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मामा मामी की गरमा गरम चुदाई

दोस्तो, मैं दिनेश, मेरी पिछली कहानी
मेरी मामी के साथ सहेलियों का लेस्बियन सेक्स
मेरी साली ममता की सहेली सुधा की थी, भूल गए तो बता दूँ कि मेरी साली ममता बड़ी नखरे वाली थी, उसे मैंने बड़ी मुश्किल से पटा कर चोदा था. साली की चुदाई की कहानी
क्सक्सक्स फिल्म दिखा कर साली को मनाया चुदाई के लिये
भी आप पढ़ सकते हैं.

अब आगे की कहानी सुधा के शब्दों में:
मेरी पिछली कहानी में आपने पढ़ा कि कैसे मेरी मामी ने प्रैक्टिकल करके मुझे और मेरी सहेलियों को बताया कि पति अपनी पत्नियों को कैसे चोदते तथा गांड मारते हैं।
इस पर मैंने मामी से कहा था कि मामी एक बार लाइव चुदाई तो दिखाओ!
मेरी बात वो मान गई थी।

शाम को मामी मुझसे बोली- सुधा, मैं तुम्हारे लिए एक प्रेजेन्ट लाई हूँ। किसी को दिखाना नहीं, एक्सक्लुसिव तुम्हारे लिए है।
मैंने कहा- दिखाओ?
मामी बोली- समय पर मिल जाएगा, धैर्य रखो।

पिछली बार की घटना से सबक लेकर मामा मामी के लिए गलियारे वाले रूम में सोने की व्यवस्था की गई थी। गलियारे में छोटे छोटे दीवार बना कर रूम बनाया गया था, चूँकि ईंट की चिनाई मिट्टी से थी तो चूहों ने अपनी करामात दिखाते हुए जगह जगह से छेद कर दिये थे।

खाना खाने के बाद सभी लोगों ने अपने अपने बिस्तर पकड़ लिए, मामा अपने रूम में चले गए, मामी मुझे पकड़ कर एक तरफ ले गई, मुझे आलिंगन में लेते हुए मेरे होंठों को चूसने लगी, मेरे साथ साथ मामी भी मदहोश हो चली थी, उनके साथ साथ मेरी कामुकता भी परवान चढाने लगी थी.
फिर मामी धीरे से मेरी समीज में हाथ घुसाते हुए मेरे चूचियों को दबाने लगी और दोनों चूचियों के बीच में कुछ रख दिया और आँख मारते हुए बोली- यह है तुम्हारा प्रेजेन्ट… रात में तुम्हारे काम आएगा। स्मॉल साइज है, तुम्हारे लिए एकदम फिट होगा।

उस समय कुछ समझ में नहीं आया कि वह क्या चीज है पर मैंने उसे वहीं रहने दिया।

मैं अपनी जगह पर लेट गई और मामी ने मेरे पैर के अंगूठा में सूत बांध कर एक सिरा अपने रुम में लेकर चली गई, कह कर गई कि दो बार खींचूंगी, जाग जाना, तो धागे को जल्दी से खोल देना, खींचने पर मेरे पास आने लगेगा तो समझ जाऊँगी कि तुम उठ गई हो. तब तुम चुपके चुपके आकर मेरी और अपनी मामा की चुदाई देख लेना.

रात गहरी हो रही थी, सभी लोग खर्राटा लेने लगे थे। मैं भी लगभग सो गई थी कि एकाएक मामी ने सूत खींचना शुरु की, मेरी नींद खुल गई और मैंने झट से सूत को अपने पैर के अंगूठा से निकाला और उठ बैठी। मैंने देखा कि सभी लोग गहरी नींद में सो रहे थे।

नंगे पैर दबाते हुए मैं दीवार के ओट में खड़ी हो गई जहां से मैं अब मामा मामी को पूरे तरह से देख सकती थी पर मामा को देखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती।
उस रूम में शाम में ही कोयले की अंगीठी जला कर रख दी गई थी, वह कमरा एकदम गर्म था। और थोड़ी रोशनी भी हो रही थी.
मामा ने रजाई को हटा दी थी, जब मैं पहुँची उस समय मामा लुंगी और गंजी में थे तो मामी के बदन पर साड़ी नहीं थी, वो केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी।

मामा मामी अगल भागल लेटे हुए थे, माम मामी के होंठों को चूस रहे थे, प्रत्युत्तर में मामी मामा के होंठ को काट रही थी, दोनों एक दूसरे की जीभ को चूस रहे थे। मामा मामी की गर्दन पर एक गहरा चुम्मा लेते हुए कान के नीचे वाले लब को चूसने लगे तो मामी चिहुँक कर मामा में और तेजी से चिपक गई और अपने एक हाथ से अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी. ब्लाउज उतारने के बाद मामी मात्र ब्रा में थी, मामा ब्रा के ऊपर से मामी की चुची को मसल रहे थे, साथ ही साथ कभी कभी दोनों चूचियों को थपिया भी रहे थे।

मामी धीरे धीरे ज्यादा गर्म होने लगी थी तथा धीरे धीरे सीत्कार कर रही थी। ऊँ…आँ… की सीत्कारों से पूरा कमरा गूँज रहा था। धीरे से पीछे से ब्रा का हुक भी खोल दिया। मामी की दोनों उन्नत चूचियाँ आजाद हो चुकी थी, चूचियों के ऊपर के दाने तन कर खड़े हो गये थे। मामा ने अपनी जीभ से चूचियों को चाटना शुरु कर दिया, कोशिश कर रहे थे कि दानों के पास पहुँच कर फिर वापस अगल बगल से चाटना शुरु कर देते, निप्पल को नहीं चूसते… मामी हर बार तड़प कर ऐंठ जाती थी।

अंत में मामी ने ही मामा का सिर खींच कर अपने चूची के दानों के ऊपर रखवाया और अपने निप्पल चुसवाने लगी। चूची चूसते चूसते मामा ने मामी की बाजू उठा कर उनकी कांख में एक चुम्मी ली तो मामी को गुदगुदी होने लगी और हँसने लगी और अपनी बाजू को जल्दी से मोड़ लिया, अपनी दोनों पहाड़ियों को दोनों हथेली से ढक लिया।
मामा बोले- कोई बात नहीं, पहाड़ी न सही तो छोटी खाई ही सही।
मैं सोच कर परेशान हो गई कि यह छोटी खाई क्या होती है?
फिर देखा कि वो मामी की नाभि के चारों तरफ अपने जीभ से चुभला रहे हैं। मामी के पेट में लहरें सी उठ रही थी, उनका पेट हिलता हुआ दिखाई दे रहा था, और उनका ऊँ-आँ ऊँ-आँ और तेज होता जा रहा था।

तभी मामा ने उठ कर मामी का पेटीकोट के साथ पैंटी भी एक साथ उतार दी, उसी समय मामी ने मामा का लुंगी खींच कर अलग कर दी। मामा का लौड़ा हर दिल अजीज लड़कियों के लिए परफेक्ट था।
मध्यम आकार का न ज्यादा बड़ा न ज्यादा मोटा कि कोई औरत देख कर ही डर जाए।

दोनों 69 की पोजिशन में आ गए, मामी अपने एक हाथ में मामा का लंड पकड़ कर ऊपर नीचे कर रही थी तो दूसरे हाथ से मामा के चूची के दानों को मसलने लगी। मामा भी सीत्कार करने लगे। मामा ने अपने जीभ से मामी की चूत की फांक को अलग करते हुए लंड को चूसना शुरु कर या, हर एक स्ट्रोक के साथ मामी भी मामा के लंड पर अपने होंठों से रगड़ रही थी।

इधर मैं भी गर्म हो गई थी, मेरी बुर का रस रिस रिस कर पूरे पैंटी को भिगो दिया। मेरा एक हाथ स्वतः सलवार के भीतर होते हुए बुर को सहलाने लगा था, मेरा दूसरा हाथ चूची मलने लगा था।
उसी समय मामी का दिया हुआ प्रेजेन्ट मेरे हाथों में आ गया, मैंने देखा कि वो रबड़ का केला जैसा कुछ था। अरे यह तो रबड़ का लंड था। मामा के लंड से थोड़ा छोटा था… पर मुझे लगा कि मेरे बुर के लिए मनमाफिक।

मामी जानती थी कि उनकी चुदाई देखते हुए मेरी बुर पनिया जाएगी तो बुर में घुसाने के लिए कुछ चाहिए, मैंने दिल से मामी को धन्यवाद दिया कि मामी मेरा कितना ख्याल रखती हैं।

अब मामा ने मामी की चूत चाटनी छोड़ दी और उन्होंने मामी की जांघों को चूमना शुरु कर दिया. मामी का शरीर ऐंठ रहा था, गुदगुदी और मादकता की तरंग एक साथ मामी महसूस कर रही थी।

मामा अब सीधा होकर आक्रमण करने की पोजिशन में आ गए थे, मामी ने अब मामा की गंजी अलग कर दी, मामी मामा के दोनों निप्पलों को मसलने लगी थी, मामा का ध्यान भटका रही थी। मामा ने मामी की चूत के द्वार पर लंड टिका कर पहला शॉट मारा तो मामी अपनी जांघें कस ली, मामा का पहला शॉट आधा सफर ही तय कर पाया और मामी हँस दी और मामा की दोनों चूचियों को ऐंठ दिया.
मामा दर्द से कराह उठे पर चुदाई में दर्द का अपना मजा होता है, है न?

मामी काफी गर्म हो चुकी थी, अब ज्यादा रोक पाने की शक्ति नहीं थी, पर मामा का पुरुषत्व बार बार चोटिल हो रहा था तो इस बार मामा ने पूरी शक्ति के साथ आक्रमण किया, मामा का पूरा लंड फच्चाक से धड़धड़ाते हुए अंदर चला गया और जोर से चट की आवाज आई।

मैं भी धीरे से नकली लंड को अपने बीस साला बुर में डालने लगी, पहले तो वो अंदर ही नहीं गया, फिर उस पर ढेर सारा थूक लगा कर फिर से कोशिश करने लगी, थोड़ी रुकावट के बाद वह अंदर चला गया पर दर्द के मारे मेरी आँखों से आँसू झलक पड़े। कुछ देर हिला दुला कर एडजस्ट करने के बाद मैं उस नकली लंड को आधा ही भीतर बाहर करने लगी और दूसरे हाथ से मैं अपनी चूची मल रही थी।
बुर के रस से रबड़ का लंड गीला होने लगा तो फचाफच अंदर बाहर होने लगा। मुझे हलके दर्द के साथ कुछ रोमांच सा हो रहा था, कुछ मजा सा आ रहा था.

उधर मेरे मामा भी फुल स्पीड से मेरी मामी की चुदाई कर रहे थे। लगातार फच्च फच्च की आवाज गूँज रही थी, लग रहा था कि मामी को खूब मजा आ रहा था, उनकी ऊँ-आँ ऊँ-आँ लगातार जारी था। मामा की भी उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकल रही थी.

एकाएक मामा रुक गए तो मामी अचकचा कर सवाल भरे नजरों से उनकी ओर देखने लगी तो मामा मुस्कुराए और मामी को पलट कर कुतिया बनाया और उनके पीछे आकर पीछे से चूत में लंड घुसा कर चोदना शुरु कर दिया, झुक कर दोनों चूचियों को पीछे से पकड़ कर मसलते रहे।

अजब सा माहौल बना हुआ था वहां, मामा मामी का चूत रस तथा लंड रस मिल कर दही जैसा पदार्थ बूंद बूंद चू रहा था। मामा कभी कभी उसे लेकर मामी के गांड पर लेप रहे थे और धीरे से मामा ने अपनी दो अंगुली उनकी गांड में घुसा दी, मामी के दोनों प्रवेश द्वार से अंदर बाहर हो रहा था, दोनों के मुँह पर तरह तरह के भाव आ जा रहे थे।
मामी अकड़ने लगी थी, साथ ही मामा स्पीड फुल स्पीड में थे, मामा झड़ने लगे थे, रुक रुक कर उनका फव्वारा मामी की खाई खेली चूत में समा रहा था.
उसी समय मामी ने भी अपना रस छोड़ दिया।

इधर मैंने भी अपने रस से नकली लंड को भिगो दिया.

फिर मैं चुपके से पैर दबा कर अपने बिस्तर पर आने लगी कि पैर से एक बर्तन से टकरा गया। मामा चौंक कर देखने लगे, मामी नजाकत को संभालते हुए बोली- लेट जाईए, बिल्ली होगी।
मैं कांप उठी थी।

सुबह मामी मुझसे बोली- तो मेरी बिल्ली रानी, रात में मेरा दिया तोहफा तुम्हारे कुछ काम आया?
मैंने भी मामी का आभार माना और गले में लिपटते हुए एक गहरा चुम्बन प्रदान कर दिया. मामी मुस्कुरा दी।

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