मेरी चुत की बदनसीबी

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मेरा नाम सीखा है! मैं 21 साल की हूँ! पूर्वी उत्तरप्रदेश के एक छोटे कसबे में रहती हूँ। मैंनें अपनी बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी कर ली है और अब मेरे पापा नें मेरे रिश्ते को पक्का कर दिया है। घर के पास एक भाभी और कुछ सहेलियां रहती हैं! उनमें जो कुछ सहेलियां शादीशुदा हैं! वो और भाभी मिल कर अक्सर मेरे को चिढ़ाती रहती हैं।
भाभी:- क्यों मेरी सीखा! किसी लंड का स्वाद लिया या नहीं कि पूरी कुवांरी हो हो?
“क्या भाभी आप तो बस।।!”
“क्या बस।। कल शादी होगी।। ऐसे शरमाओगी तो कैसे चलेगा? यदि जुगाड़ करना हो तो कह देना! बहुत से लौंडों से पहचान है। अकसर मेरे आस पास चुदाई के लिए मंडराते फिरते हैं।”
“भाभी! आप ज्यादा मत बोलो! आप ही ले लो मजा।। मुझे नहीं लेना है।”
“क्या तेरा मन नहीं करता चूत चुदाई करवानें का?”
“चलो हटो भाभी।। क्या आपके पास कोई मुद्दा ही नहीं है बात करनें का?”

और सभी सहेलियां कहती हैं:- अच्छा छोड़ो ये चुत चुदाई की बातें।। बस यही बता दो कि कभी कोई लंड देखा भी है तुमनें?
सहेलियों के मुँह से लंड का नाम सुनते ही मैं चौंक जाती थोड़ी गर्म होनें लगती! मेरा चेहरा लाल होनें लगता और मेरी चुत में खुजली होनें लगती।

आज जब फिर से मेरी एक सहेली नें लंड के बारे चर्चा की और पूछा कि कभी लंड देखा है?
मैंनें कहा:- नहीं।। और ना ही देखना है।
“देख ले।। नहीं तो पछताएगी कुंवारी चुत में चुदानें में जो मजा है वो शादी के बाद कहाँ है और एक बच्चा आ जाएगा तो हो गया काम।। फिर पति भी झांक कर नहीं देखेगा। वो भी बाहर ही मुंह मारेगा।”

मैं उसकी बातें छोड़ कर अपनें कमरे आ गई और बाल्कनी में बैठ बाहर देखनें लगी थी कि एक लड़का मेरी उम्र का होगा! उसनें इधर उधर देखा और अपनी पैन्ट नीचे करके लंड निकाल कर पेशाब करनें लगा।
मैं उसे देख रही थी कि कितना बड़ा और मोटा लंड था उसका! पूरा लंड बाहर निकला हुआ था। मैंनें पहली बार लंड को देखा था! मेरे नीचे चुत में न जानें कैसी अजीब सी हलचल होनें लगी। मैं एकटक उसके लंड से निकलती मूत की धार को देख रही थी। उसनें पूरा लंड झड़ा कर जैसे ही गर्दन ऊपर की! तो उसकी नजरें मेरे से टकरा गईं।

मैंनें मुस्करा कर मुंडी नीचे कर दी।। मगर वो वैसे ही लंड को हाथ में लेकर हिलानें लगा। मैंनें शर्मा कर अपनी एक उंगली मुंह में ले ली और अन्दर भाग आई। अन मेरी आंखों में वही लड़का और उसका लंड दिखनें लगा।

दूसरे दिन मैं अपनी भाभी के यहाँ बालों में मेहंदी लगवानें चली गई। मैं बोली:- भाभी! मेहंदी लगा दो ना।
भाभी मान गईं और मुझे चेयर में बैठा दिया। मैंनें अपनी शर्ट को खोल कर वहीं रख दिया। मैं समीज पहन कर बालों में मेहंदी लगवानें लगी।

तभी कुछ देर बाद भाभी नें कहा:- सीखा! तेरा सीना कितना बड़ा हो गया है रे… तेरे बोबे कोई दबाता तो नहीं है ना।।!
“नहीं भाभी! ये तो पहले से बड़े हैं।”
भाभी मेरे मोटे मोटे बोबों की तारीफ करनें लगीं।

तभी भाभी नें आवाज लगाई:- अरे राजू! जरा पानी तो लाना!
“भाभी! अभी थोड़ी देर में लाता हूँ।। अभी नहा रहा हूँ।”
मैंनें पूछा:- ये राजू कौन है?
“ये तुम्हारे भाई जी की मौसी के लड़की के लड़का का।।”
मैं बात काटती हुई बोली:- काफी लंबा रिश्ता है।
“अबे यहाँ सभी का सब कुछ लंबा है।”

तभी वही लड़का पानी ले आया! वो सिर्फ तौलिया लपेटे था! जिससे उसके अन्दर का माल पूरा उभार लिए दिखनें लगा।
“चल जल्दी कपड़े पहन कर आ।”
वो मेरे को देख चौंक गया:- आप?
वो जल्दी से चला गया।

“क्यों जानती है क्या इसे।।?”
“नहीं भाभी कल ही देखा था।। अपनें मकान के पास वो मैंनें इसे सूसू करते।।”
“देख लिया था।। कितना लंबा था उसका हथियार।”
“क्या भाभी आप भी ना।।!”

“बोल तो चुदाई का इंतजाम करा दूँ? दोनों का काम हो जाएगा! वैसे भी एक माह बाद वापस चला जाएगा और हम दोनों ऐश कर लेंगे। तेरे को लंड का मजा मिल जाएगा और मेरे को नया माल मिल जाएगा।”
“चलो अपना काम खत्म करो! फिर सोच लेना क्या करना है और नहीं करना।”

तब तक राजू कपड़े पहन कर आ गया।
“अच्छा चल! तेरा काम तो हो गया! अब मेरा काम कर दे। तुम दोनों उस कमरे से सामान ला ला कर दो मैं मचान में जमा देती हूँ।

मैंनें शर्ट पहन ली और हम दोनों कमरे में जाकर सामान ला ला कर देनें लगे। जब मैं झुकती तो राजू मेरे मम्मे देखता और आगे चलती तो वो अपनें हाथ मेरे पीछे टच करनें लगा। मैंनें एक बार घूर कर देखा! फिर हंस दी। ये सिलसिला बढ़ चला। अब उसकी हिम्मत और बढ़ गई! वो मेरी गांड को पूरा दबानें लगा और धक्का मार आगे निकल जाता। मैं भी उसे धक्का मारनें लगी।

अब तो खेल शुरू हो चुका था! काम के बीच में मैं जैसे ही झुकी! उसनें अपनें हाथ से मेरे बटले दबा दिए। मैं चिहुंक गई और मेरे कंठ से एक आवाज निकल पड़ी:- ओह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह।।
फिर क्या था! उसके दोनों हाथों नें शर्ट के ऊपर से ही मेरे मम्मे पकड़ लिए और मुझे अपनी ओर खींच लिया। मैं भी उसे अपनी बांहों में लेकर किस देनें लगी और अगले ही पल उसका तना हुआ लंड मेरे सामनें खड़ा हिल रहा था। उसनें मेरे एक हाथ को अपनें लंड पर रख कर दबा दिया। साथ ही उसनें उत्तेजना से मेरे पूरे बदन में किस शुरू कर दिया।

तभी भाभी नें आवाज लगाई:- हो गया सारा सामान?
और भाभी की आवाज सुनकर हम दोनों अलग होकर बचा हुआ सामान ऊपर करनें लगे।

उसनें कहा:- आई लव यू।
मैंनें हंस कर हामी कर दी और दोनों का खेल शुरू हो गया।

दूसरे दिन मौक़ा निकाल कर हम दोनों को मेरे कमरे में नंगे बदन चिपक कर प्यार करनें लगे। मैंनें उसके लंड को पहली बार हाथ में पकड़ा था। वो मेरी चुत को पीनें लगा! मैंनें भी बदले में उसके लंड को मुँह में ले कर रस पान किया। कुछ देर बाद उसका लंड चुत में समानें लगा! मुझे दर्द तो हुआ मगर परम आनंद नें उस दर्द को हावी होनें नहीं दिया। पहली बार चुदाई के खेल में मस्त हो गए।

अचानक यह सब मम्मी नें देख लिया तो उनको शॉक लगा और उन्होंनें राजू को गाली गलौच करके थप्पड़ मार कर भगा दिया। इसके बाद मेरे ऊपर पहरा लग गया। मैं कहीं अकेली आ जा नहीं सकती थी और ना ही मोबाइल यूज कर सकती। जिसे मिलना होता मम्मी के सामनें बात करके! मिल कर चला जाता।

शादी हो गई! ससुराल गई तो देखा एक बाप की उम्र का आदमी मेरे से 15।20 साल बड़ा रहा होगा।
उसनें कहा:- आज से ये तुम्हारा घर है और तुम इसकी मालकिन हो।
तभी 2 बच्चे दौड़ते हुऐ आए।। और मेरे से लिपट गए।
वो बुढ़ऊ बोला:- ये मम्मी है तुम्हारी!

यह सुन कर मेरे पैरों तले से धरती खिसक गई। शादी में सगाई में कोई और शख्स था और सुहागरात कोई और मनाएगा।
मैं रो पड़ी! पर करती क्या! जो हुआ मेरे बस में नहीं था। मुझे हालात से समझौता करनें के सिवाय कुछ नहीं समझ आया। सुहागरात में ज्यादा कुछ नहीं हुआ केवल एक पुरूष नें मेरी आबरू से खेला और पहले ही हार कर निढाल हो गया। दुख और चिंता से ग्रसित एक एक दिन मुझे एक वर्ष जैसे लगनें लगे।

सुबह बच्चे और रात में पति की सेवा मेरा ख्वाब चकनाचूर करते चले गए! जिसे देखनें और समझनें वाला कोई ना था। घर में सब कुछ था मगर ना था तो मेरा प्यार! मेरी जवानी की बातें! जिसे याद कर जी पाती।

मैं 2 माह के लिए अपनें मायके आ गई। मेरे साथ मेरे वो बच्चे थे! जिनकी माँ में अभी अभी बनी थी। मम्मी और पापा को यह देख बहुत दुख हुआ मगर अब क्या करते! जो होना था वो सब हो चुका था।
मैं अपनी भाभी के पास आई! वो मुझे देख रो पड़ी:- तेरे साथ जो हुआ दुश्मन के साथ भी ना हो। हमनें क्या सोचा था उससे एकदम उल्टा हुआ।

मैं वो प्यार याद करनें लगी थी! जिसे मम्मी नें थप्पड़ मार कर भगा दिया था। उसके नंबर ढूंढा और रिंग किया।
उसकी शादी हो चुकी थी! वहीं पास के शहर में था।
उसनें मिलनें को बोला और हम मिले मगर वो दिन निकल चुके थे। उसकी नजरों में वो कशिश नहीं थी और मेरी चाहत में उतना दम नहीं था कि दोनों एक नया जीवन फिर से शुरू कर सकते।

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