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भोपाल की प्यासी मैडम की चुदाई

दोस्तो, मेरा नाम टेसर है और मैं भोपाल से हूँ. मैं एक मेल एस्कॉर्ट हूँ और मेरे लंड का साइज़ 6 इंच है. शायद इसी लिए औरतों को खुश रखना मेरा परम कर्तव्य है.

मैं आपको एक हफ्ते पहले की चोदन घटना सुनाना चाहता हूँ, जहाँ मैंने टीटी नगर में रहनी वाली सुष्मिता (नाम बदल दिया है) भाभी का दर्द दूर किया.

जैसा कि आप जानते हैं कि मैं मेल एस्कॉर्ट हूँ, मुझे पिछले शुक्रवार 3-30 बजे करीब एक कॉल आया. मैंने कॉल रिसीव किया तो एक बहुत ही नाजुक पर सेक्सी सी आवाज़ कानों को छू गई. उस आवाज ने मुझसे कहा कि शाम को 4-15 पर शिवाजी नगर में मिलो. मैं तैयार हुआ और ठीक 4-15 पर शिवाजी नगर जा पहुँचा.

कुछ देर वेट करने पर वहाँ एक वाइट कलर की स्विफ्ट आई. स्विफ्ट के सारे कांच बंद थे, इसलिए ज़्यादा कुछ समझ नहीं आ रहा था, पर उसमें एक औरत जैसी छवि नज़र आ रही थी. मैं स्विफ्ट के पास गया तो अन्दर बैठी महिला ने कार की विंडो को नीचे किया और फिर मुझसे पूछा कि क्या मैं ही टेसर हूँ?

मैंने सिर ऊपर नीचे किया तो उसने मुझे कार के अन्दर आने को कहा, मैं कार में बैठ गया और फिर उसने कार आगे बढ़ा ली.

अन्दर मेम साब थीं तो करीब 32 साल की, पर सच में बहुत ही खूबसूरत थीं. उन्होंने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी और उनका ब्लाउज लगभग आधा खुला था, जिसके कारण उनके उभार साफ साफ दिखाई दे रहे थे. उनका फिगर भी ठीक था; करीब 32-30-36 था और उन्होंने रेड लिपस्टिक लगा रखी थी, जो मुझे पागल कर रही थी.

कुछ देर तो मैं मेम को देखता रहा. फिर एकदम से मेम ने फिर मुझसे मेरे बारे में पूछा कि मैं करता क्या हूँ? रहता कहाँ हूँ? वगैरह वगैरह..
मैंने उन्हें अपने बारे में बताया.

चूंकि मैं थोड़ा शर्मीला किस्म का भी हूँ इसलिए मैं जब भी उनसे बात करता, मेरे चेहरे पर हँसी सी आने लगती. ये देख कर वो भी हँसने लगीं और कहने लगीं कि तुम सच में बहुत शर्मीले हो.

बातें करते करते कब हम उनके घर पहुँच गए, पता ही नहीं चला. उन्होंने गाड़ी अन्दर लगाई और फिर हम दोनों उतर कर घर के अन्दर चले गए. घर काफ़ी शानदार था; और हो भी क्यों ना टीटी नगर पॉश इलाक़ा जो ठहरा. घर में एक तस्वीर लगी थी, जिसमें मेम, एक आदमी और एक 10 साल का लड़का साथ में खड़े थे. मैंने मेम से उस आदमी और बच्चे के बारे में पूछा तो मेम ने जवाब दिया कि वो आदमी उनका पति है और वो बच्चा उनका बेटा है.

मेम से आगे बातचीत में जानकारी हुई कि उनका और उनके पति का तलाक 2 महीने पहले ही हुआ था; उनके पति का क़िसी दूसरी औरत के साथ अफेयर था, ये बात मेम को बहुत बाद में पता चली.
ये बात कहते कहते उनकी आंखों से आंसू झलक पड़े.

मैंने उनसे पूछा- क्या हुआ आपको?
उन्होंने सर हिलाकर कहा- कुछ नहीं.
मैंने उनसे कहा कि आप अगर अपने दिल की बात शेयर करेंगी, तो आपको हल्का महसूस होगा.
तो उन्होंने मुझसे कहा कि मैंने सिद्धार्थ (उनके पति का बदला हुआ नाम) से बहुत प्यार किया था; खुद से भी ज़्यादा, पर उसने जिस तरह मुझे धोखा दिया है, मैं आज तक उससे उबर नहीं पाई हूँ.

मेम सच में बहुत ज़्यादा दुखी थीं. ये देख कर मुझसे रहा नहीं गया; मैंने धीरे से अपने हाथों से उनके चेहरे से आंसू पोंछने लगा. ये देख कर उन्होंने मुझे गले से लगा लिया और फिर और ज़्यादा रोने लगीं. मैं कहना तो नहीं चाहता पर सच में पहली बार क़िसी का दर्द अपना दर्द जैसा लग रहा था.

जैसे ही वो थोड़ा शांत हुईं, मैंने उन्हें धीरे से किस करना शुरू किया. शुरुआत में उनके होंठ घबराहट के थरथरा रहे थे; शायद वो थोड़ा नर्वस थीं. लेकिन धीरे धीरे वो भी साथ देने लगीं. उन्हें भी मज़ा आने लगा था क्योंकि वो जिस तरह मुझे किस किए जा रही थीं, उससे ऐसा लग रहा था मानो मेरे होंठों को पूरी तरह चूस लेना चाहती हों.
मैं धीरे धीरे उनके आँसुओं को भी अपने होंठों से पी गया. उनकी मौन स्वीकारोक्ति से मैं आगे बढ़ता गया और कभी मैं उनकी आँखों को चूमने लगा और फिर उनके चेहरे को.

मेम ने धीरे से मुझे बेडरूम की तरफ इशारा किया. मैंने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम ले गया. वहाँ उन्हें बेड पर लिटा कर मैं उनके ऊपर आ गया. मैं उनकी भारी होती हुई साँसों को साफ साफ महसूस कर सकता था. मैं तो उन्हें किस करने के लिए पागल हुआ जा रहा था. मैंने धीरे से अपने होंठों को उनके होंठों पर रख दिए और उनके हाथों को अपने हाथों से दबा लिया.

फिर क्या था, हम दोनों मदमस्त हो गए. पागलपन सवार हो गया था; एक दूसरे को जम कर किस करने लगे.

मैं धीरे धीरे किस करते हुए नीचे की ओर बढ़ने लगा और उनकी गर्दन को किस करने लगा. वो कामुक सिसकारियाँ लिए जा रहीं थीं. मैंने धीरे से उनके ब्लाउज को खोला तो देखा कि उन्होंने ब्रा नहीं पहनी हुई थी.
मैंने उनसे मज़ाक करते हुए कहा- आप तो काफ़ी शरारती किस्म की औरत हैं.
वो मदहोशी में हँसने लगीं.

यार सच में उनके चूचे बहुत ही सुडौल थे; इतने ज़्यादा खूबसूरत थे कि लग रहा था कि उन्हें खा जाऊं.
मैंने धीरे से उनके एक चूचे पर प्यार से हाथ फेरते हुए मसक दिया, इससे उनकी आह निकल गई. ये देख कर मुझसे और ना रहा गया और मैंने अपनी जीभ उनके मम्मों पर रख दी. अब तो उनकी सिसकारियाँ बंद ही नहीं हो रहीं थी. मैं मेम के मम्मों को बहुत ही प्यार से चूसे जा रहा था और सुष्मिता मेम मज़े लिए जा रही थीं.

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दस मिनट बाद तभी मैं धीरे से सुष्मिता मेम की नाभि पर पहुँचा और नाभि को चूमने लगा. मैंने उनकी नाभि और कमर को खूब चूमा. वो तो जैसे पागल हुई जा रही थीं; इतनी सिसकारियाँ ले रही थीं मानो न जाने कितनी दिनों की प्यासी हों.

फिर मैंने धीरे से उनकी साड़ी निकाली और उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. सुष्मिता मेम ने भी साथ देते हुए साड़ी और पेटीकोट को उतार दिया उन्होंने पेंटी नहीं पहनी थी. मैंने साड़ी और पेटीकोट को बाजू में रख दिया. मैंने देखा कि सुष्मिता मेम ने क्लीन शेव किया हुआ था; मैंने जैसे ही उनकी चूत पर हाथ फिराया तो वो एकदम से चिहुंकते हुए सिसक गईं और मेरे हाथों को अपनी चूत पर दबाने लगीं. मैंने अपने हाथों से महसूस किया कि सुष्मिता की चूत तड़प के मारे गीली हुई जा रही थी. इसलिए मैं धीरे से उनकी रसीली चूत में उंगली करने लगा.

वो कामुकता से सिसकारियाँ लिए जा रही थीं और मैं भी धीरे धीरे उनकी चूत को रगड़ने लगा. मैंने पहले एक उंगली उनकी चूत में डाली, फिर दो उंगलियाँ डाल दीं, इतने में तो सुष्मिता मेम ने अकड़ते हुए बिस्तर के तकिये को पकड़ लिया था.

कुछ देर बाद मैंने देखा कि सुष्मिता मेम की चूत पानी छोड़ रही थी, तो मैंने धीरे से अपनी उंगलियाँ बाहर निकाल लीं और अपनी जीभ को उनकी चूत पर रख दिया. मेरी जीभ का अहसास अपनी चूत पर पाते सुष्मिता मेम पर पागलपन सवार हो गया, उन्होंने मेरे बालों को अपने हाथों से दबाते हुए मेरे मुँह को ज़ोर से अपनी चूत पर दबा लिया, कहने लगीं- आह मेरे राजा.. खा जाओ मेरी इस मुनिया को.. आह बहुत ज़्यादा तड़पाती है.. साली ईस्स्स..
मैंने चूत को चाटने की रफ़्तार भी तेज कर दी, देखते ही देखते वो अपनी गांड उठाते हुए झड़ गईं.

फिर उन्होंने डिमांड की कि वो मेरा लंड चूसना चाहती हैं. मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए. मेरा लंड तो जैसे खजूर के पेड़ की तरह तना हुआ था. सुष्मिता ने मेरे लंड को देख कर कहा कि तुम्हारा तो बहुत ही बड़ा लंड है.
उन्होंने अपने प्यारे हाथों से मेरे लंड को पकड़ा और हिलाने लगीं. वो बहुत प्यार से लंड हिला रही थीं. फिर धीरे से उन्होंने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया. उनके मुँह में मेरा लंड जैसे ही गया, ऐसा लगा जैसे जन्नत ही मिल गई हो.

मेम ने धीरे धीरे मेरे लंड के सुपारे को चूसना शुरू किया. हाय.. जब जब उनकी जीभ मेरे लंड के सुपारे पर घूमती थी, मैं तो पागल हो जाता था. वो इतने प्यार से मेरा लंड चूस रही थीं मानो मुझसे ज़्यादा उन्हें मुझसे प्यार हो गया है.

फिर उन्होंने धीरे से मुझे इशारा किया कि उन्हें अब चुदाई करनी है. बस फिर क्या था मैंने अपने लंड पर कंडोम चढ़ाया और उन्हें बिस्तर पर सीधा लिटाया और मेम की टांगें खोल कर धीरे से अपना लंड उनकी चूत की दरार में रख दिया, फिर मेम से आँखें मिला कर मैंने धीरे से एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… वो कराह उठीं. पर मैं रुका नहीं; मैं धीरे धीरे आगे पीछे होने लगा और और वो भी उस दर्द के मज़े ले रही थीं.

मैंने धीरे से उनके मम्मों को अपने होंठों में भर लिया और उन्हें चूसने लगा. मेम को इससे खूब मज़े आने लगे. मैं उन्हें चोदने के साथ उनके मम्मों को चूस रहा था, कभी उनके होंठों को चूस लेता और कभी उनकी आँखों को चूम लेता.

दस मिनट तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद हम दोनों ने पोज़िशन बदल ली. अब हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गए थे. हम दोनों खूब जम कर एक दूसरे को मज़े दे रहे थे. वो मेरा लंड चूस रही थीं तो मैं उसकी चूत को पागलों की चाट रहा था.

कुछ मिनट बाद हम दोनों ने फिर पोज़िशन बदली और इस बार हम डॉगी स्टाइल में थे. मैंने मैडम से पूछा- मैडम, पीछे डलवाना पसंद करोगी?
मैडम बोली- मैंने गांड कभी कभी ही मरवाई है… दर्द होता है. चलो तुम एक बार डाल के देखो!

जैसे ही अपना लंड मैंने उनकी गांड में घुसाया तो पहले तो गया ही नहीं; फिर मैंने मेम की गांड को चाटना शुरू किया; उनकी गांड को अपने थूक से भर दिया. उतने में मेम ने अपनी गांड खोली और फिर क्या था मैंने एक ही झटके में अपने पूरा लंड मेम की गांड में पेल दिया.
वो चिल्ला उठीं- प्लीज़ निकालो..
मैं थोड़ी देर रुका रहा और उनकी पीठ को चूमने लगा, कुछ देर बाद वो थोड़ा शांत हुईं तो मैंने उनकी गांड मारना शुरू की.

अब उन्हें भी मज़ा आने लगा. कुछ देर बाद मैं भी झड़ने लगा तो मैंने अपना लंड उनकी गांड से बाहर निकाला, उन्होंने तुरंत कंडोम उतार कर मेरे लंड को मुँह लगा कर मेरा सारा वीर्य अपने मुँह में ले लिया.

मैं सच कहूँ तो वो मुझे उस वक़्त बहुत खूबसूरत लग रही थीं. मैंने फिर से उन्हें किस किया. फिर हम दोनों बाथरूम चले गए और खुद को साफ करने के बाद बिस्तर पर आकर लेट गए.
मैंने उस दिन सुष्मिता मेम को तीन बार चोदा. वो बहुत खुश थीं; उन्होंने मुझे मेरी फीस दी और फिर मैं अपने घर आ गया.

दोस्तो, आशा करता हूँ कि आपको मेरी ये चोदन कहानी पसंद आई होगी. मुझे रिप्लाइ ज़रूर भेजिएगा पर, जिससे मैं आगे आपको मेरी दूसरी कहानियाँ भी सुना सकूँ.

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