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तड़पती साली की फ़ोन

हेल्लो दोस्तों मैं अपने साली अर्चना को मेरे घर से गए हुए कुछ 3 महीने हुए थे। वो मुझे मोबाइल मैसेज के जरिये हिंदी शायरी, गंदे जोक्स और दूसरी चीजें भेजती रहती थी। कभी कबार वो फोन कर के भी मुझ से बातें कर लेती थी। मेरी बीवी मधु से छुपाने के लिए मैंने उसका नाम रतन नूरा के नाम से सेव किया था मोबाइल में। एक दिन मैं डाइनिंग टेबल पे बैठा अख़बार पढ़ रहा था तभी बीवी ने आवाज लगाई, “अजी सुनते हो किसी रतन नूरा का फोन आया हैं।”

चुदक्कड साली का फोन आया

मैंने फट से अख़बार फेंका और फोन अपने हाथ में लिया।

“हल्लो, बोलो।” मैंने फोन ले के गेलरी कि तरफ कदम बढ़ाते हुए कहा।

“जीजा कैसे हो आप। आप तो आजकल अपनी साली को याद ही नहीं करते।” अर्चना हंस के बोली।

“अरे हम तो याद करते हैं बस थोडा बीजी थे।” मैंने फोन कि वोल्यूम के बटन को निचे दबाते हुए कहा।

“अच्छी बात हैं। मैंने आप के शहर में ही हूँ दो दिन के कोलेज के इंडस्ट्रियल टूर पे। हो सके तो शाम को मिलने का जुगाड़ किजिए कुछ।” अर्चना कि बातो ने चुदवाने कि महेच्छा नजर आ रही थी।

मैंने कहा, “कहा ठहरना हैं आप लोगो का।”

“हम लोग होटल न्यू एरा में हैं। आज सुबह आये हैं और परसों तक यही हैं। हो सके तो एक शाम हमारे साथ ननिकाल लीजिए।” अर्चना कि चुदासी आवाज मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी।

मैंने अर्चना को हाँ कहा और फोन रख के मैंने सुधीर को फोन लगाया। अरविन्द दरअसल मेरा मेनेजर हैं जिसे जवान लड़कियां चोदने का बड़ा शौक हैं। उसके हाथ में मेरे प्रोमोशन कि रेखा हैं और मैं जानता हूँ कि अर्चना कि चूत मुझे प्रमोशन दिलाने में बड़ी मदद कर सकती हैं।

“हल्लो कौन सुधीर साहब।?” मैंने पूछा।

“हाँ बोलो क्या हुआ।” सामने सुधीर बाबू ही थे।

“कुछ नहीं एक जुगाड़ हुआ था आप के लिए। कच्ची कली हैं। 20 साल कि उम्र हैं रिशेत में मेरी साली हैं लेकिन उसकि चूत बड़ी ही प्यासी हैं। अगर आप कहो तो हम तीनो मजे ले सकते हैं होटल न्यू एरा में।” मैंने सुधीर के सामने चारा फेंका।

“बढ़िया हैं। मैं होटल न्यू एरा में ही एक रूम बुक कर लेता हूँ ताकि बहार ना जाना पड़े। लेकिन वो मुझ से चुदवा लेंगी ना?” सुधीर कि बेताबी बढ़ रही थी।

“अरे वो ले लेंगी आप का भी टेंशन ना लो। बस आप मजे लो सर जी।” मैंने सुधीर को भरोसा दिलाया।

सुधीर से फोन पे बात करने के बाद मैंने वापस अर्चना को फोन किया।

“हेल्लो, मैं शाम को होटल से ही तुम्हे फोन करता हूँ। मेरे साथ मेरे एक दोस्त भी आयेंगे; कोई दिक्कत तो नहीं हैं ना?” मैंने पूछा।

अर्चना हंस के बोली, “अरे एनिथिंग फॉर यू माय स्वीट जीजा।”

मैं समझ गया कि अर्चना कि चूत और गांड में अजब खुजली हैं जीजा से चुदवाने कि। मैं भी मनोमन अपनी साली कि चूत का मजा लेने के लिए उतावला हुआ पड़ा था।ऑफिस में मैंने सुधीर सर से बात कि और उन्होंने मुझे शाम को 4 बजे ही ऑफिस से निकल जाने को कहा। साथ में निकलने से किसी को शक हो सकता था इसलिए वो साढ़े 4 बजे निकलने वाले थे। मैंने होटल न्यू एरा जाके सुधीर सर का नाम लिया और होटल के रिसेप्शनिस्ट ने मुझे एक कमरे कि चाबी दे दी। सुधीर सर शायद यहाँ आते जाते रहते थे तभी तो उनके नाम मात्र से मुझे एक चाबी di गई थी। शायद यही होटल थी जहाँ सुधीर सर जवान चूत का लुत्फ़ उठाते होंगे।

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कमरे में जाने के बाद मैंने फिर से अर्चना को फोन किया। मैंने उसे तीसरी मंजिल पे कमरा नंबर 351 में आने के लिए कहा। अर्चना ने मुझे कहा कि वो 10 मिनिट के अंदर आ रही हैं; क्यूंकि उसके 1-2 दोस्त उसके साथ थे। मैंने अर्चना कि चूत कि राह में बैठ गया और वेटर से एक बियर और कुछ फ्राय सिंग मंगा ली। बियर कि ठंडी घूंट भर रहा था तभी दरवाजे के ऊपर दस्तक हुई। मैं जान गया कि अर्चना आ गई हैं। मैंने ग्लास मेज पे रखा और दरवाजे को खोला। अर्चना फट से अंदर आई और मुझेचिपक गई। इतने महीनो के बाद उसके चुंचो में कुछ भारीपन जरुर आया था। मैंने उसे कस के अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठो को अपने होंठो से लगा दिया। अर्चना ने भी मेरी लिप किस का सटीक तरीके से जवाब दिया और वो मुझे उतनी ही तीव्रता से किस करने लगी। मेरा लंड खड़ा हो गया अर्चना को छुते ही। उसने उसके हाथ मेरे बालों में फंसा लिए और वो मुझे एकदम डीप किस करने लगी। उसकि जबान मेरी जबान को लपेट रही थी और वो उसे खिंच खिंच के चूसती जा रही थी। मैंने भी उसके चुम्मे का जवाब अपने चुम्मे से दिया और मेरे हाथ भी उसके स्तनों से खिलवाड़ करने लगे। मेरी साँसों कि गति बढ़ने लगी और लंड जैसे कि दस्तक देने लगा पेंट के दरवाजे को।

लंड चूस रही थी तभी सुधीर सर आये

अर्चना कि आहें गरम होने लगी थी और उसकि चूत ने भी जरुर पसीना छोड़ा होंगा। उसके हाथ मेरे लंड कि लम्बाई नापने लगे और मैंने उसे और भी कस के चुम्मा दे दिया। उसकि हालत अब बिगड़ने लगी थी। उसने फट से अपनी ऊँगली ज़िप पे लगाईं और उसे खोल दी। मैंने अपने एक हाथ से मेरा लंड बहार निकाला। लंड के बहार आते ही वो निचे अपने घुटनों पे जा बैठी और लौड़े को चुम्मे देने लगी। उसका स्कर्ट बैठने कि वजह से थोडा उठ गया और उसने दुसरा हाथ अपने स्कर्ट के अंदर अपनी चूत पर रख दिया। अर्चना ने अपना मुहं खोल के मेरे लंड को सीधा मुहं में ले लिया और वो उसे चूसने और चाटने लगी। मैंने अपने बाल्स को हाथ में लिया और उन्हें ऊपर उठाया। अर्चना समझ गई कि उसे अब क्या करना हैं। उसने कुत्ते कि तरह अपनी जीभ बहार कि ओर निकाली और वो मेरे बाल्स यानी को गोलियों को चाटने लगी। यह एक बड़ा ही रोमांचित कर देने वाला सेक्स आसन होता हैं; और जिसने अपने बोल्स चट्वायें हैं वो इसका सुखद अनुभव जानते हैं। अर्चना बड़े ही ससेक्सी तरीके से अब बाल्स और लंड चाट रही थी।

तभी मेरे मोबाइल कि घंटी बजी। वो सुधीर सर ही थे। मैंने उन्हें कमरे में बुला लिया। उन्होंने दस्तक दी और मैंने खड़े लंड के साथ ही दरवाजा खोला। अंदर आते ही सुधीर सर ने अर्चना कि और देखा। अर्चना का हाथ अब भी उसकि चूत के ऊपर रखा हुआ था जिसे वो मसल रही थी। सुधीर सर ने आके सोफे के ऊपर अपनी गांड टिकाई और बोले, “क्या नाम हैं तुम्हारा?”

अर्चना ने अपना नाम बताया और वो अपनी चूत को मलती रही। सुधीर ने फट से अपनी पेंट खोली और अपने लौड़े को बहार निकाला। उनका लंड तो मेरे से भी लम्बा था जैसे नाग का बच्चा। अर्चना ने सुधीर के लंड को अपने हाथ में लिया और मेरे लंड को अपने मुहं में। मेरी साली को चुदाई री-स्टार्ट करने में कोई दिक्कत ही नहीं हुई जैसे। सुधीर सर ने अपनी शर्ट के बटन खोले और वो अर्चना के चुंचो को मसलने लगे। अर्चना ने अब कि मेरा लंड अपने मुहं में गले तक भर लिया और वो उसे मस्त चूसने लगी। सुधीर सर बड़ी बेताबी से अपने लंड के ऊपर थूंक लगने कि राह देख रहे थे शायद। मैंने अर्चना के माथे को पकड के उसके मुहं में लंड के झटके लगाये और मेरी यह चुदासी साली लंड के झटको को बड़े ही आराम से सहने लगी। सुधीर का लंड वैसे ही प्यार से सहलाया जा रहा था जैसे मेरा लौड़ा चूसा जा रहा था। अर्चना ने अब धीरे से मेरे लंड को अपने मुहं से बहार निकाला और उसके ऊपर अपने हाथ जमा दिए। सुधीर का लौड़ा अब उसने अपने छोटे से मुहं में भर लिया और उसे चूसने लगी।

सुधीर कि आँखे बंध हो गई और वो एक एक सेकण्ड कि चूसाइ का लुत्फ़ उठाने लगे।मैंने अर्चना के हाथ से अपने लौड़े को छुड़ाया और मैं निचे बैठ गया। सुधीर ने यह देखा और उसने अर्चना को कंधे से पकड के पलंग पे बिठाया। वो खुद पलंग के ऊपर खड़ा हो गया और अर्चना को वापस लौड़ा मुहं में देने लगा। मैंने अर्चना कि टांगो को फैलाया और उसकि पेंटी को धीरे से निचे सरकाया। अर्चना ने अपनी चूत नजदीक में ही शेव कि थी तभी तो उसके ऊपर एक भी बाल नहीं था। मैंने पेंटी को पूरा निचे खिंच लिया और उसकि टाँगे उठा के अपने कंधो के ऊपर रख दी। उसकि चूत बिलकुल मेरे सामने थी और मैं अपनेआप को जरा भी रोक नहीं पाया। मैंने अपनी जबान चूत के ऊपर फेरा और अर्चना कि आह मैंने सुनी। अर्चना ने मेरे माथे को पकड के अपनी चूत कि तरफ खिंच लिया। मैंने अपनी जबान को चूत के छेद में डाला और अर्चना को मजे देने लगा। अर्चना कि आह पे आह निकलने लगी।

सुधीर अभी भी अपना लंड अर्चना के मुहं में पेलने लगे। मैंने अर्चना कि चूत को फाड़ा और चूत के दाने के ऊपर अपनी जबान रगड़ने लगा। जिस ने चूत के दाने के ऊपर जबान घिसवाई हो उसे ही पता हैं कि इसका मजा क्या हैं। क्यूंकि अर्चना तो जैसे कि पगला सी गई थी और वो सुधीर के लौड़े को और भी मजे से चूसने लगी। बिच बिच में वो मेरे सर को अपनी और खिंच लेती थी।सुधीर सर भी बड़े मजे से अर्चना को मजे से लौड़ा चूसा रही थी। अब मेरा लंड बिलकुल तैयार था अर्चना कि गरम चूत को चोदने के लिए। मैंने अर्चना के भोसड़े से अपना मुहं हटाया और लंड पकड के चूत के ऊपर रख दिया। अर्चना भी चुदवाने के लिए बेताब थी इसलिए उसने अपनी चूत में मेरे लंड का रास्ता अपने हाथ से बनाया। मैंने एक झटका दिया और अर्चना कि चूत के अंदर अपना लंड ठेल दिया। अर्चना ने एक आह निकाली और पुरे लंड को अपने भोसड़े में भर लिया। सुधीर का लंड अभी भी अर्चना के मुहं में था और वो मुझ से चुद रही थी। मैंने अर्चना के चुंचो को पकड़ा और अपनी गांड हिला हिला के उसकि चुदाई करने लगा। अर्चना ने सुधीर का लंड अपने मुहं से निकाला और वो उसे अपने हाथ से हिलाने लगी।

चूत वीर्य कि मलाई से भर दी

मैंने अर्चना कि कमर को अपने हाथ में पकड़ा और उसे आगे पीछे कर e हिलाने लगा। अर्चना भी अपनी गांड हिला हिला के मेरा साथ दे रही थी। मेरे तोते उड़े हुए थे और मैं जोर जोर से चूत कि गहराई तक अपना लंड डाल रहा था। सुधीर सर अपना लंड अर्चना के हाथ में पकड़ा के मजे ले रहे थे। अर्चना कि कमर से अब मैंने अपने हाथ उसके चुंचो के ऊपर रख दिए। सुधीर सर मेरी तरफ देख के अर्चना कि और देखने लगे। मैं समझ गया कि उनका लौड़ा भी चूत मारने के लिए बैठा हैं। मैंने अपनी चुदाई कि झडप बढ़ा दी और अर्चना को और भी जोर जोर से ठोकने लगा। अर्चना कि आह आह निकल गई। २ मिनिट के भीतर ही मेरे लंड ने अपने मुहं से वीर्य कि मलाई निकाल दी। कुसम ने भी अपनी चूत को टाईट कि और वीर्य को अंदर ले लिया।

मैंने लौड़ा बहार निकाला और मैं सोफे के ऊपर जा बैठा। अब बारी सुधीर सर कि; वो उठ खड़े हुए और उन्होंने अर्चना कि चूत के छेद पे अपना लंड सेट किया। मैंने अपनी जेब से एक सिगरेट निकाल के जलाई और फूंकने लगा। सुधीर सर ने अपना लंड अर्चना कि चूत के ऊपर रख दिया और एक ही झटके में वो काला लंड अर्चना कि चूत के अंदर गायब हो गया। अर्चना के मुहं से एक आह निकल गई और उसने पलंग कि चद्दर को पकड के मरोड़ दिया। सुधीर सर ने अर्चना कि कमर को पकड़ा और झटके लगाने लगे। अर्चना कि आह आह निकल रही थी और सुधीर सर उसे और भी जोर जोर से चोद रहे थे। अर्चना ने भी अपनी गांड एक मिनिट के बाद हिलानी चालू कर दी। उसे भी अब इस बड़े लंड से चुदने कि मजा आने लगी थी।

अर्चना कि गांड अब और भी जोर जोर से हिल रही थी। सुधीर सर उसकि गांड के ऊपर चमाट लगा लगा के उसे ठोक रहे थे। अर्चना अपनी गांड को जोर जोर से हिला के अपनी चूत कके अंदर लौड़े को गायब कर रही थी। सुधीर सर ने अपना लोहे जैसा मजबूत लंड बहार निकाला और अर्चना को कुतिया बना दिया। अर्चना ने गांड को फैलाया और सुधीर सर ने पीछे से उसकि चूत में अपना लंड पेल दिया। अर्चना कि गांड के निचे उसके चूत के छेद में लंड गायब हो गया और फिर धीरे धीरे झटको के साथ वो दिखने लगा और फिर अंदर जा रहा था।अर्चना अपनी गांड हिला हिला के चुदाई करवाती रही और सुधीर सर अपने लंड को चूत में पेलमपेल करते रहे।

5 मिनिट कि चुदाई और चली और सुधीर सर भी अपना मावा चूत में निकाल बैठे। अर्चना ने लंड को अंदर निचोड़ा और कुछ वीर्य कि बुँदे उसके गांड के छेद पे भी आ गया। सुधीर सर अपना लंड ले के मेरे पास आ गए और सिगरेट सुलगा ली। अर्चना ने अपनी स्कर्ट पहनी और वो उठ बैठी। मैंने उसे अपने पास इशारे से बुलाया और अपनी गोद में बिठा लिया। अर्चना के बालों में हाथ घुमाते हुए मैंने सुधीर सर से पूछा, “क्यों सर कैसी लगी मेरी सेक्सी साली…?”

सुधीर सर ने मुहं के धुंए को हवा में छोड़ते हुए कहा, “अरे मस्त हैं आपकि यह सेक्सी साली तो। मेरा तो मन और एक राउंड के लिए हैं आज रात।”

अर्चना कि और देख के मैंने पूछा, “क्यों भाई क्या इरादा हैं तुम्हारा…!”

अर्चना ने हामी भरी। तभी सुधीर सर बोले, “मैं और भी एक लड़कि को ले के आऊंगा। साथ में मजे करेंगे।”

अर्चना ने मेरी और देख के कहा, “अरे किसी और को ले के आने कि क्या जरुरत हैं। मेरी दोस्त शिल्पा हैं ना। उसे भी सेक्स के मजे लेने का बड़ा शौक हैं।”

मैंने अर्चना कि और देख के कहा, “तो फिर उसे ही बुला लो शाम को ९ बजे। मैंने और सुधीर सर तब तक डिनर कर लेंगे…!”

अर्चना कपडे ठीक कर के निकल गई। मैंने सुधीर सर को देखा और पाया कि वो भी शिल्पा और अर्चना कि चूत मारने के लिए बेताब हैं। आप भी मैं अगली कहानी में बताऊंगा कि कैसे मैंने शिल्पा और अर्चना के साथ ग्रुपसेक्स का मजा लिया था…।।! कहानी अच्छी लगी ना, तो फिर फेसबुक पे शेर करना मत भूलना…।।!

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