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मौसेरी बहन के साथ चुदाई

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प्रणाम साथियो, मेरा काल्पनिक नाम वीर है, अन्तर्वासना पर ये मेरी पहली सेक्स स्टोरी है। मैं 25 साल का हूँ और मेरा लंड 7 इंच का है। मैं अभी तक वर्जिन ही था, मेरा ये कौमार्य निशा के साथ टूटा। निशा रिश्ते में मेरी कज़िन है यानि मेरी मौसी जी की लड़की है।
मैं एक शरीफ और मीडियम फैमिली से बिलांग करता हूँ।

बात 3 महीने पहले की है, मेरे भाई का रिश्ता तय हुआ और शादी से कई दिन पहले ही मम्मी ने मौसी जी को निशा के साथ बुला लिया।

मैंने निशा को दस साल बाद देखा था अब वो जवान हो चुकी थी। मैंने सदा से ही निशा को एक बहन के नजरिए से ही देखा था.. वो बहुत साफ सुंदर शरीफ लड़की है। मैंने पहले तो उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया था.. बस उससे बहन की तरह ही बुलाता रहता था। निशा घर के काम-काज में बहुत तेज है.. वो सभी को टेस्टी खाना खिलाकर अंत में खुद खाती है।

चूँकि शादी का माहौल था, तो दूसरी मौसी की लड़कियाँ भी आ गईं। मैं सभी बहनों को हंसाता रहता था।

एक दिन मेरी सगी बहन और जीजा जी और भाई.. सभी बैठ कर बातें कर रहे थे। उस वक्त निशा और मैं भी वहीं पे थे। बातों का सिलसिला चलता रहा।

तभी भाई ने कहा- लो जी मेरी तो एक भी साली नहीं है।
मैंने कहा- लो भाई तुम्हारी तो किस्मत फूटी निकली.. आधी घर वाली एक भी नहीं है। भाभी की तो पूरी फैमिली में भी कोई इधर-उधर की भी साली नहीं है।

मेरी इस बात पर सभी हंसने लगे, तो जीजा जी ने मुझसे कहा- क्यों भाई तेरा क्यों स्वाद बिगड़ा हुआ है.. क्या इसीलिए कि भाई की कोई साली नहीं है?
तो फिर से सभी हंसने लगे।
मैंने कह दिया- हाँ जीजा जी, हाय री मेरी फूटी किस्मत..!
फिर तो सभी और निशा भी हंसने लगी।

निशा मुझसे चिपक कर हंस रही थी तो मैंने पहली बार उसको दूसरी निगाह से देखा।

इसके अगले दिन मैंने निशा से पूछा- क्या तुम्हारा कोई ब्वॉयफ्रेंड है?
तो उसने कहा- पागल हो क्या.. मैं ऐसी नहीं हूँ।
‘मतलब कैसी नहीं हो?’
‘मतलब तुम्हारे जैसी..।’
मैंने कहा- नहीं बहना.. मैं भी ऐसा नहीं हूँ।

इसी तरह सारी बहनें और मैं सभी हंसी मजाक तो किया करते थे।

एक दिन मैं मजाक-मजाक में गाना गा रहा था- कुण्डी मत खड़काओ राजा.. सीधा अन्दर आओ राजा.. परफ्यूम लगा के, फूल बिछा के मूड बनाओ ताजा ताजा।
तो निशा बोली- अच्छा… बहुत गंदे हो तुम तो?
मैंने कहा- अच्छा है.. तुमको कुछ तो कहने का मौका मिला।
तो निशा ने शाम को मुझे सीरियसली बोला- तुम गंदे इंसान हो.. गंदी हरकतें करते हो।
मैंने ये कह कर अनसुना कर दिया कि मुझे कुछ काम से बाजार जाना है.. बाद में बात करता हूँ।

मैंने फिर शाम को निशा को अकेले में ऊपर बुलाया और पूछा- हाँ तो बहना निशा.. क्या तुमको मैं सच में गंदा लगता हूँ?
उससे ये बात पूछते समय मेरी आँखों से आँसू निकलने वाले ही थे मुझे बहुत बुरा लग रहा था।
मैंने निशा से कहा भी कि तुम्हारी बात से मेरी आँखों से आँसू निकलने वाले हैं।
निशा कहने लगी- प्लीज भाई रोना मत.. प्लीज मुझे तुम गंदे नई लगते, प्लीज रोना मत।

यह कह कर वो मेरे गले लग गई। वो करीब 20 सेकण्ड तक मुझसे लिपटी रही।

पता नहीं मुझे इससे बड़ा अजीब सा लगा, मतलब यूं लगा कि पहली बार कोई लड़की मेरे गले लगी, तो क्या अहसास होता है।

अब मेरा निशा को देखने का नजरिया बदल गया। मैं उसे अब सिर्फ़ निशा कहकर पुकारता था। पहली बार मैंने किसी लड़की को ऊपर से नीचे पूरी अच्छी तरह देखा। उस दिन मुझे समझ आया कि निशा क्या बला की खूबसूरत है।

फिर जब भी मैं निशा को देखता तो उससे मजाक करता या छेड़खानी करता तो इसमें मुझे मजा सा आने लगा और शायद उसको भी अच्छा सा लगता था। फिर वो जानबूझ कर कोई ना कोई हरकत करती ताकि मैं उसे हाथ लगाऊँ।

निशा को गुदगुदाना नहीं आता था तो मैंने जानबूझ के निशा को गुदगुदी कर देता, शायद उसको मजा आ रहा था। शायद क्या.. मुझे पूरा विश्वास था कि उसको सच में मजा आ रहा था, नहीं तो वो मुझे कुछ न कुछ जरूर कहती। अब मैं उसको कभी भी हाथ से सहला देता था और वो कुछ नहीं कहती थी।

ऐसे ही शाम को जब हम दोनों मजाक कर रहे थे तो अचानक से भाई आ गया।
मैंने कहा- देखो भाई निशा को गुदगुदी करो तो उसे कुछ नहीं होता।
तो भाई ने कहा- हाँ, ये है ही ऐसी कठोर सी गुड़िया।
निशा मुस्कुरा कर रह गई।

फिर भाई की शादी की तारीख धीरे-धीरे नजदीक आ रही थी। इस बीच मैं निशा को जब भी बाजार ले गया तो बाइक से वो मुझे दूर हट कर बैठी थी।
इस पर मैंने कहा- निशा गिर जाओगी.. ढंग से पकड़ लो।

इसके बाद वो मुझे जोर से पकड़ कर बैठ गई। अब जब भी मैं ब्रेक लगाता, उसके छोटे-छोटे मम्मे मुझसे टकराते तो मेरा लंड खड़ा हो जाता।
मुझे लगा कि पहला मौका मिलते ही मुठ मारनी पड़ेगी।

अब शादी वाला दिन भी आ गया। आज तो वो क्या गजब का माल लग रही थी। कसम से दिल तो कह रहा था कि साली अभी पकड़ कर चोद दूँ।
लेकिन क्या करूँ वो इतनी शरीफ है कि बस छेड़ने में मजा आता है।
मुझे लगता तो था कि वो भी मेरे संग कुछ-कुछ करना तो चाहती है, लेकिन कहने से डरती थी। मैं भी उसकी पहली प्रतिक्रिया तक छेड़खानी में ही मजा लेना चाहता था।

फिर भाई की शादी हो गई, शादी हो जाने के बाद निशा को घर से बुलावा आ गया लेकिन मम्मी ने रोक लिया और बोल दिया कि 15 दिन बाद भेजूँगी।

अब मेरे पास सिर्फ़ 15 दिन बचे थे। मैं निशा के साथ सेक्स करना चाहता था।
एक दिन रात में निशा ने मुझसे मेरा सेल छीन लिया क्योंकि मैं उसकी पिक ले रहा था।

मैंने बहुत बार निशा को कहा कि यार मेरा सेल दे दो.. लेकिन उसने नहीं दिया।
मैं कुछ देर के लिए रुक गया। फिर वो बेड पर लेटी थी, उसके एक हाथ में मैं उंगली घुमा रहा था उसके नीचा तकिये पर सिर करके और दूसरी तरफ में बोले जा रहा था कि यार मेरा सेल दे दो.. पर वो नहीं दे रही थी।

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मैं उसकी कलाई तक हाथ फिराता रहा उसने कुछ नहीं कहा। मैंने उसकी तरफ देखा तो पाया कि वो मुझे तिरछी नजरों से देख रही थी और मेरी नजरें मिलते ही उसने एकदम से अपनी आँख बंद कर ली ताकि मुझे लगे कि निशा सो रही है।

तभी मम्मी आ गईं और उन्होंने मुझे ऊपर भेज दिया कि जा ऊपर जा के सो जा।

हमारे घर पे ऊपर जेंट्स सोते थे और नीचे सभी लेडीज सोती थीं।

मैं ऊपर जाकर सो गया।

फिर अगले दिन सुबह मम्मी भाभी और भाई को पूजा के लिए मंदिर ले गईं और मुझसे बोलीं- हम लोग शाम को वापस आएँगे, घर का ध्यान रखना।
अब निशा और मैं घर में अकेले रह गए थे।

मैंने निशा से कहा- यार तुम तो चली जाओगी.. मेरा दिल नहीं लगेगा।
यह कहते हुए मैंने उसे अपने गले से लगा लिया।
वो भी मुझसे चिपक गई और हम दोनों काफ़ी देर तक गले लगे रहे।

मैंने उसे किस किया तो वो गरम होने लगी और उसने भी मुझे चूम लिया। हम दोनों में सेक्स जाग गया था और कुछ देर की चूमा-चाटी और मम्मे मसने की हरकतों के बाद उसने मेरे लंड पर हाथ धर दिया तो मैंने झट से अपने और उसके कपड़े निकाल दिए।

वो गनगना गई और लंड से अपने जिस्म को सटा कर हिलाने लगी। मैंने उससे चूत खोलने के लिए कहा, पर उसने मुझे चूत देने से मना कर दिया था, शायद वो डरती थी।
उसने जबाव दिया कि ये सुहागरात को ही खुलेगी।

लेकिन मैं भी ढीठ था, मैं उसको कभी पेट पे कभी हाथों पर चूमता रहा। मैंने उसके गोरे-गोरे चुचे चूस-चूस कर एकदम सख़्त बना दिए। सच में मैं तो जैसे जन्नत में था। वो बहुत गर्म हो चुकी थी लेकिन मैं जितनी बार उसकी चूत पर उंगली रखता, वो हटा देती। मुझे बहुत गुस्सा आया, पता नहीं साली किस मिट्टी की बनी थी। मैं गुस्से में उसे बुरी तरह चूसने लगा। फिर मैंने उसकी चूत पर होंठ रख दिए और कसकर दोनों हाथ पकड़ लिए, उसने छूटने की बहुत कोशिश की लेकिन नाकाम रही।

कुछ ही देर में वो ढीली पड़ चुकी थी उसने जोर से आवाज निकालते हुए अपना पानी छोड़ दिया। उसकी चूत से इतना पानी छूटा, जिसकी कोई हद नहीं थी। उसका पानी धीरे-धीरे निकलता रहा और वो निढाल हो कर चित्त लेट गई।

मैंने बेड की चादर बदली.. तो उसने कहा- वीर यार प्लीज मुझसे आगे से सेक्स मत करो, कहीं बच्चा वच्चा ना हो जाए।
मैंने कहा- अरे पगली कंडोम यूज कर लेते हैं ना।
वो कुछ नहीं बोली तो मैंने पहले से कंडोम कर रखा हुआ था, उसे निकाल लिया। अब उसके साथ फिर वही सीन शुरू हो गया। उसने शरीर से चादर लपेट लिया था। मैंने उससे अपना लंड चूसने के लिए कहा, लेकिन उसने मना कर दिया।

मैंने कहा- चलो यार.. हाथ से ही खड़ा तो कर दो।
फिर उसने हाथों से मेरा लंड पकड़ा और कुछ ही पल में मेरा लंड झट से खड़ा हो गया। पहली बार किसी लड़की ने मेरा लंड पकड़ा था। मेरे शरीर में जैसे हाइवोल्टेज का करेंट दौड़ गया था।
मैंने भी चूस-चूस कर उसके पूरे तन-बदन को गरम करके अपना लंड उसकी चूत पर फिट कर दिया।

उसने भी मुझे मुस्कुरा कर देखा तो मैंने हल्का सा धक्का लगा दिया।
अभी झटका लगा ही था कि निशा की बहुत जोर से चीख निकल गई। वो बुरी तरह से रोने लगी।

मैंने उससे कहा- यार शुरू में थोड़ा सा होता ही है.. फिर सब ठीक हो जाएगा।
निशा ने मुझसे कराहते हुए कहा- ये सब तुम्हें कैसे पता?
तो मैंने कहा- यार दोस्तों के साथ में ब्लूमूवी देख लिया करता था, उसी से सब मालूम हो गया।
निशा फिर से बोली- तो तुम सच में गंदे हो।
मैं हंसने लगा.. अब वो भी हंसने लगी।

मेरे लंड का टोपा अभी उसकी चूत की फांकों में फंसा हुआ ही था कि अचानक से मैंने बहुत जोर से झटका मारा और मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुसता चला गया। उसकी चीख निकलती, उससे पहले मैंने हाथ रख कर उसका मुँह बंद कर दिया।

दो पल रुकने के बाद फिर मैंने अचानक से हाथ हटाकर उसके होंठों से अपने होंठ लगा दिए और चूसने लगा। उसे बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा था.. उस दर्द में उसने अपने दाँत मेरे होंठ में बुरी तरह से गड़ा दिए, जिस से मेरे होंठों में से खून निकलने लगा। मैंने दर्द सहन करते हुए एक और झटका मारा और मेरा पूरा 7 इंच का लंड उसकी चूत में घुस गया। उसकी तो बुरी हालत होने लगी, आँखों से आँसू निकलने लगे और वो हाथ-पैर मारने लगी।

वो कहने लगी- अह.. बहुत दर्द हो हा है.. यार हट जाओ.. मैं कहती हूँ हट जाओ.. जल्लाद कहीं के.. मुझे नहीं करना सेक्स-वेक्स.. बस हट जाओ।
वो बुरी तरह रोने लगी।
मैंने कहा- यार बस दो मिनट की बात है।

वो चुप रही तो मैंने लंड निकाल कर गपाक से खींच कर 3-4 घस्से दे मारे। इससे एकदम से मुझे भी बहुत तेज दर्द हुआ.. इस दर्द का कारण मेरी लंड की सील टूटने से खून निकलने लगा। उधर खून तो निशा की चूत से भी निकल रहा था।

मैं झटके मारता रहा, लेकिन निशा बेहोश सी हो गई। मैं उसे अपने लंड पर बिठाए हुए बाथरूम में ले गया और उस पर पानी की छींटे मारे, जिससे वो जाग सी गई। फिर मैंने उसे बेड पर ले जाकर बिना लंड निकाले लिटा दिया और गपागप अपना लंड अन्दर-बाहर करता रहा। उसका दर्द अब मीठा मजा हो चला था। वो फिर भी ‘आह आह..’ की मादक सीत्कार करती रही।

फिर कुछ ही धक्कों के बाद वो मेरे लंड के झटकों के साथ वो अकड़ने लगी और उसने मुझे कस कर पकड़ लिया, वो झड़ रही थी।
मेरा भी वीर्य छूट गया लेकिन मैंने और निशा ने सेक्स पहली बार किया तो हम दोनों के लंड चूत जैसे चुप होने का नाम नहीं ले रहे थे।

मैंने निशा संग लगातार तीन चार-बार सेक्स करके अपना माल उसकी चूत में छोड़ दिया। जितनी भी बार उसके साथ सेक्स किया… मैंने कंडोम पहना हुआ था। अंतिम बार में मैंने बिना कंडोम के भी उसके साथ सेक्स किया और अपना लंड चूत से बाहर निकाल कर बाथरूम में माल छोड़ कर आ गया।

निशा की तो बुरी हालत हो चुकी थी, वो चल भी नई पा रही थी। शाम को सभी लोग वापिस आ गाए।

मैंने बहाना कर दिया कि निशा सीढ़ियों से गिर गई इसलिए चल नहीं पा रही है। मैंने डॉक्टर से भी दवा दिलवा दी है। डॉक्टर ने बेड रेस्ट के लिए बोला है।

सभी मेरी बात मान गए, निशा को चोट के बहाने के कारण दस दिन और रुकना पड़ा, जिसमें मैंने छुपछुप कर उसकी चुदाई की और अब वो बिल्कुल चलने में ठीक भी हो गई थी।

निशा अब अपने घर चली गई है.. वो मुझसे कहती है कि फ़ोन क्यों नहीं करते हो?

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