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नौकरानी का बूब्स-5

 chudai ki kahani, sex kahani, hindi sex kahani,सलीम समझ गया , मुँह से जाओ कह रही है और अंदर से उत्तेजित हो रही है, उसकी हिम्मत और बढ़ गयी और वो आँचल की बेड के पास आ खड़ा हुआ. फिर आँचल के माथे पर हाथ रखता हुआ बोला, “ मेमसाब अब तो आपका बुखार बिल्कुल उतर गया है.”

आँचल ने मन ही मन कहा इस छोकरे की हिम्मत तो देखो मेरे बेडरूम में घुसकर मुझे छू रहा है. उसने थोड़ा कठोर आवाज़ में कहा, “ मेरे लिए नाश्ता लेकर आओ, जल्दी…”

सलीम मुस्कुराया और बोला, “ पर आपको तो मेरी बनाई हुई चीजें अच्छी नही लगती हैं “.

फिर उसने अपने निक्कर में से पूरा तना हुआ लंड बाहर निकाला और उसको आगे पीछे अपने हाथ में हिलाता हुआ बोला, “ ये तो ज़रूर अच्छा लगेगा आपको”.

सलीम का खंभे जैसा लंड देखकर आँचल धक से रह गयी. वो पहली बार ख़तने वाला लंड देख रही थी. सलीम के लंड के सुपाड़े के ऊपर कोई चमड़ी नही थी. आँचल के मुँह से कोई बोल नही फूटे.

सलीम को मालूम था की उसके लंड को देखकर औरतें हक्की बक्की रह जाती हैं. अब उसने अपने हाथ आँचल के माथे से हटाकर उसके चेहरे को अपने हाथों में पकड़ लिया और आँचल की आँखों के सामने उसका लंड फनफना रहा था.

आँचल को बहुत डर लग रहा था लेकिन उसकी चूत से पानी भी निकलता जा रहा था. उसने धीमी आवाज़ में अटकती सांसो के बीच कहा, “ उहह…. मुझे माफ़ करो सलीम, तुम यहाँ से चले जाओ , प्लीज़!”

आँचल की उलझन देखकर सलीम मुस्कुराया और उसके गालों को मलते हुए बोला , “ मैं चला जाऊँगा बस तुम एक बार इसे अपने हाथ में ले लो .”

सलीम जानता था की उसके लंड को देखकर औरतें घबरा जाती हैं. उनको कैसे धीरे धीरे पटाके काबू में करना है ये उसने सीख लिया था. उसने फिर आँचल से बोला , मैं चला जाऊँगा तुम बस एक बार अपने हाथ मे ले लो.

आँचल काँपती हुई आवाज़ में बोली, “ पक्का ? तुम चले जाओगे ? अगर मैं हाथ में ले लूँगी तो ?”

सलीम फिर मुस्कुराया और बोला, “ पक्का मेमसाब.”

फिर आँचल ने उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया. उसके हाथ में सलीम का खंबे जैसा लंड अच्छी तरह से पकड़ा ही नही जा रहा था. सलीम ने उससे अपना मुँह खोलने को कहा. आँचल ने जैसे सुना ही नही वो उसके लंड को अपने हाथों में देखकर उसी में हैरानी से खो सी गयी थी.

सलीम ने कहा, “ कैसा लगा पकड़ने में मेमसाब ?”.
फिर बोला , “अब अपने मुँह में लेकर चूसो इसे .”

जब सलीम ने देखा की आँचल तो जैसे जड़वत हो गयी है तो उसने उसके हाथ से लंड हटाकर आँचल के गालों पर रगड़ना शुरू किया.

आँचल ने तुरंत कहा, “ नही ! तुमने कहा था की तुम चले जाओगे .”

“थोड़ा सा चूसो फिर मैं पक्का चला जाऊँगा”, सलीम ने जवाब दिया.

आँचल ने अपने होंठ थोड़ा खोले और सलीम ने उन होठों के बीच अपना लंड घुसा दिया. जब उसने देखा की ये तो आराम से लंड चूस रही है तो वो समझ गया की ये मुझसे चुदवाना चाहती है.

उसने आँचल की गर्दन पकड़ ली और लंड थोड़ा और अंदर घुसा दिया फिर पूछा, “ मेमसाब, कैसा लग रहा है मेरा लंड ?”

आँचल लंड चूसने में मगन थी इसलिए उसने जवाब में सिर्फ़ …. ग..गु गो गु … की आवाज़ निकली.

फिर वो सलीम की गोलियों को सहलाने लगी. सलीम समझ गया इसको मज़ा आ रहा है. उसने अपना लंड उसके मुँह से निकाल लिया और अपनी गोलियाँ चाटने को कहा. आँचल ने तुरंत गोलियों को चाटना शुरू कर दिया.

सलीम अब उसको पूरी नंगी देखना चाहता था इसलिए बोला, “ अपने कपड़े निकाल , मुझे तेरी चूचियाँ देखनी हैं.”

आँचल ने अपनी नाइटी उतार दी . अब वो सिर्फ़ लेस वाली पैंटी में थी. उसकी गोरी गोरी चूचियों को खुला देखकर सलीम उनको मुँह में भरकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. फिर चूचियों को रफ तरीके से मसलने और काटने लगा. आँचल दर्द से चिल्लाई.

सलीम उसको एक थप्पड़ मारते हुए बोला, “ साली, रेखा की चूचियाँ और चूत , तू चूसती है और अब रोती है.”

फिर उसने आँचल की गीली हो चुकी पैंटी को फाड़ दिया . आँचल की टाँगों को ज़ोर से अलग करते हुए उसने आँचल की चूत में अपना लंड घुसेड दिया.

आँचल दर्द से चिल्ला पड़ी, “ आ आ आ हह……ऊओ आह माँ…..आह मेरी फट रही है ……..आह माँआअ …”

आँचल की टाइट चूत देखकर सलीम हैरान रह गया. आँचल के रोने धोने से वो और एक्साइट हो गया और उसकी चूत में ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा.
फिर बोला, “ तेरी चूत तो बहुत मस्त है, मज़ा आ गया.”

अब वो पूरा लंड बाहर निकालकर फिर एक झटके में पूरा अंदर धाँसने लगा. अब उसकी स्पीड तेज हो गयी थी.

आँचल को किसी ने इतनी तेज तेज नही चोदा था. अब उसने भी सलीम के धक्कों के साथ ही अपनी गांड ऊपर को उछालनी शुरू कर दी इस तरह वो भी सलीम को चोदने लगी. उसको ओर्गास्म पर ओर्गास्म आने लगे और उसके मुँह से तेज सिसकारियाँ निकल रही थी ….ऊओ अहह ओइईईईईईईईईई……….. उफफफफफफफफफफफफ्फ़ अहह…”

सलीम की गोलियाँ हर झटके के साथ आँचल की गांड से टकरा रही थी ….ठप….. ठप….. ठप ..
इसी तरह वो आँचल को धकाधक चोदता रहा. जब वो झड़ने वाला था तो उसने अपना लंड पूरा चूत के अंदर डाल दिया और आँचल के चूत की गहराइयों में अपना वीर्य छोड़ दिया.

फिर उसने अपना लंड चूत से निकालकर आँचल के मुँह में डाल दिया. आँचल को लंड से वीर्य के साथ अपने चूतरस का स्वाद आया और उसने लंड चूसना शुरू कर दिया. आँचल ने देखा की सलीम का मुरझाया हुआ लंड भी आँचल के पति सुनील के खड़े लंड से बड़ा था.

आँचल के चूसने से सलीम का लंड फिर खड़ा हो गया. उसने आँचल को पलट दिया और घुटनो के बल कुतिया बना दिया.
अब आँचल के पीछे जाकर उसने आँचल की चूत में अपना लंड घुसेड दिया और वो पीछे से धकाधक चोदने लगा साथ ही साथ आँचल की बड़ी गांड में थप्पड़ भी मारते जा रहा था…चटाक़……. चटाक़…… चटाक़.

आँचल कभी भी डॉगी स्टाइल में नही चुदी थी , उसे बहुत मज़ा आ रहा था. चूत में लंड के ताबड़तोड़ धक्कों के साथ अपनी गांड पर पड़ते थप्पड़ से उसको जल्दी ही जबरदस्त ओर्गास्म आ गया …आ आहह ओइईईईईईईईईईईईईई उफफफफफफफफफफफफ्फ़ आअहह……..उसके घुटने कमजोर पड़ गये और वो बेड पर गिर पड़ी. उसकी जांघें और टाँगे ओर्गास्म की उत्तेजना से कांप रही थी. सलीम ने उसको फिर उठाने की कोशिश की पर आँचल बिना उसके सपोर्ट के नही उठ पा रही थी.

इतनी बार झड़ जाने से आँचल अब कमज़ोरी महसूस कर रही थी. उसका पूरा बदन पसीने से भीग चुका था . उसकी आँखों में अजीब से भाव थे जैसे वो शून्य को घूर रही हो. उसके घुटने कमज़ोरी से कांप रहे थे. सलीम के काटने से उसके गालों और चूचियों पर लाल निशान पड़ चुके थे. उसकी गांड थप्पड़ मारे जाने से लाल हो चुकी थी.

लेकिन सलीम तो अभी शुरू ही हुआ था , उसने सुनील की टेबल से सब काग़ज़ फेंक दिए और आँचल को टेबल पर बैठा दिया फिर उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रखकर आँचल की चूत में फिर से अपना लंड घुसेड दिया , एक जोरदार झटके में लंड पूरा चूत में अंदर तक धँस गया. फिर वो तेज़ी से लंड अंदर बाहर पेलने लगा.

आँचल चिल्लाई …अहह् ………..आहह…… ओइईईई… आअरहगगगघहीुई..म्म्म्माआ…
इस पोज़िशन में सलीम का लंड बहुत डीप पेनिट्रेट कर रहा था. आँचल को लगा आज तो उसकी चूत फट के चिथड़ा हो जाएगी. उसकी पहले से ही लाल हो चुकी गांड भी टेबल से रगड़ खाकर और लाल हो गयी.

जैसे ही सलीम झड़ने को हुआ उसने अपना लंड आँचल की चूत से बाहर निकाला और आँचल के बाल पकड़कर उसका चेहरा नीचे झुका दिया और वीर्य की धार को उसके बालों , उसके खूबसूरत चेहरे और उसकी गोरी चूचियों पर छोड़ दिया . आँचल अपना बैलेंस नही बना सकी और टेबल से नीचे गिरने लगी, तभी सलीम ने उसको पकड़कर नीचे फर्श पर बैठा दिया .

तभी आँचल का फोन बजने लगा. सलीम ने फोन उठाया तो देखा सुनील की कॉल थी . लेकिन आँचल उठकर फोन पर बात करने की हालत में नही थी. सलीम ने आँचल को फोन दिया और खुद उसकी चूचियाँ मसलने लगा. सुनील ने फोन पर आँचल से पूछा की वो अब कैसा फील कर रही है और तबीयत कैसी है , आँचल सिर्फ़ हूँ हाँ में ही जवाब दे पाई .

इतनी खूबसूरत औरत को बुरी तरह से चोदकर भी सलीम का मन नही भरा , उसको फोन पर हूँ हाँ करते देखकर उसका लंड फिर तन गया. उसने फर्श पर बैठे बैठे ही आँचल को कमर और गांड से पकड़कर उठाया और अपने लंड पर बैठा दिया . आँचल अभी फोन पकड़े हुए ही थी. लंड के चूत में घुसते ही आँचल के मुँह से आह निकली , दूसरी तरफ सुनील ने समझा की उसकी बीवी की तबीयत खराब है और वो उल्टी कर रही है.

आँचल डर गयी उसने समझा कहीं सुनील कुछ शक़ ना कर बैठे , इसलिए उसने नॉर्मल तरीके से बात करना चाहा , लेकिन सलीम उसकी गांड उठा उठा के धीरे धीरे चूत चोद रहा था इसलिए उसके मुँह से सिसकियाँ निकल जा रही थी. सलीम इस बात से और एक्साइटेड हो गया की मेमसाब अपने हसबैंड से फोन पर बात कर रही है और मैं उसे चोद रहा हूँ. वो समझ गया की मेमसाब डर से , सुनील से नॉर्मल होके बात करने की कोशिश कर रही है , उसने नीचे से तेज तेज धक्के मारने शुरू कर दिए.

अब आँचल सलीम की गोद में तेज धक्कों से चुदते हुए उछलने लगी उसकी तेज सिसकारियाँ निकलने लगी . लेकिन अभी भी वो फोन पकड़े हुए थी . उसको ओर्गास्म आ गया. सुनील को फोन पर सिर्फ़ आहह ….उफ़फ्फ़….अरगगगगगग…अर्र्र्र्र्ररर…..ओइईईईईईईईईई…. सुनाई दे रहा था.

सुनील बोला, “ आँचल , आँचल क्या बात है ? तुम ऐसी अजीब आवाज़ें क्यूँ निकाल रही हो , तबीयत ज़्यादा ही खराब हो रही है क्या ?”

ओर्गास्म खत्म होने के बाद आँचल ने सुनील को बोला की उसको अभी उल्टी आई थी , इसलिए उसके मुँह से अजीब सी आवाज़ें निकल रही थी. फिर उसने कहा मेरी तबीयत ठीक नही है तुम जल्दी घर आ जाओ और फोन रख दिया.

आँचल को अपने पति से झूठ बोलते देखकर सलीम बोला, “ अच्छा नाटक करती है तू साली !”

आँचल बोली, “ आह ,….उफ़फ्फ़ अब मुझे छोड़ दो सलीम , प्लीज़ अब तुम जाओ.”

आँचल को फर्श पर पड़े देखकर और अपने को छोड़ देने की मिन्नतें करते देखकर सलीम ज़ोर से हंसा फिर आँचल की गांड पर थप्पड़ मारते हुए बोला ,” साली अभी तो तेरी गांड चोदूँगा , क्या मस्त बड़ी गांड है तेरी.”

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फिर उसने आँचल को पकड़कर खड़ा कर दिया.

लेकिन आँचल कमज़ोरी महसूस कर रही थी इसलिए खड़ा नही हो पाई और सलीम के हाथों में झूल गयी. सलीम ने उसको पेट के बल बेड पर लिटा दिया और फिर घुटने अंदर को मोड़कर आँचल की गांड हवा में ऊपर को उठा दी. फिर उसके दोनो नितंबों को फैला कर गांड के छेद में लंड घुसाने की कोशिश करने लगा.

जैसे ही सलीम का लंड का सुपाड़ा आँचल की गांड में घुसा आँचल ज़ोर से चिल्लाई, “ अहह ओह फट गयी ……ईईईईईईईईईईईईईईईईईई माआआआआआआ….”

“साली लगता है कभी तेरे पति ने तेरी गांड नही मारी , तभी तो तू इतना फुदकती रहती है” , आँचल की गांड के बहुत टाइट छेद को देखकर सलीम बोला.

फिर उसने अपना लंड छेद से हटा लिया और अपनी उँगलियों पर थूका और उंगली को गांड के छेद में घुमाने लगा.

आँचल फिर चिल्लाई, “आहह….मत करो सलीम…आहह ओइईई…”

लेकिन सलीम भोसड़ी का बहुत गांडू था , अपनी अम्मी की गांड मारते मारते अब उसको गांड मारने की आदत पड़ गयी थी. इसलिए वो नही माना और फिर उसने अपना लंड आँचल की गांड के छेद पर टिका कर धक्का मारा.

“आहह…..मैं मर गयी ……..कमीने कुत्ते हरामजादे ने मेरी गांड फाड़ दी…… उईईईईईईईईईई माआआआआआ…”, आँचल फिर चिल्लाई .

आँचल के रोने चिल्लाने से सलीम और एक्साइटेड हो गया और आँचल की कुँवारी गांड को बुरी तरह से चोदने लगा. दर्द से आँचल की आँखों से टपाटप आँसू बहने लगे. कुछ देर बाद सलीम उसकी गांड में ही झड़ गया. और आँचल को बेड पर रोता छोड़कर बेडरूम से चला गया.

जब सलीम अपने कमरे में पहुँचा तो उसे होश आया की मैंने ये क्या कर दिया . डर के मारे अब खुद उसकी गांड फट के हाथ में आ गयी और उसने फटाफट अपना दो कौड़ी का सामान प्लास्टिक के थैले में डाला और घर छोड़कर भाग गया.

तब तक दोपहर के 2 बज चुके थे और आँचल का ससुर भी क्रियाकर्म से वापस आ पहुँचा. वो दिन भर आँचल को चोदने का ही प्लान बनाने में था . इसलिए जैसे ही घर पहुँचा टाइम वेस्ट ना करते हुए सीधे आँचल के बेडरूम में घुस गया. पर बेडरूम का नज़ारा देखते ही उसकी गांड फट गयी .
ये तीसरी गांड थी जो आज उस घर में फटी थी.

उसने देखा आँचल बेड पर नंगी पड़ी है और सुबक रही है. उसके पूरे बदन में निशान बने हुए हैं और बदन में जहाँ तहाँ वीर्य लगा हुआ है.
उसकी गांड से थोड़ा खून भी निकल रहा था. जैसे ही आँचल ने अपने ससुर को देखा उसने ज़ोर ज़ोर से रोना शुरू कर दिया.

ससुर उसके पास पहुँचा और उसके नंगे बदन को अपने आलिंगन में लेकर उसको दिलासा देते हुए बोला, “ तुम्हारी ऐसी हालत किसने की ?”

आँचल बोली, “ वो हमारा कुक सलीम , उसी कमीने ने मेरा रेप किया है.”

ससुर मन ही मन सोचने लगा , इस लड़की को मैं चोदने को मरा जा रहा हूँ और यहाँ ये दो कौड़ी का नौकर सलीम इसको चोद गया और पहले दिन भी ना जाने बाहर किससे चुदवा के आई थी. पता नही और कौन कौन चोद गया इसे , सिर्फ़ मैं ही नही चोद पा रहा हूँ बस.

ससुर गुस्से में सलीम के कमरे की तरफ दौड़ा तो वहाँ जाकर देखा की वो भोसड़ी का तो भाग लिया. फिर वो वापस आँचल के पास आया .

आँचल उससे हाथ जोड़ते हुए बोली , “ प्लीज़ आप सुनील या किसी और को ये सब मत बताना.”

ससुर बोला, “ ठीक है, मैं किसी को ये बात नही बताऊँगा.”

फिर उसने गरम पानी करके आँचल को नहाने और कपड़े पहनने में मदद की.
उसके बाद उसने आँचल का कमरा धो दिया और फिर साफ करके वीर्य और चूतरस के सभी निशान फर्श से मिटा दिए और बेड की शीट्स वगैरह सब बदल दी. ताकि सुनील के आने तक बेडरूम फिर से पहले जैसा साफ सुथरा हो जाए.

आँचल के ससुर ने जब आँचल को बेडरूम में नंगी चुदी हुई पड़े देखा तो इससे आँचल को बहुत एंबरेसमेंट फील हुआ. वो डर गयी और उसने झट से सलीम पर रेप का इल्ज़ाम लगा दिया. लेकिन असल बात ये थी की जब से नौकरानी रेखा ने उसे बताया था की सलीम का बहुत बड़ा लंड है और रेखा उससे खूब चुदवाती है तो तभी से आँचल के मन में भी उससे चुदवाने की इच्छा पैदा हो गयी थी. वैसे भी उसकी चूत अनचुदी ही रह जाती थी इसलिए सलीम को वो अपने को चोदने से रोक नही पाई.

उसके मन से अपने मायके के नौकर रामू के लंड की यादें अभी मिटी नही थी , बल्कि उन पलों को याद करके उसकी चूत पानी छोड़ देती थी. इसलिए ससुराल के नौकर सलीम से भी उसने मज़ा लेने में देर नही की.

सलीम के लंड के लिए वो प्यासी थी और सलीम के साथ हुई घमासान चुदाई का उसने भरपूर मज़ा भी लिया था , लेकिन तभी तक जब तक की उसने अपना लंड आँचल की गांड में नही घुसाया था. सलीम के लंड से अपनी गांड फड़वाने में आँचल को बिल्कुल भी मज़ा नही आया था , बल्कि असहनीय दर्द से वो रो पड़ी थी और सलीम बड़ी बेदर्दी से उसकी गांड मारते रहा. इसलिए सलीम के घर छोड़कर भाग जाने से उसे बहुत खुशी हुई.

अपने ससुर की मदद से , उसने सुनील के वापस लौटने से पहले ही बेडरूम धो कर साफ लिया था. जब सुनील वापस लौटा तो उसने समझा आँचल की तबीयत वाक़ई खराब है उसे बहुत चिंता हुई. उसने अपने पापा से कहा की जब तक आँचल अच्छा महसूस नही करती वो फैक्ट्री नही जाएगा और उसके बदले कुछ दिन तक पापा फैक्ट्री चले जाएँ.

बुड्ढा ये सुनकर फ्रस्टरेट हो गया पर उसको फैक्ट्री जाना ही पड़ा. वो सोच रहा था अब बहू को नंगी देख लिया है , नहला धुला भी दिया है , अब तो बहू चोदने देगी पर सुनील ने उसको फैक्ट्री भेज दिया. वाह रे फूटी किस्मत!

सुनील को आँचल ने झूठी कहानी सुना दी की सलीम उनके घर से कुछ रुपये चुराकर भाग गया है. ज़्यादा अमाउंट नही था इसलिए सुनील ने पुलिस कंप्लेंट के चक्कर में पड़ना ठीक नही समझा.

आँचल ने देखा की फैक्ट्री जाने के नाम पर उसके ससुर का मुँह कैसे उतर गया है. वो जानती थी की उसके ससुर ने सलीम के जाने के बाद उसकी बहुत मदद की थी और बेडरूम साफ किया था , उसको बाथरूम भी ले गया था , नहाने और कपड़े पहनने में भी मदद की थी , क्यूंकी उस समय गांड मरने से उसकी हालत वाक़ई खराब थी. और वो ये भी जानती थी की इसके बदले में वो ससुर अब उससे क्या माँगेगा. इसलिए उसके फैक्ट्री जाने से वो खुश हुई क्यूंकी अब ससुर सुबह जाकर शाम को थककर लौटता था.

आँचल जानबूझकर तबीयत खराब होने का बहाना करती रही जबकि असल में उसकी गांड में थोड़ा दर्द था बाकी वो पूरी तरह से ठीक थी. अगले कुछ दिन तक सुनील ने घर पर ही रहकर आँचल का ध्यान रखा. उसने एक बुड्ढा कुक भी रख लिया और आँचल के ज़ोर देने पर नयी नौकरानी भी रख ली. आँचल को रेखा से ब्लैकमेल होने का डर था इसलिए उसने बहाने बनाकर सुनील से उसको निकलवा दिया. आँचल बीमारी का बहाना बनाकर कुछ दिन तक आराम करती रही. उधर ससुर इन सब बातों से अलग फ्रस्टरेट हो रहा था.

आँचल की बीमारी की खबर सुनकर उसके माता पिता भी उसको मिलने आए. उन्होने सुनील से कहा थोड़े दिन के लिए आँचल को हम अपने साथ मायके ले जाना चाहते हैं. वैसे भी वो शादी के बाद से मायके नही जा पाई थी.

सुनील ने ये बात मान ली और आँचल अपने मायके चली गयी. उस दिन जब ससुर शाम को घर आया तो उसे पता चला की बहू मायके चली गयी है , वो बड़ा दुखी हो गया. आँचल की सास बहुत दिन से अपने रिश्तेदार के घर शादी में गयी हुई थी और कुछ दिन में लौटने वाली थी. ससुर दुखी हुआ की बुढ़िया के लौटने के बाद उसका बहू को चोदने का कोई चांस नही है.

मायके पहुँचने के बाद आँचल का सामना अपने नौकर रामू से हुआ. वो हरामी छोकरा आँचल को वापस देखकर बहुत खुश हुआ और आँचल को वासना भरी नज़रों से ताकने लगा. आँचल का चेहरा शरम से लाल हो गया क्यूंकी वो ससुराल में रामू के लंड को याद करके बहुत मूठ मारा करती थी. अपने मायके आकर आँचल ने बहुत खुशी महसूस की . रामू को देखकर उसने बहुत हॉर्नी फील किया.

आँचल के पेरेंट्स ने उसको एकदम से खुश देखा तो उन्होने सोचा की मायके आने की खुशी से ये बीमार से खुशी महसूस कर रही होगी , उन्हे आँचल पर कोई शक़ नही हुआ की इसमे इतना चेंज एकदम कैसे आ गया की अभी तो ससुराल में बीमारी से लेटी थी और यहाँ इतनी खुश दिख रही थी.

रामू भी आँचल के जाने के बाद उसको मूठ मारते समय बहुत याद करता था , उसको लगा अब इसकी शादी हो गयी है अब इसको चोदने में कोई लफड़ा नही है.
उस रात को आँचल ने रामू के लंड को याद करके मूठ मारी. उसने फैंटसाइज किया की रामू का बड़ा लंड उसकी चूत में अंदर बाहर हो रहा है. एक तरह से रामू का लंड उसके पहले प्यार के जैसा था क्यूंकी सबसे पहले उसने उसी का देखा था, अपनी शादी से कुछ ही दिन पहले.

जब सुबह हुई तो बेड पर लेटे लेटे आँचल सोचने लगी की रामू के साथ अकेले वक़्त बिताने का मौका कैसे मिलेगा , इस ख्याल से उसको अपनी चूत से रस बहता महसूस हुआ.

पिछले कुछ सालों से मायके में रामू उसके लिए बेड टी ला रहा था . आँचल जानबूझकर उसको अपने बदन को देखने देती थी , कभी कभी उसकी नाइटी ऊपर उठ जाती थी तो रामू को उसकी मांसल जांघें भी देखने को मिल जाती थी, और कभी कभी चूचियाँ भी देखने को मिल जाती थी.

आँचल ने आज जानबूझकर पैंटी नही पहनी थी और वो पेट के बल लेटी थी और उसने अपनी टाँगें फैला ली थी. उसने अपनी नाइटी भी ऊपर को खींच ली थी , जिससे जब रामू सुबह की चाय ले के आए तो उसको आँचल की जांघों के साथ ही उसकी गीली चूत का भी नज़ारा दिखे . तभी उसको कदमों की आहट सुनाई दी , उसने सोचा रामू चाय ले के आ रहा होगा. और उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी.

लेकिन उसको अपनी माँ के बोलने की आवाज़ आई , वो झटके से उठ के सीधी हो गयी . तभी उसके बेडरूम में उसकी माँ , नौकर रामू के साथ आई.

रामू ने कमरे में अंदर घुसते समय नाइटी में आँचल का अधनंगा बदन देख लिया था , फिर जब वो झटके से सीधी हुई तो उसकी नाइटी के अंदर , बिना ब्रा के , ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे को हिलती हुई बड़ी बड़ी चूचियाँ भी उसको देखने को मिली. उस पतली नाइटी में आँचल के तने हुए निप्पल साफ साफ दिख रहे थे. रामू समझ गया की आँचल बहुत एक्साइटेड हो रखी है.

ये सब देखकर आँचल की माँ ने रामू को तुरंत कमरे के बाहर भेज दिया.
फिर वो आँचल से बोली, “ कैसे कपड़े पहन रखे हैं, सब कुछ तो दिख रहा है. अब तुम्हारी शादी हो चुकी है . ऐसे झीने झीने कपड़े तुम सिर्फ़ अपने पति के सामने पहना करो. यहाँ थोड़ा ढंग के कपड़े पहना करो. आया समझ में ? ”

आँचल को निराशा हुई पर मजबूरी में सहमति में सर हिलाना पड़ा. कहाँ वो रामू को बेड टी के टाइम सिड्यूस करने की सोच रही थी और यहाँ उसे माँ के साथ बेड टी पीनी पड़ी और तमीज़ से रहने का लेक्चर अलग से.

अगले दो दिन तक आँचल को अकेले रामू के साथ कोई मौका नही मिला. उसकी माँ घर पर ही थी. आँचल बहुत फ्रस्टरेटेड हो गयी. वो रामू के इतने नज़दीक़ थी पर चुदाई का मौका नही मिल पा रहा था.

आज उसको अपनी ससुराल वापस जाना था. शाम को सुनील उसको ले जाने आने वाला था. अब उसका फ्रस्ट्रेशन और भी बढ़ गया कि मायके में आकर भी रामू के साथ कोई मौका नही मिला.

लेकिन दोपहर में उसकी माँ मार्केट चली गयी. माँ के जाते ही आँचल रामू को ढूंढने लगी. लेकिन उसको घर में रामू नही दिखा. फिर वो घर के पिछवाड़े में बने सर्वेंट क्वॉर्टर्स की तरफ गयी. वहाँ रामू के कमरे के दरवाज़े को उसने हल्का सा धक्का दिया तो वो खुल गया पर अंदर कोई नही था. कमरे को खाली देखकर वो निराश हुई. लेकिन उसने देखा कमरे की दीवारों में फिल्म स्टार्स , मॉडल्स के कुछ अधनंगे और कुछ पूरी नंगी मॉडल्स के पोस्टर चिपके हुए हैं. रामू की चारपाई में तकिये के नीचे उसे मस्तराम की सेक्स कहानियों की हिन्दी किताब मिली. आँचल वहीं बेड में बैठकर वो गंदी किताब पढ़ने लगी. कमरे में नंगे पोस्टर्स के बीच वो गंदी कहानियों की किताब पढ़ने से आँचल बहुत उत्तेजित हो गयी और उसकी चूत से रस बहने लगा. उसने अपने जीन्स का बटन खोला और रामू के बेड में लेटकर अपनी गीली चूत में उंगली करने लगी.

रामू के बिस्तर में लेटकर मूठ मारने से उसे एक अलग सा रोमांच हुआ , ऐसा रिस्क लेने से उसकी उत्तेजना बहुत ही बढ़ गयी और उसको ओर्गास्म आने ही वाला था की तभी कमरे में रामू आ गया. रामू ने देखा की आँचल मेरे बेड पर लेटी हुई है और जीन्स नीचे को खिसका के चूत में उंगली कर रही है. वो हैरान रह गया. आँचल ने भी रामू को देख लिया लेकिन तभी उसको जबरदस्त ओर्गास्म आ गया , वो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी.

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