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“भाई ने मेरी कुवारी चुत चोदी बचपन में”

मैं पठानकोट की रहनें वाली हूँ और सांवली लेकिन भरे फ़ूले शरीर की मालकिन हूँ| मैं एक अच्छे खाते पीते परिवार की लड़की हूँ| मेरे पापा बहुत बड़े सरकारी अफसर हैं| मेरी मां एक पढ़ी:-लिखी और फ़ेशनेंब्ल स्त्री हैं| वहीं मेरे पापा बहुत ही शरीफ़ और इमानदार अफ़सर है| मेरा भाई विदेश में रहता है|
मेरे भाई का एक दोस्त था| जिसका एक छोटा भाई था जिसका नाम अंकित  था| अंकित अपनें भाई के साथ कई बार हमारे घर आया करता था| मुझे अंकित शुरु से ही बहुत पसन्द था| धीरे धीरे वो भी मुझे पसन्द करनें लगा था|
अब वो अपनें भाई के बिना भी हमारे घर आनें लगा था| हम दोनों अक्सर मोबाईल पे बातें किया करते थे| अब हमारी बातें प्रेमियों की तरह होनें लगी थी| वो हमारे घर किसी ना किसी बहानें से आ ही जाता था| घर वाले उसके इस तरह घर आनें पे शक भी नहीं करते थे|

इस तरह एक साल बीत गया और अब तक मुझे भी दोस्ती और प्यार में फ़र्क पता चल गया था| मेरे मन में भी अंकित को लेकर कई तरह के खयाल आनें शुरु हो गये थे|

अब हम मोबाइल पर एक दूसरे का चुम्बन आदि करनें लगे थे| इसी तरह अंकित नें मिलनें पर भी चुम्बन मांगना शुरु कर दिया लेकिन मैं उसे मना कर देती थी|
लेकिन मैं उसको इस तरह ज्यादा दिन मना नहीं कर पाई और एक दिन वो मुझे पढ़ानें के बहानें मेरे घर आया| मेरी माँ अपनें कमरे में टी वी देख रही थी| उस वक्त उसनें मुझे अचानक कन्धों से पकड़ लिया और मुझे चुम्मा देनें के लिये कहनें लगा|
इस बार मैं उसको मना नहीं कर पाई और उसनें माँ के आ जानें के डर से मुझे धीरे से एक बार चूम कर छोड़ दिया| कुछ ही देर बाद वो वापिस अपनें घर चला गया|
उस रात मैं बेसब्री से उसके फोन का इन्तजार कर रही थी कि ग्यारह बजे के करीब उसका फोन आया| मैं बहुत खुश थी|

उसनें मुझे पूछा:- तुम्हें चुम्बन में मजा आया?

तो मैंनें अपनें दिल का हाल उसे बता दिया|
उस दिन उसनें मेरे साथ फोन सेक्स भी किया| मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थी| मेरा दिल चाह रहा था कि अंकित अभी आ जाये और मुझे अपनी बाहों में भर के वो सब कुछ कर डाले जो फोन पे कह रहा था|
अब हम मिलते तो चुम्बन तो आम हो गया था अब अंकित बेझिझक मेरे शरीर पर जहाँ चाहता हाथ फ़ेरता था| हमनें घर से बाहर रेस्टोरेन्ट में भी मिलना शुरू कर दिया था| वहाँ अंकित बेझिझक मेज़ के नीचे मेरी स्कर्ट के अन्दर मेरी जांघों पर हाथ फ़ेरता था कभी मौका पा के शर्ट के उपर से ही मेरे स्तनों को सहला देता था|
ये सब मुझे बहुत अच्छा लगता था| घर पे मैं अपनें भैया का कम्प्यूटर ही प्रयोग करती थी जिस में मैं कई बार ब्लू:-फ़िल्म देखा करती थी| अब मुझे इस सबकी अच्छी तरह समझ आ चुकी थी| मैं मन ही मन ना जानें कितनी बार अंकित के साथ सम्भोगग कर चुकी थी| इस बीच मेरे पापा का तबादला कहीं और हो गया लेकिन मेरी पढ़ाई की वजह से मुझे और मेरी माँ को पठानकोट में ही रुकना पड़ा|
इसी बीच एक बार हमारा एसी खराब हो गया और पापा नें जहाँ से एसी लिया था वहाँ फोन से शिकायत लिखवा दी| उस दिन रविवार था और वो शोरूम बन्द था इसलिए शोरूम के मालिक जो हमारे घर के पास ही रहते थे का बेटा खुद एसी चेक करनें हमारे घर आ गया|
उनके परिवार से हमारे बहुत अच्छे पारिवारिक सम्बंध थे| अक्सर हमारे घर आते जाते रहते थे| उनका नाम रोहण था| मैं उनको रोहण भैया कहती थी| वो करीब 27:-28 साल के होंगे| उन्होंनें थोड़ी ही देर में एसी ठीक कर दिया| माँ नें उन्हें कोल्ड ड्रिंक वगैरह पिलाई और कुछ देर बातें करनें के बाद वो चले गये|
लेकिन इसके बाद उनका हमारे घर आना जाना बढ़ गया| अकसर माँ उनसे फोन पे बातें करती रहती थी जो मुझे अच्छा नहीं लगता था| हम शनिवार और रविवार को पापा के पास चले जाया करते थे या पापा यहाँ आ जाया करते थे और घर की चाबियाँ रोहण भैया के पास ही रहती थी| दूसरी चाबी हमारे पास होती थी|
एक बार माँ किट्टी:-पार्टी पे जा रही थी| जब माँ जा रही थी तो रोहण भैया भी बाहर खड़े थे| माँ नें उन्हें मेरा ध्यान रखनें को बोला और चली गई|
माँ के घर से बाहर जाते ही मैंनें अंकित को फोन कर दिया तो अंकित नें घर पे मिलनें की जिद करनी शुरु कर दी| मन तो मेरा भी बहुत कर रहा था अंकित को अकेले में मिलनें का| मैंनें माँ को फोन करके अपनी सहेली के घर जानें का पूछा| माँ नें कह दिया कि मैं 3:-4 घंटे में वापिस आ जाउँगी उससे पहले वापिस आ जाना|
मैंनें अंकित को फोन किया और घर बुला लिया| मैं भी बहुत खुश थी कि आज अंकित के साथ जो अपनें सपनों में होते देखा था आज हकीक़त में उसका मजा लूँगी|
इसी बीच अंकित आ गया| अंकित को अन्दर बुला कर मैंनें जल्दी से बाहर वाले दरवाज़े को लॉक कर लिया| मैंनें उस समय आसमानी रंग की स्कर्ट और सफ़ेद रंग का टोप पहना हुआ था| अंकित नें मुझे वहीं से अपनी बाहों में उठा लिया और बेडरूम में ले गया|
वो कुछ ज्यादा ही जल्दी में लग रहा था| मैंनें उसे कहा:- माँ नें 3:-4 घंटे बाद वापिस आना है| पहले कुछ खा पी तो लो!
लेकिन वो कहनें लगा:- एक शिफ़्ट हो जाये उसके बाद देखेंगे खाना पीना!
कुछ ही पलों में मैं सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी| उस समय मैं 30 नम्बर की ब्रा पहनती थी जोकि उम्र के हिसाब से कहीं बड़ा था| अब मैं भी आपा खो चुकी थी मैंनें जल्दी से अंकित की टी:-शर्ट उतार दी और उसकी पैंट की जिप खोलनें लगी| उसनें मेरी ब्रा की हुक खोल दी और मेरे मम्मों को बाहर निकाल के चूसना शुरु कर दिया| मैंनें भी अंकित का लण्ड बाहर निकाल के उसको हाथों से सहलना शुरु कर दिया|
अब अंकित के हाथ भी चल रहे थे| वो मुँह से मेरे मम्मों को चूस रहा था और हाथों से मेरी पेंटी उतार रहा था| मैं अंकित के सामनें बिल्कुल नंगी थी| अंकित मेरे मम्मे चूसता हुआ अपनी एक उंगली को धीरे धीरे मेरी फ़ुद्दी (चूत) में घुसानें की कोशिश कर रहा था| उसकी इस कोशिश की वजह से मैं आपे से बाहर हो गई और अंकित को अपना लण्ड मेरी फ़ुद्दी (चूत) में डालनें को कहनें लगी|
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अंकित नें भी मौके की नजाकत को समझा और मुझे बेड पे पीठ के बल लेट जानें को बोला| मैंनें वैसा ही किया|
अब अंकित मेरी दोनों टांगों के बीच में था| उसनें कहा:- अपनी दोनों टांगों को फ़ैलाओ!
मैंनें वैसा ही किया| अंकित नें मेरी टांगों को उठा के अपनें कन्धों पर रख लिया और धीरे से अपना लण्ड मेरी फ़ुद्दी पे रख दिया| यह मेरी और अंकित दोनों की ही पहली चुदाई थी| अंकित नें अपना लण्ड मेरी फ़ुद्दी पे रख के दबाव बढ़ाना शुरु किया| लण्ड थोड़ा सा अन्दर गया और फ़िसल कर बाहर आ गया| इस तरह एक दो बार हुआ तो अंकित खुद पे कन्ट्रोल नहीं कर पाया और इतनें में ही स्खलित हो गया|
इतनें में दरवाजे पर आहट हुई और कोई अन्दर आया| हम दोनों के होश उड़ गये| वो और कोई नहीं रोहण भैया थे| अंकित उठ कर भागनें लगा तो भैया नें उस्को पकड़ लिया| हमनें भैया से बहुत मिन्नतें की लेकिन भैया नें अंकित को उसी बेडरूम में बन्द कर दिया और मुझे खींच कर दूसरे कमरे में ले गये|
मैंनें सोचा:- कैसी मुसीबत में फ़न्स गये? किया भी कुछ नहीं और पकड़े भी गये!
लेकिन भैया का मूड़ कुछ और ही था| या फ़िर मेरा नंगा जिस्म देख के उनके होश उड़ गये थे|
उन्होंनें मुझे सीधा ही बोल दिया:- अगर तुम बदनामी और अपनी माँ से बचना चाहती हो तो तुम्हें मुझसे चुदना होगा|
मेरे पास और कोई चारा भी नहीं था और वैसे भी मैं अभी चुदी कहाँ थी लण्ड का स्वाद चखनें से पहले ही पकड़ी गई थी| रोहण की बात मैं मान गई| लेकिन मैंनें रोहण भैया को पहले अंकित को छोड़नें के लिये बोला| भैया मान गये लेकिन उन्होंनें पहले मुझे इसी हालत में फोटो खिंचवानें के लिये बोला ताकि मैं अपनी बात से मुकर ना जाऊँ! लेकिन मैं तो खुद ही तैयार थी इसलिये मैं झट से मान गई|
भैया नें जल्दी से अपना मोबाईल निकाला और मेरे नग्न शरीर की 6:-7 तस्वीरें खींची और मुझे कपड़े पहननें को बोल दिया और अंकित को डरा धमका कर घर से भगा दिया|
अंकित के जानें के बाद मैं झट से किचन में गई और रोहण भैया के लिये फ़्रिज से कोल्ड ड्रिन्क ले आई| भैया नें एक दो घून्ट ही कोल्ड ड्रिन्क पी और मुझे बेडरूम में आनें का इशारा करके मेरे आगे आगे चल पड़े| बेडरूम में पहुँचते ही उन्होंनें मुझे अपनी बाहों में उठा कर बेड पे लिटा दिया|
भैया नें जल्दी से बिना वक्त गंवाए मेरे कपड़े उतारनें शुरु कर दिये| देखते ही देखते एक मिनट से भी पहले मैं भैया के सामनें नग्न लेटी हुई थी|
अब भैया मेरे सामनें खुद के भी कपड़े निकालनें लगे| भैया सिर्फ़ अन्डरवियर में मेरे सामनें खड़े थे| अन्डरवियर में से उनका लण्ड थोड़ा उभरा हुआ सा नजर आ रहा था| लेकिन भैया नें अपना अन्डरवियर भी निकाल दिया और हम दोनों अब निर्वस्त्र थे| भैया का लण्ड देख के मेरे तो होश ही उड़ गये| रोहण भैया का लण्ड मेरे अनुमान से बहुत ज्यादा बड़ा था|
भैया नें कहा:- तुम सिर्फ़ मेरी वजह से चुदना चाहती हो या मजा लेना चाहती हो?
मैंनें बेझिझक बोल दिया:- मैं मजा लेना चाहती हूँ|
तो भैया की आँखों में अजीब सी खुशी नजर आई मुझे| मैं बेड पर बैठी थी और रोहण भैया मेरे सामनें खड़े थे| रोहण नें कहा:- मेरा लण्ड अपनें मुँह में ले लो और इसको लॉलीपॉप की तरह चूसो!
मैं वैसा ही करनें लगी| तीन चार मिनट तक यूँ ही मैं उनका लण्ड चूसती रही| रोहण भैया का लगभग नौ इंच का लण्ड अपनें पूरे आकार में तन गया था| जिससे मुझे लण्ड को पूरा मुँह में लेनें में परेशानी हो रही थी| तभी भैया नें अपना लण्ड मेरे मुँह में से बाहर निकाल लिया|
अब भैया नें मेरे मम्मों को अपनें हाथों में संभाल लिया| वे उन्हें बड़े प्यार से सहलानें लगे वह कभी मेरे स्तनों को तो कभी गहरे गुलाबी रंग के चुचूकों को चुटकियों से मसल रहे थे| मुझे इस सब में बहुत मजा आ रहा था|
भैया नें मम्मे चूसते चूसते अपनी एक उंगली को धीरे धीरे मेरी फ़ुद्दी में घुसा दिया| मैं अब आपा खो चुकी थी| रोहण भैया अब अपनी जीभ से मेरी फ़ुद्दी चाटनें लगे थे| मेरे शरीर में बिजलियाँ दौड़नें लगी थी| मैं कामुक स्वर में बोली:- रोहण! अब देर मत करो प्लीज़…
इतना सुनते ही भैया नें मेरी फ़ुद्दी में ढेर सारा थूक लगाया और अपनें मोटे लण्ड के मुँह को मेरी फ़ुद्दी के मुँह पर रख कर धक्का मारा| मुझे बहुत दर्द महसूस हुआ लेकिन कुंवारी फ़ुद्दी होनें के कारण रोहण का लण्ड भी अंकित की तरह फिसल जानें के कारण ज्यादा दर्द नहीं सहना पड़ा|
पर रोहण भैया तो पक्के शिकारी थे| उन्होंनें मेरे होंठों पर अपनें होंठ रख दिए और अपनें हाथों से मेरी जाँघों को थोड़ा और फ़ैला दिया और लिंग:-मुंड को फिर से फंसा कर दोबारा कोशिश करनें लगे|
भैया नें इस बार हल्का सा धक्का दिया| लिंग:-मुंड मेरी फ़ुद्दी को लगभग फाड़ते हुए अन्दर घुस गया| दर्द के मारे मेरी चीख निकल गई… आ ई ई ई ऊई मां मर गई मैं तो… प्लीज… निकालो इसे…
मैं इतना ही कह पाई थी कि रोहण नें थोड़ा पीछे हट कर एक धक्का और मारा!

मैं बुरी तरह चीखी:- उफ… आई… मां प्लीज…भैया प्लीज ओह…
और दर्द के मारे मैं आगे कुछ नहीं कह पाई और अपनें सिर को बेड से सटा लिया| मेरी आँखों में पानी आ गया था|

भैया नें कहा:- बस एक दो इंच बचा है…अगर कहो तो डाल दूँ?
मैंनें कहा:-…अब इतना दर्द नहीं है… भैया…अगर एक दो इंच ही रह गया है तो डाल दो… मैं झेल लूंगी…
लेकिन भैया झूठ बोल रहे थे| लण्ड अभी आधा बाहर ही था| भैया नें लण्ड को दो तीन इंच पीछे खीच कर एक जोर का धक्का मारा| मेरा मुँह बेड पर घिसटता हुआ सा आगे सरक गया| मुझे लगा जैसे किसी नें कोई तेज़ तलवार मेरी फ़ुद्दी में घुसा दी हो| मेरे हलक से मर्मांतक चीख निकली| मेरा हाथ मेरी फ़ुद्दी पर पहुँच गया| हाथ चिपचिपे से द्रव्य से सन गया|
मैंनें हाथ को आँखों के सामनें ला कर देखा तो और डर गई| अंगुलियाँ खून से लाल थी| उफ…मेरी फ़ुद्दी तो जख्मी हो गई…अब क्या होगा…उफ निकालिए इसे… मैं रोती हुई कह रही थी| भैया मैं मर जाऊँगी|
भैया नें मेरे मम्मे मसलते हुए कहा:- यह तो थोड़ी सी ब्लीडिंग योनि:-पट फटनें से होती है… अब तुम्हें सिर्फ़ मजा ही मजा आएगा|
उनकी बात सच ही थी:- धीरे धीरे मेरा दर्द आनन्द में बदलनें लगा था| भैया अब थोड़ा जल्दी जल्दी अपनें लंबे लण्ड को अन्दर:-बाहर करनें लगे| मैं बुरी तरह कांपनें लगी थी| मेरे मुँह से कामुक आवाजें फ़ूट रही थी| अब मुझे बहुत मजा आनें लगा था| मैंनें कहा:- भैया! ज़रा जोर:-जोर से कीजिये! उफ…उफ…! मैं टूटे शब्दों में बोली|
भैया नें रफ़्तार बढ़ा दी| मेरी सिसकारियाँ और भी कामुक हो गई| वो जैसे निर्दयी हो गए थे| फ़च फ़च की आवाज़ सारे कमरे में गूँज रही थी| उत्तेजना में मैंनें भैया की पीठ को नोचना शुरु कर दिया था| उसनें मेरे स्तनों को और मेरे लबों को चूसना शुरु कर दिया|
मैं हुच.. हुच. की आवाजों के साथ बिस्तर पर रगड़ खा रही थी| रोहण भैया अपनें पूरे जोश में थे| वह मेरे मम्मों को सहलाते तो कभी मेरे चुचूक को मसलते हुए आगे पीछे हो रहे थे|
अब उनकी गति में और तेजी आ गई| मैं दांतों तले होंठों को दबाये उनके लिंग द्वारा प्राप्त आनन्द के सागर में हिलोरें ले रही थी| अब भैया चित्त लेट गए और मुझे अपनें लण्ड पर बिठा लिया मैं स्वयं ऊपर नीचे होनें लगी| एसी चालू होनें के बावजूद हम दोनों को पसीना आ गया था|
अचानक भैया का तेवर बदला और उन्होंनें बैठ कर मुझे फिर पीठ के बल लिटा दिया और मेरी फ़ुद्दी में अपना लण्ड डाल कर जोर जोर से धक्के मारनें लगे| मैं अपनें चरम पर आ चुकी थी| अचानक उन्होंनें अपना लिंग मेरी योनि से निकाल लिया और मेरे मुँह में डालकर जोर जोर से धक्के मारे और फिर मेरे सर को थाम कर ढेर से होते चले गए| वह मेरे मुख में ही स्खलित हो गए|
मैंनें उनके लिंग को छोड़ा नहीं बल्कि उसे चूस चूस कर दोबारा उत्तेजित करनें लगी| रोहण भैया नें मेरे मम्मों से खेलना शुरू कर दिया और बोले:- क्यों? कैसा रहा…?
बहुत मजा आया भैया!… लेकिन मेरी फ़ुद्दी तो जैसे सुन्न हो गई है… मैंनें उनकी पीठ को सहलाते हुए कहा|
यह सुन्नपन तो ख़त्म हो जायेगा थोड़ी देर में| पहली बार में तो थोड़ा कष्ट उठाना ही पड़ता है| अब तुम अगली बार देखना इतनी परेशानी नहीं होगी बल्कि सिर्फ मजा आएगा| भैया नें मेरे स्तन को चूसते हुए कहा|
‘उफ भैया… इन्हें आप चूसते हैं तो कैसी घंटियाँ सी बजती है मेरे शरीर में!… प्लीज भैया चूसिये इन्हें!’ मैं कामुक तरंग में खेलती हुई बोली|
अच्छा लो! कह कर रोहण भैया मेरे गहरे गुलाबी रंग के निप्पलों को बारी बारी चूसनें लगे| मैं आनन्दित होनें लगी|
मैंनें भैया से पूछा:- आपनें पहले किसी को चोदा है?

‘हाँ चोदा है लेकिन इससे पहले मैंनें 20 साल से कम उम्र की किसी लड़की को कभी नहीं चोदा|’
उस दिन माँ के आनें से पहले भैया नें मुझे एक बार और चोदा| इस चुदाई के एक सप्ताह तक मुझे पेशाब करते वक्त पेशाब वाली जगह पे बहुत जलन होती रही| अब यह सिलसिला लगातार चल रहा है|

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