loading...

नौकरानी का बूब्स-6

Chudai ki kahani, sex kahani, hindi sex kahani, लेकिन दोपहर में उसकी माँ मार्केट चली गयी. माँ के जाते ही आँचल रामू को ढूंढने लगी. लेकिन उसको घर में रामू नही दिखा. फिर वो घर के पिछवाड़े में बने सर्वेंट क्वॉर्टर्स की तरफ गयी. वहाँ रामू के कमरे के दरवाज़े को उसने हल्का सा धक्का दिया तो वो खुल गया पर अंदर कोई नही था. कमरे को खाली देखकर वो निराश हुई. लेकिन उसने देखा कमरे की दीवारों में फिल्म स्टार्स , मॉडल्स के कुछ अधनंगे और कुछ पूरी नंगी मॉडल्स के पोस्टर चिपके हुए हैं. रामू की चारपाई में तकिये के नीचे उसे मस्तराम की सेक्स कहानियों की हिन्दी किताब मिली. आँचल वहीं बेड में बैठकर वो गंदी किताब पढ़ने लगी. कमरे में नंगे पोस्टर्स के बीच वो गंदी कहानियों की किताब पढ़ने से आँचल बहुत उत्तेजित हो गयी और उसकी चूत से रस बहने लगा. उसने अपने जीन्स का बटन खोला और रामू के बेड में लेटकर अपनी गीली चूत में उंगली करने लगी.

रामू के बिस्तर में लेटकर मूठ मारने से उसे एक अलग सा रोमांच हुआ , ऐसा रिस्क लेने से उसकी उत्तेजना बहुत ही बढ़ गयी और उसको ओर्गास्म आने ही वाला था की तभी कमरे में रामू आ गया. रामू ने देखा की आँचल मेरे बेड पर लेटी हुई है और जीन्स नीचे को खिसका के चूत में उंगली कर रही है. वो हैरान रह गया. आँचल ने भी रामू को देख लिया लेकिन तभी उसको जबरदस्त ओर्गास्म आ गया , वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी.

रामू से अब रहा नही गया , उसने फटाफट अपने कपड़े उतार फेंके और सिसकारियाँ लेती आँचल के चेहरे के पास अपना लंड हिलाने लगा. फिर लंड पूरा खड़ा होते ही उसने आँचल की जीन्स और पैंटी एक झटके में उतार फेंकी. फिर आँचल की गांड को एक हाथ से पकड़कर दूसरे हाथ से उसकी चूत में उंगली करने लगा. वो अपने अंगूठे से उसकी क्लिट को मसल रहा था और गीली , रस से भरी चूत में फचाफच उंगलियाँ तेज़ी से अंदर बाहर कर रहा था. आँचल अपनी गांड ऊपर को उछालने लगी. जल्दी ही उसको एक और ओर्गास्म आ गया और वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेती हुई दूसरी बार झड़ गयी.

फिर रामू ने आँचल के बाकी कपड़े भी उतार दिए और उसको पूरी नंगी कर दिया. आँचल की बड़ी बड़ी चूचियों को खुली हवा में हिलते देखकर रामू उत्तेजना से भर उठा और उसने चूचियों के बीच निप्पलों को अपने मुँह में भर लिया और उन्हे चूसने और काटने लगा. साथ ही साथ चूचियों को ज़ोर ज़ोर से हाथों में पकड़कर मसलने लगा.

आँचल को रामू का लंड चूसने की तड़प हुई . वो अपने हाथ में रामू का लंड पकड़कर उसे ऊपर नीचे हिलाने लगी. फिर रामू ने आँचल को उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया और उसकी चूत की छेद में अपने लंड का सुपाड़ा घुसा दिया. फिर धीरे धीरे उसने आँचल को अपने लंड पर बिठा दिया.

जैसे ही सुपाड़ा चूत के अंदर घुसा , आँचल चिल्लाई, “ आररर्ग्घह…… उंगग्गग….. अहह…. ओइईईईईईई….”

अपनी गोद में बैठी आँचल को सिसकारियाँ लेते देखकर रामू उत्तेजना में भर गया और उसने आँचल की चूत में अंदर तक पूरा लंड घुसा दिया. आँचल को ऐसा लगा जैसे रामू के बड़े लंड से उसकी चूत पूरी भर गयी है और चूत की दीवारें पूरी तरह से स्ट्रेच हो गयी हैं. रामू ने आँचल की चूत की टाइटनेस को महसूस किया , उसे लगा आँचल की टाइट चूत ने उसके लंड को बिल्कुल जकड़ लिया है , आनंद से वो पागल सा हो गया. उसने पहले रंडियां चोदी थी पर रंडी चोदते समय उसे लगता था जैसे किसी थैली में टूथब्रश डाल रहा हो.

इतनी खूबसूरत और एकदम टाइट चूत वाली लड़की को चोदने में ऐसा आनंद उसे आ रहा था जो उसके पूरे खानदान में शायद किसी को भी नही आया होगा.
फिर रामू ने लंड को अपनी जगह पर बिना हिलाए रखकर आँचल को कसकर आलिंगन में भर लिया और उसके गोरे खूबसूरत बदन को चूमने , चाटने और काटने लगा. आँचल दर्द और उत्तेजना से ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी.

फिर रामू आँचल की गांड को हाथों से पकड़कर उसको अपने लंड पर ऊपर नीचे उछालने लगा , रामू का लंड अब चूत में तेज़ी से अंदर बाहर होने लगा . उछलने से आँचल की बड़ी चूचियाँ भी ऊपर नीचे उछलने लगी . इससे उत्तेजित होकर रामू ज़्यादा देर रोक नही पाया और उसने आँचल की चूत को अपने गरम वीर्य से पूरा भर दिया. वीर्य गिरते गिरते वो आँचल की चूचियों को चूसने काटने लगा. फिर उसने अपना लंड आँचल की चूतरस से भीगी हुई चूत से बाहर निकाला. इतने बड़े लंड के बाहर निकलने से प्वाक की आवाज़ हुई और आँचल की चूत का मुँह खुला रह गया.

फिर उसने अपने मुरझा चुके लंड को आँचल के मुँह में डाल दिया. आँचल सटासट उसका लंड चूसने लगी. आँचल के लंड चूसने से थोड़ी ही देर में छोकरे रामू का लंड फिर खड़ा हो गया. अब उसने आँचल को लिटाकर उसकी टाँगे पकड़ के ऊपर को घुटने से मोड़ दी और फिर चूत में लंड घुसेड दिया.
अब रामू , आँचल की चूत में हल्के हल्के धक्के लगाने लगा. आँचल भी उत्तेजित होकर उसका पूरा साथ देने लगी और अपनी गांड ऊपर को उछालने लगी जैसे वो नीचे से रामू को चोद रही हो. ये देखकर रामू खुश हो गया. आँचल के ऐसे गांड ऊपर को उछालने से उसकी गोरी गोरी मक्खन जैसी जांघें भी उछल रही थी और उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ भी ऊपर नीचे हिल रही थी. 

आँचल तो अपने पहले लंड , रामू के साथ चुदाई से इतने आनंद में थी की उसको दीन दुनिया की कुछ ना होश ना डर ना शरम , सब कुछ वो भूल गयी थी. वो इतनी ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ ले रही थी की रामू को उसके मुँह में हाथ रखना पड़ रहा था की कहीं कोई सुन ना ले. उसके तेज तेज आवाज़ निकालने से रामू का हाल ऐसा था की ये खुद तो मरेगी साथ में मुझे भी मरवाएगी.

आँचल उत्तेजना से चिल्लाई, “ आहह……श….माआ….. , बहुत मज़ा आ रहा है रामू , ओह्ह……ओह्ह……… आहह…..ओइईईईईईईईई “.

उसको ओर्गास्म पर ओर्गास्म आते रहे और वो झड़ती रही , झड़ती रही और झड़ती रही ना जाने कितनी बार………

रामू उसकी चूत को धमाधम चोदे जा रहा था और उसकी ना जाने कब की प्यास बुझाए जा रहा था . आँचल बहुत खुश थी उसकी प्यास आज कोई जी भरकर बुझा रहा था. रामू की रस्सी वाली चारपाई में लेटे लेटे धक्के खाते खाते उसके नितंब दुखने लगे थे , पर उसे इसकी कोई परवाह नही थी , जो मज़ा उसे मिल रहा था उसके आगे बाकी परेशानियों का कोई महत्व नही था.

रामू के तेज तेज धक्कों से वो पुरानी चारपाई ऐसे आवाज़ कर रही थी की डर था कहीं टूट ना जाए. तभी आँचल ने दूर कहीं किसी के डोरबेल बजाने की आवाज़ सुनी , लेकिन वो रामू से , “और तेज ! और तेज !” ही कहती रही.
रामू ने भी डोरबेल की आवाज़ सुन ली थी , पर उत्तेजना में उसने भी उनसुना कर दिया.

“चोदो ……..मुझे चोदो रामू ……और चोदो …ज़ोर से ….और ज़ोर से….आ आहह…… ओइईईईई माआ…….” आँचल को ओर्गास्म पर ओर्गास्म आते गये.

इतनी खूबसूरत लड़की को चुदासी औरत के जैसे चिल्लाते देखकर रामू भी रुक नही पाया और जोरदार स्ट्रोक लगाते हुए उसने आँचल की चूत एक बार फिर अपने वीर्य से भर दी . फिर झड़ते झड़ते , अपना पूरा वज़न आँचल के बदन में डालकर वो उत्तेजना में उसकी चूचियों को चाटने और काटने लगा. 

जब चुदाई खत्म हुई तो रामू को होश आया , कोई बहुत देर से डोरबेल बजाए जा रहा था. वो झट से उठा और आँचल को खींचकर उठाने लगा.

लेकिन आँचल मदहोश थी वो उठी ही नही. रामू घबराहट में उसको नंगी ही छोड़कर फटाफट अपने कपड़े पहनकर उनके घर की तरफ में दरवाज़ा खोलने को भागा .

रामू के कमरे के दूसरी तरफ पड़ोसी के नौकर का कमरा था. दोनो घर के बीच में दीवार थी. अपने कमरे में वो नौकर दोपहर की नींद ले रहा था. लेकिन आँचल की ज़ोर ज़ोर से कामोत्तेजक सिसकारियों से उसकी नींद खुल गयी . वो दीवार के उस पार से तांका झांकी करने लगा. वो दीवार फांदकर रामू के कमरे की खिड़की से चुपचाप चुदाई देखने लगा और बहुत उत्तेजित हो गया. वो रामू का दोस्त था और कई बार साथ साथ उन दोनो ने रंडियां चोदीं थी. रामू ने उसको शादी से पहले आँचल को लंड चुसाने वाला किस्सा भी बताया था. 55 साल की उमर का होने के बावजूद चिकनी आँचल को चुदते देखकर उसका लंड पाजामा फड़कर बाहर आने को हो गया.

जब उसने रामू को घर के अंदर जाते हुए देखा तो मौका ताड़कर वो रामू के कमरे में घुस गया. कमरे में आँचल टाँगे फैलाए नंगी पड़ी हुई थी , उसकी चूत का छेद जोरदार चुदाई से अभी खुला हुआ ही था. आँचल ने उसको देख लिया पर तब तक वो नौकर आँचल के ऊपर चढ़ गया. अपना लंड आँचल की चूत में घुसाकर उसने धक्के लगाने शुरू कर दिए. धक्कों से वो पुरानी चारपाई , चूं ! चूं ! की आवाज़ करने लगी. 

loading...

चूत में लंड अंदर बाहर होने से आँचल की सिसकारियाँ निकलने लगी. उसका जिस्म बुड्ढे के धक्कों का जवाब देते हुए गांड ऊपर को उछालने लगा.
लेकिन उसका दिमाग़ कह रहा था की ये ग़लत है , वो बोली, “ मत करो….उहह …..अहह…..मुझे छोड़ो………..ओइईईईई माआअ…”

नौकर चोदते रहा और आँचल को ओर्गास्म आ गया , उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया. लेकिन वो “मुझे छोड़ दो, मत करो “ कहती रही. ये सुनकर नौकर ने आँचल के मुँह पर अपना हाथ रख कर मुँह बंद कर दिया. और फिर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. जब आँचल को ओर्गास्म आया तो उसने उत्तेजना में अपने मुँह पर रखे हुए नौकर के हाथ में ज़ोर से दाँत काट दिया.
अब बुड्ढा नौकर भी झड़ने लगा . झड़ते समय वो चिल्लाया, “ आह….साली चूत…….”
और फिर आँचल की चूत में अपना वीर्य गिरा दिया.

उनकी खुश-किस्मती से सर्वेंट क्वॉर्टर घर के पिछवाड़े में होने से उनकी ये आवाज़ें घर के अंदर नही गयीं . झड़ने के बाद नौकर अपना मुरझाया हुआ झाँटु लंड फटाफट अपने पाजामा में घुसाकर , अपने ज़ख्मी हाथ (आँचल के दाँत काटने से) को सहलाता हुआ दीवार फांदकर अपने कमरे में भाग लिया.

आँचल गहरी गहरी साँसे लेती हुई नंगी चारपाई में पड़ी रही. उसने बुड्ढे नौकर को अपने बदन का मज़ा लेने से रोकने की कोई कोशिश नही की थी , सिर्फ़ मुँह से ” मत करो मत करो” कह दिया बस. उसका बदन चुदाई के मज़े चाहता था , पर दिमाग़ इन सब के लिए मना करता था. पर हर बार की तरह जिस्म और दिमाग़ की लड़ाई में जीत जिस्म की ही होती थी.

उधर रामू ने मेन दरवाज़ा खोला तो बाहर आँचल की माँ और सुनील खड़े थे. पिछले 10 मिनिट्स से सुनील डोरबेल बजाए जा रहा था लेकिन आँचल की माँ मार्केट से अभी पहुँची थी.
जब सुनील ने उसको बताया की वो काफ़ी देर से बाहर खड़ा है तो आँचल की माँ ने रामू को खूब हड़काया , ” कहाँ मरा था इतनी देर तक , जमाई के लिए दरवाज़ा क्यूँ नही खोला.”

रामू ने बहाना बनाया की वो अपने कमरे में सो रहा था इसलिए डोरबेल नही सुनी. उसका थका हुआ चेहरा और उलझे बाल देखकर उन्होने उसकी बात पर विश्वास कर लिया. सुनील ने बताया वो आँचल को घर ले जाने के लिए आया है. अब रामू की गांड फट गयी. 

आँचल की माँ , आँचल को आवाज़ देते हुए उसके रूम में गयी, पर आँचल अपने बेडरूम में नही थी. 

फिर उसने रामू से पूछा, “ आँचल कहाँ है ?”

रामू को कुछ समझ नही आया , वो बोला, “ मेमसाब तो अपने घर चली गयी है.”

आँचल की माँ बोली,” घर चली गयी ? बिना बताए ? लेकिन उसका सूटकेस तो यहीं है.”

रामू बोला, “ वो ऑटो से चली गयी है और सूटकेस जब सुनील आएगा उसको दे देना, बोल के गयी है.”

सुनील की भी कुछ समझ नही आया की आँचल ने ऐसा क्यूँ किया , पर उसे कोई शक़ नही हुआ.

आँचल की माँ ने सुनील से कहा , “ बेटा सुनील , तुम चाय पानी पी के ही जाओगे. रामू जल्दी से चाय बना के ला.”

रामू किचन में जाने की बजाए जल्दी से अपने कमरे की ओर भागा , वहाँ आँचल अभी भी आँखें बंद करके चारपाई में नंगी लेटी हुई थी. उसने फटाफट आँचल को सब बातें बताई और जल्दी जल्दी उसका जीन्स और टॉप पहना के उसको सर्वेंट क्वॉर्टर के पीछे के रास्ते से रोड पर जाकर ऑटो पकड़ के सीधे अपने ससुराल जाने को कहा.
उधर आँचल की माँ, ” रामू ! रामू ! ” चिल्ला रही थी. रामू आँचल को वहीं छोड़ के फिर फटाफट अंदर चाय बनाने किचन में भागा.

आँचल अभी भी मदहोशी में थी , उसका दिमाग़ सही से काम नही कर रहा था. वो जैसे तैसे उठी और पीछे के रास्ते रोड पर आ गयी, वहाँ उसको वही बुड्ढा नौकर मिला . नौकर को अपनी तरफ गंदी वासना भरी नज़रों से घूरते देखकर आँचल का सर शरम से झुक गया. खुश-किस्मती से किसी ने भी उसे बुड्ढे नौकर से चुदते हुए नही देखा था. बुड्ढा जल्दी जल्दी चोदकर झड़ गया था और फिर वापस चला गया था. 

आँचल लड़खड़ाते कदमों से ऑटो ढूंढने लगी. उसने देखा सब लोग उसी को घूर रहे हैं और गंदी तरह से हंस रहे हैं. वो शक्ल से ही बहुत चुदी हुई लग रही थी. ऊपर से हुआ ये की जल्दबाज़ी में रामू ने उसे सिर्फ़ टॉप और जीन्स पहना दिया. ब्रा और पैंटी रामू के ही कमरे में रह गयी. उसके बाल बिखरे हुए थे और होंठ सूज़े हुए थे. पसीने से उसका टॉप उसके बदन से चिपक गया था. 

ब्रा ना होने से बड़ी बड़ी चूचियाँ और सूज़े हुए निप्पल टॉप से बाहर को निकल रहे थे. जीन्स भी जल्दबाज़ी में ढंग से नही पहनी थी और पीछे गांड की दरार दिखाई दे रही थी , अंदर से पैंटी थी नही. ऐसी हालत में सब के घूरने से वो शरम से ज़मीन में गड़ गयी लेकिन तभी एक ऑटो वाला मिल गया और वो झट से उसमे बैठ गयी. अब घूरने की बारी ऑटोवाले की थी. उसने पहले तो अच्छी तरह से ऊपर से नीचे तक आँचल को घूरा फिर साइडमिरर में उसकी हिलती हुई चूचियों को देखते हुए ऑटो चलाने लगा. रास्ते भर उसने ऑटो को जानबूझकर झटके देते हुए चलाया ताकि झटकों से आँचल की बड़ी हिलती हुई चूचियों का मज़ा ले. आँचल सब समझ रही थी लेकिन अपने होंठ दाँतों में दबाकर सर नीचे झुकाए बैठी रही.

ससुराल पहुँचते ही सबसे पहले सामना हुआ संस्कारी ससुर से. ससुर ने ऐसी हालत में आँचल को देखा तो माथा पीट लिया , ” हे भगवान फिर चुद गयी बहू . साला सबका नंबर लग गया. मेरी किस्मत ही फूटी है जो घर में होकर भी मेरा इसको चोदने का नंबर नही लग पा रहा.”

आँचल ने ससुर को देखा तो एक नर्वस सी स्माइल दी और फटाफट अपने बेडरूम में भाग गयी. उसने सोचा ये बुड्ढा बार बार मुझे चुदा हुआ देख लेता है , अब मैं ज़्यादा दिन तक इसके हाथ से बच नही पाऊँगी.

लेकिन उसकी खुश-किस्मती थी की उसकी सास अपनी भतीजी की शादी से वापस आ गयी थी और घर पर सास के होने से ससुर को ज़्यादा ताक झाँक का मौका नही मिलने वाला था.

loading...

Leave a Comment