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मेरी चुदाई पाप ने की

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यह तो ऋषि वात्सयायन का बहुत भला हो जिन्होंनें काम शास्त्र की रचना कर के भारतवासियों और विदेशी पंडितों को काम कला के नए तरीके सिखाए और काम कला के साथ जुडी सैंकड़ों भ्रान्तियाँ दूर की|
मैं जब चन्दा भाभी को घोड़ी बना कर चोदनें लगा तो गौरी और नन्दा भाभी भी आकर खड़ी हो गई और हमारी चुदाई को बड़े ध्यान से देखनें लगी|
जब मैंनें अपना लण्ड चन्दा भाभी की गांड में ना डाल कर उसकी चूत में पीछे से डाला तो दोनों भाभियों नें हाथ लगा कर महसूस किया कि क्या मेरा लण्ड वाकयी में चन्दा भाभी की चूत में गया है या फिर कहीं गांड में तो नहीं घुस गया|

चन्दा भाभी की घुड़ चुदाई के दौरान दोनों भाभियाँ वहीं खड़ी रही और बड़ी उत्सकता से चुदाई का नज़ारा देखती रहीं|

तभी गौरी भाभी बोली- चन्दा, तुम ना चुदाई कराते हुए ही अपनी कहानी सुनाना शुरू कर दो, सोमू तुम अपनें धक्के ज़रा धीरे धीरे मारो ताकि भाभी अपनी कहानी भी सुनाती रहे और तुमसे चुदती भी रहे! कर सकोगे ऐसा सोमू?
मैंनें दोनों भाभियों को आँख मारी और हाँ में सर हिला दिया|
अब चन्दा भाभी नें बोलना शुरू किया|
जब मैंनें होश सम्भाला तो मैं मम्मी पापा के साथ ही एक कमरे में सोती थी लेकिन एक अलग पलंग पर, उनके साथ नहीं|

रात को जब भी नींद खुलती तो मैं अक्सर धुंधले में मम्मी पापा को चुदाई करते ही देखती थी लेकिन मुझको यह समझ नहीं आता था कि दोनों क्या कर रहे हैं|
फिर एक दिन जब मैं स्कूल जा रही थी तो रास्ते में हम सब लड़कियों नें एक कुत्ते और कुतिया को आपस में करते हुए देखा, कुत्ता बिलकुल ऐसे ही कुतिया पर चढ़ा था जैसे सोमू अब मेरे ऊपर चढ़ा है|
तब हम सब लड़कियां हँसते हुए स्कूल चली गई हालाँकि इसका मतलब क्या होता है, यह हम समझ नहीं पाई थीं|

भाभी मेरी तरफ मुंह करके बोली- सोमू तुम अपनें धक्के मारते रहो, मुझको बड़ा आनन्द आ रहा है|
भाभी नें फिर कहानी जारी रखते हुए कहना शुरू किया- हाँ तो, कुछ दिनों बाद एक रात जब मेरी नींद अचानक खुल गई तो मैंनें देखा कि पापा मेरी मम्मी के ऊपर ऐसे ही चढ़े थे जैसे कुत्ता कुतिया पर चढ़ा था और मेरे पापा बड़े तेज़ और ज़ोरदार धक्के मार रहे थे और मेरी मम्मी हल्के हल्के हाय हाय कर रही थी|
मेरी इच्छा हुई कि पूछूं कि पापा आप मम्मी को क्यों धक्के मार रहे हो पर फिर पापा के डर के कारण मैं चुप रह गई और कुछ भी नहीं बोली|
वृंदा भाभी फिर बोली- सोमू यार, तेज़ तेज़ धक्के मारो, मेरा छूटनें वाला है… उफ़ उफ़… मेरी माँ, मज़ा आ गया सोमू यार और तेज़ मारो पूरा अंदर डाल कर मारो धक्का… ओह्ह मैं गई रे… उफ़ मेरी माँ… ओह्ह ओह्ह!
यह बोलते हुए वृंदा भाभी एकदम अकड़ी और एक ज़ोरदार कंपकंपी के बाद ढीली पड़ करके लेट गई|

लेकिन अपना मुंह पीछे मेरी तरफ कर के बोली- सोमू, अपना लंड निकालना नहीं, पड़ा रहनें दो इसको चूत के अंदर थोड़ी देर और अभी… ओह्ह ओह्ह!
दोनों भाभियाँ भी काफी गर्म हो चुकी थी और दोनों के हाथ अपनी बालों से भरी रस भरी चूतों पर फिसल रहे थे और दोनों ही कभी कभी मेरे चूतड़ों और अंडकोषों के ऊपर भी हाथ फेर रही थी|
जैसे ही नन्दा भाभी मेरे निकट आई, मैंनें उसको मम्मों से पकड़ लिया और अपनें पास खींच कर उनके मम्मों को चूसनें लगा जबकि मेरा लण्ड चन्दा भाभी की टाइट चूत में अभी भी आहिस्ता से आगे पीछे हो रहा था|
चन्दा भाभी के गोल और मोटे चूतड़ एकदम मेरे लण्ड के साथ चिपके हुए थे और मैं उनकी सुंदरता निहार भी रहा था और महसूस भी कर रहा था|
वृंदा भाभी अपनी कहानी जारी रखते हुए बोली- इस तरह तकरीबन हर रात मैं मम्मी पापा को चोदते हुए देखती और सोचती कि मेरे साथ ऐसा कौन करेगा| यह काम कला का खेल कई बार देखनें का मौका मिला और यह निहायत ही रसीला खेल देखते हुए ही मैं बड़ी हो गई और मेरा पहला पीरियड शुरू हुआ|
अब मेरी मम्मी नें मुझ को एक अलग कमरे में सुलाना शुरू कर दिया लेकिन मैं मम्मी पापा के काम कलाप को हर रोज़ देखनें से वंचित रह गई| मेरे मेरे मन में यह तीव्र इच्छा पैदा हो रही थी कि काश मेरे पापा मुझको मम्मी की तरह ही चोद सकते|
जब मैं कॉलेज में पहुँची तो मुझको यौन कला का काफी ज्ञान हो चुका था और यह ज्ञान मुझको शौक़ीन सहेलियों नें दिया था जो एक दो बार चुदाई का मज़ा ले चुकी थी|
फिर एक दिन मेरी मम्मी मेरी बीमार नानी को देखनें के लिए पास ही के एक दूसरे शहर में गई चली गई और मुझे आगाह कर गई कि मैं पापा के खानें पीनें का ध्यान रखूँ और वो जल्दी ही वापस लौट आयेंगी|
उस रात मैं पापा को खाना खिलानें के बाद अपनें कमरे में आ कर पढ़ रही थी कि पापा नें आवाज़ दी और मैं उनके कमरे में गई|

पापा मुझको देख कर बोले- चन्दा ज़रा मेरा सर तो दबा दे, बड़ी पीड़ा हो रही है|
मैं उनके बिस्तर पर बैठ कर उनका सर दबानें लगी और पापा आँखें बंद किये चुपचाप मुझ से सर दबवाते रहे|

थोड़ी देर बाद वो बोले- अब आई हुई हो तो टांगें भी दबा दे, बड़ी दर्द कर रही हैं|
अब मैं उनकी टांगें दबानें लगी| मैं सर झुकाए हुए उनकी टांगें दबानें में लगी थी कि अचानक मेरे पापा नें मेरा हाथ पकड़ कर मुझ को अपनें आलिंगन में ले लिया और मेरे होटों को बेतहाशा चूमनें लगे|
मैं एकदम हक़्क़ी बक्की हुई बैठी रही लेकिन फिर मैं थोड़ी देर बाद संभल गई और सोचनें लगी पापा नें तो मेरे दिल की मुराद पूरी कर दी|
जल्दी ही पापा नें मुझ को लिटा दिया और मेरी साड़ी को ऊपर करके मुझको अधनंगी कर दिया और मेरी सफाचट चूत पर हाथ फेरनें लगे|

जब वो ऐसा कर रहे थे तो मुझको पहले कुछ अजीब लगा लेकिन थोड़ी देर बाद मुझ को आनन्द की अनुभूति होनी शुरू हो गई और मैं अपनी आँखें बंद करके पापा के हाथों का कमाल का स्पर्श महसूस करनें लगी|
मैंनें महसूस किया कि पापा बड़े प्यार से मुझको कामकला के लिए तैयार कर रहे थे और कोशिश कर रहे थे कि मुझको भी हर क्षण पूरा आनन्द प्राप्त होता रहे|
पापा मेरा ब्लाऊज खोल कर मेरे छोटे लेकिन काफी सख्त मम्मों को भी चूस रहे थे और अपनी ऊँगली से मेरी चूत में स्थित भग को भी रगड़ रहे थे जिससे मेरे चूतड़ अपनें आप ऊपर उठ रहे थे और पापा की उंगली फिसल कर मेरी चूत के अंदर चली जाती थी जिससे मुझको थोड़ा दर्द भी होता था|
पापा नें इस दौरान मेरे हाथ को अपनें नंगे हुए लंड के ऊपर रख दिया और मेरे हाथ को गोल करके मुट्ठी मारनें का तरीका समझानें लगे|
उनके लण्ड की मोटाई और लम्बाई को महसूस करके मैं एकदम भयभीत हो गई और सोचनें लगी कि इतना मोटा और लम्बा लिंग मेरी चूत में कैसे जाएगा|

अपनी चूत पर हाथ लगाया तो उसको एकदम गीला पाया और उसमें से रस बिस्तर पर टपक रहा था|
अब पापा नें अपनें सब कपड़े उतार दिए और मुझे भी पूरी नंगी कर लिया|

थोड़ी देर मेरे होटों पर चुम्बन देनें के बाद पापा नें मेरी टांगों को फैला दिया और वो उनके बीच में बैठ कर अपनें मोटे लण्ड को मेरी चूत के मुख पर रख दिया और धीरे से एक हल्का धक्का मारा|
मुझको काफी तीव्र पीड़ा का अनुभव हुआ और मेरी टांगें अपनें आप सिकुड़ कर बंद हो गई|

कुछ देर सोचनें के बाद पापा उठे और ड्रेसिंग टेबल से कोल्ड क्रीम की शीशी उठा लाये और काफी मात्रा में क्रीम मेरी चूत के अंदर और बाहर लगा दी|
फिर वो दुबारा मेरी टांगों को चौड़ा करके उनके बीच में बैठ गए और अपनें अकड़े हुए लण्ड को पुनः मेरी चूत के मुंह पर रख दिया और फिर बहुत ही धीरे धीरे उसको मेरी चूत में घुसेड़नें लगे|
हर बार लण्ड रुक जाता था क्यूंकि मेरी चूत के अंदर वाली झिल्ली काफी सख्त थी और वो उनके लण्ड के हल्के प्रहार से फट नहीं रही थी|
फिर उन्होंनें अपनें लण्ड पर भी कोल्ड क्रीम लगाई और फिर एक ज़ोरदार धक्का मारा और चररर की आवाज़ से मेरी चूत की झिल्ली फट गई और पापा का लण्ड मेरी चूत में पूरा घुस गया और मैं दर्द से एकदम चिल्ला पड़ी.
पापा नें अब मुझको धीरे धीरे से चोदना शुरू किया और थोड़ी देर बाद मुझ को भी इस चुदाई में आनन्द आनें लगा और मैं भी अपनें चूतड़ हिला हिला कर चुदाई का आनन्द लेनें लगी|
थोड़ी देर के ज़ोरदार धक्कों के बाद पापा के अंदर से कुछ गर्म पानी मेरी चूत में गिरा और वो मेरे ऊपर से उठ कर बाथरूम में चले गए और मैं भी वहाँ से उठ कर अपनें कमरे में आ गई, आकर अपनी चूत को देखा तो वो एकदम खून से लथपथ हो रही थी|
अगली रात पापा नें फिर मुझ को अपनें कमरे में बुलाया और मैं डरते हुए उनके कमरे में गई और उन्होंनें बड़े प्यार से फिर वही चुदाई का खेल खेला मेरे साथ और हर रात खेलते रहे जब तक मम्मी वापस नहीं आ गई|
मैं डर के मारे पापा के सामनें ना जानें की कोशिश करती थी लेकिन मुझ को उनके द्वारा चुदाई के दौरान अतीव आनन्द का अनुभव होता था हर बार और वो किसी ना किसी बहानें मुझको अपनें कमरे में बुला ही लेते और मैं ख़ुशी ख़ुशी फिर से उनसे चुदनें के लिए उनके पास चली ही जाती थी|
जैसे कि आमतौर पर होता है, पापा नें मुझ को अच्छी तरह से समझा दिया था कि मैं मम्मी को हमारे इस प्यार के बारे में कतई कुछ ना बताऊँ और पूरी तरह से चुप रहनें के लिए पक्की हिदायत कर दी|
यह भी धमकी भी दी कि अगर मैंनें इस बात को कभी मम्मी को बताया तो वो मुझको फिर कभी प्यार नहीं करेंगे|
शुरू में तो मुझको पापा से काफी शिकायत थी कि उन्होंनें मेरी नादानी का खूब फायदा उठाया लेकिन जैसे जैसे पापा मुझको चोदते रहे मुझको बहुत आनन्द आनें लगा और फिर मैं उनकी चुदाई की आदी हो गई|
और इस तरह मैं पापा से चुदती रही जब भी उन को मौका मिलता और यह सिलसिला चलता रहा जब तक मेरी शादी नहीं हो गई|

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