़ों की बातें सुन कर क्या मजा आयेगा, मैं भी अंकित के साथ ऊपर वाले रूम में जा रही हूँ.
मम्मी ने कहा- ठीक है.

अंजलि भी मेरे पीछे पीछे ऊपर आ गई और मुझसे पूछने लगी- अंकित यार, तुम बाजार गए थे, कन्डोम तो ले आये होंगे?
मैं बोला- शिट यार… मैं भूल गया, अभी लाता हूँ.
मैं तुरंत स्कूटर उठाकर बाजार के लिए निकल गया. घर के आसपास वाले केमिस्ट मुझे जानते थे तो कहीं दूर वाली दूकान से कंडोम खरीदने का सोचा मैंने.
मैं स्कूटर चलाते चलाते सोच रहा था कि ये साली अंजलि कितनी बड़ी रंडी है… इसकी चूत में चुदवाने की आग लगी पड़ी है. साली कुतिया ना जाने कितने लंड खा चुकी होगी अब तक!

खैर मुझे क्या… मेरे लिए तो ये दो दिन का मेला है, हंस खेल कर मजा ले लो!
मैं कंडोम की दो डिब्बी खरीद लाया और घर आकर अंजलि को दिखाई. कंडोम देख कर उसका चेहरा खिल उठा और वो मेरे पास आकर मुझसे चिपट गई.
बस उसके बाद मैंने अंजलि को एक बार चोदा और रात की चुदाई का कार्यक्रम भी पूरा सेट कर लिया.

इन दो तीन दिनों के दौरान मैंने अपनी बहन अंजलि को पांच बार चोदा. इस दौरान मुझे मालूम हो गया था कि मेरी बुआ की बेटी, मेरी बहन अंजलि बहुत बड़ी चुदक्कड़ थी, वो मेरे लंड पर बैठ कर ऐसे कूदती थी जैसे घुड़सवारी कर रही हो!
इतनी बड़ी चुदक्कड़ होने के बावजूद कुतिया ने मेरा लंड नहीं चूसा मेरे बार बार जोर देने के बावजूद भी लेकिन साली अपनी चूत बड़ा मजा ले ले के चटवाती थी.
अरे एक बात बतानी रह गई कि अंजलि को अपनी गांड में उंगली डलवा कर चुदाई करवाने में बहुत मजा आता था लेकिन उसने मुझे गांड कभी नहीं मारने दी.

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