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पड़ोस के लड़के ने मेरी चुत चुदाई की

फ्रेंड्स! मेरा नाम नीता है! घर पर मुझे प्यार से सभी सोनी बुलाते हैं| मैं दिल्ली में रहती हूँ और एमबीए की पढ़ाई कर रही हूँ| मैं अभी 24 साल की हूँ| मेरे पापा एक अकाउंटेंट हैं और मॉम हाउस वाइफ हैं| मैं अन्तर्वासना की दैनिक पाठिका हूँ! मुझे इसके बारे में मेरी एक फ्रेंड अंजलि नेंं मुझे बताया था|
तो दोस्तो मैंनेंं भी सोचा कि क्यों ना मैं भी अपनी सेक्स स्टोरी आपके साथ शेयर करूँ| तो चलिए दोस्तो मैं अपनी सेक्स स्टोरी पर आती हूँ|
सबसे पहले मैं आपको अपनेंं बारे में बता दूँ कि मेरा बदन और मेरा फिगर काफ़ी सेक्सी और हॉट है! जो भी मुझे देखता है|| बस देखता ही रह जाता है|

मेरे चूचे 34 इंच के एकदम तनेंं हुए हैं और मेरी कमर 28 इंच की है| मेरे चूतड़ों का नाप 36 इंच का है|| जब मैं चलती हूँ तो लोग मुझे पीछे से मेरी गांड को बहुत ही सेक्सी निगाहों से ऐसे घूर-घूर कर देखते हैं|| जैसे वो मेरा अभी रेप कर देंगे| ये सब देख कर मुझे गुस्सा तो बहुत आता है! पर इसमें उनकी भी ग़लती क्या है| जब इतना सेक्सी और हॉट माल जा रहा हो|| तो किसी की भी निगाहें क्यों नहीं फिसलेंगी|
दोस्तो! ये बात तब की है! जब मैं बीबीए के फर्स्ट ईयर में पढ़ती थी| मेरे पड़ोस में एक लड़का रेंट पर नया-नया ही आया था! उसका नाम मखनचु था और वो दिखनेंं में काफ़ी हैंडसम था|
एक दिन मैं अपनेंं कपड़े सुखानेंं के लिए अपनी छत पर गई तो वो भी अपनी छत पर ही अकेले खड़ा फोन पर बात कर रहा था| मैं जब अपनेंं कपड़े सुखानेंं के लिए हैंगर पर डाल रही थी! तो वो मुझे बहुत घूर कर देख रहा था|
मैंनेंं उसे देखा कि वो मेरी चूचियों को देख रहा है! मैंनेंं अपनेंं दुपट्टे से अपनेंं मम्मों को ढक लिया और उस पर ध्यान नहीं दिया और मैं नीचे अपनेंं कमरे में आ गई|
उसके बाद मुझे कॉलेज जाना था तो मैं रेडी होनेंं लगी और कॉलेज के लिए निकल पड़ी| रास्ते में मैंनेंं देखा कि मखनचु अपनी बाइक से जा रहा था| वो मुझे देख कर थोड़ा आगे जाकर रुक गया और मेरा वेट करनेंं लगा|
जब मैं उसके पास से निकल रही थी तो उसनेंं मुझे कहा- हैलो|| एक्सक्यूज मी||

मैंनेंं कहा- जी बोलिए?

तो उसनेंं कहा- मैं आपके पड़ोस में ही रहता हूँ! रेंट पर|| अभी नया ही आया हूँ| क्या मैं आपको कुछ दूर तक ड्रॉप कर दूँ?

मैंनेंं कहा- नहीं! मैं चली जाऊंगी|
तो उसनेंं काफ़ी फोर्स किया- मैं आपको कुछ करूँगा नहीं|| डरो मत|

मैंनेंं कहा- मतलब क्या है आपका?

उसनेंं कहा- कुछ आप डर सी रही हो|| ऐसा क्यों||? प्लीज़ आओ ना! अगर आप साथ चल लोगी तो दूरी का पता भी नहीं चलेगा|
उसके इतना फोर्स करनेंं की वजह से मैं उसके साथ बाइक पर बैठ गई|
उसनेंं बाइक आगे बढ़ाते हुए मुझसे पूछा- आपका नाम क्या है|| और कहाँ जा रही हो?

मैंनेंं बताया- मेरा नाम नीता है और मैं कॉलेज जा रही हूँ|

मखनचु नेंं कहा- अरे वाह मैं भी कॉलेज जा रहा हूँ| आपका कॉलेज कहाँ है?

मैंनेंं कॉलेज का नाम बताया|
मखनचु नेंं कहा- मैं भी दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ता हूँ| हमारा कॉलेज तो पास-पास में ही है| अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें रोज ड्रॉप कर दिया करूँगा|

मखनचु बाइक काफ़ी तेज चला रहा था! मुझे डर लग रहा था| कई बार वो ब्रेक लगाता तो मेरे चूचे उसकी पीठ से लग जाते|
मैं महसूस कर रही थी कि मखनचु इसे काफ़ी एंजाय कर रहा है| हमारी रास्ते में काफ़ी बातें हुईं और मेरा कॉलेज आ गया| मैं अपनेंं कॉलेज के गेट से अन्दर जानेंं लगी! तभी मखनचु नेंं मुझे आवाज़ दी|

मैंनेंं घूम कर उसे देखा तो उसनेंं कहा- मैं शाम को आऊंगा! साथ में घर चलेंगे|

मैंनेंं कहा- ठीक है|

तो मखनचु नेंं कहा- अपना मोबाइल नंबर तो दे दो! मैं तुम्हें कॉल कर लूँगा|

मैंनेंं उसे अपना नंबर दे दिया और कॉलेज के अन्दर चली गई|
उस दिन उसनेंं मुझे कई रोमाँटिक मैसेज किए और कॉल भी किया| शाम को उसनेंं मेरे कॉलेज के बाहर आकर मुझे कॉल किया और बोला- हेए नीता|| कहाँ हो यार|| मैं तुम्हारे कॉलेज के बाहर तुम्हारा वेट कर रहा हूँ|

मैंनेंं कहा- बस मैं आ रही हूँ|| थोड़ा और वेट करो|

‘ओके मैडम जी वेट करता हूँ|’
उसके बाद हम साथ में घर आनेंं लगे| मैं उसके बाइक पर बैठी थी और वही सिलसिला फिर शुरू हो गया| मेरे चूचे उसकी कामोत्तेजना को बढ़ा रहे थे|
रास्ते में उसनेंं बाइक एक रेस्तरां के सामनेंं रोकी और कहा- चलो यार कुछ खा लेते हैं| मैंनेंं मना किया|| पर उसनेंं मेरा हाथ पकड़ कर कहा- चलो ना यार||

तो मैं मान गई और हम दोनों नेंं साथ में डिनर किया और फिर घर आ गए|
अब ये सिलसिला रोज चलनेंं लगा था! वो मुझे कॉलेज छोड़ता और रोज लाता था| हम दोनों एक-दूसरे के साथ काफ़ी घुल-मिल गए थे और अच्छे दोस्त बन गए थे| वो मुझे कभी-कभी मज़ाक-मज़ाक में गालों पर किस भी कर लिया करता था| वो कहता कि ये सब दोस्ती में चलता है| मुझे भी वो अच्छा लगनेंं लगा था|
फिर 2-3 महीनों में उसनेंं हमारे घर से अच्छे रिलेशन बना लिए थे और हमारे घर कभी भी आ जाया करता था| पापा और उसकी काफ़ी अच्छी बननेंं लगी थी|
एक दिन हमारी पूरी फैमिली को 2-3 दिनों के लिए एक शादी में जाना था! पर मैंनेंं मॉम से मना कर दिया कि मैं नहीं जा पाऊंगी! मेरे एग्जाम पास में है और मुझे कई सारे नोट्स भी तैयार करनेंं हैं|
इसके बाद मेरी पूरी फैमिली शाम को चली गई| अब मैं अपनेंं घर में अकेली थी|| और काफ़ी बोर हो रही थी|

तभी मखनचु का कॉल आया! मैंनेंं कॉल पिक किया| मखनचु नेंं कहा- हेए नीता बेबी|| क्या हो रहा है? आज तो तुम्हारी फैमिली बाहर गई है|| बोर हो रही होगी?

मैंनेंं कहा- हाँ थोड़ा बोर तो हो रही हूँ|

तो उसनेंं कहा- मैं आ जाऊं|| साथ बैठकर चैस खेलेंगे|

मैंनेंं कहा- ठीक है आ जाओ|
दोस्तो मैं आपको बता दूँ कि मुझे शतरंज बहुत पसंद है|
थोड़ी देर के बाद दरवाजे की वेल बजी और मैंनेंं दरवाजा खोला तो मखनचु सामनेंं था| मखनचु नेंं ट्राउज़र और टी-शर्ट पहनी थी| मैंनेंं भी उस दिन जीन्स और टॉप पहना था| वो मुझे आँख मारते हुए अन्दर आया| मैंनेंं दरवाजा बंद किया और चैस खेलनेंं बैठ गए| एक गेम खेलनेंं के बाद मखनचु नेंं कहा- यार मुझे प्यास लगी है! थोड़ा पानी मिलेगा|

मैंनेंं कहा- मैं अभी लाती हूँ|
मैं किचन की ओर चली गई! मैं रेफ्रिजरेटर से पानी की बॉटल निकालनेंं के लिए थोड़ा सा झुकी ही थी कि तभी किसी नेंं मुझे पीछे से जोर से पकड़ लिया| मैं तेज से चिल्लाई! लेकिन उसनेंं मेरा मुँह अपनेंं हाथों से बंद कर दिया| मैं अपनेंं आपको छुड़ानेंं लगी| मैंनेंं पीछे देखा तो वो कोई और नहीं मखनचु था|
मखनचु नेंं कहा- चिल्लाओ मत मेरी जान|| चुप रहो कोई सुन लेगा तो तुम्हें ही प्राब्लम होगी|

मखनचु नेंं मेरे मुँह से हाथ हटाया! मैंनेंं मखनचु से कहा- मखनचु ये तुम क्या कर रहे हो|| छोड़ो मुझे?

उसनेंं कहा- नीता मैं तुमसे प्यार करता हूँ और तुम्हें बहुत चाहता हूँ|

मैंनेंं कहा- अगर तुम मुझे नहीं छोड़ोगे|| तो मैं चिल्लाऊँगी|

मखनचु नेंं कहा- ठीक है चिल्लाओ|| मैं भी कह दूँगा इसनेंं मुझे खुद ही बुलाया था और वैसे भी तुम लड़की हो बदनामी तुम्हारी ही होगी|
मुझे भी लगा कि ये बात तो ठीक कह रहा है| मैं पूरी तरह से फंस चुकी थी|

अब उसनेंं कहा- मैं जैसा कहता हूँ! वैसा ही करो|| वरना अच्छा नहीं होगा|

मैंनेंं मखनचु से कहा- देखो मखनचु! ये तुम ठीक नहीं कर रहे हो|
मखनचु नेंं मेरे होंठों को अपनेंं होंठों से मिला दिया और पागलों की तरह किस करनेंं लगा| उसनेंं मुझे 5 मिनट तक किस किया|
फिर मखनचु नेंं मुझे अपनी गोद में उठाया और मेरे रूम में लेकर आ गया| अब वो मेरे कपड़े उतारनेंं लगा|
मैंनेंं मखनचु को मना किया- मखनचु रुक जाओ क्या कर रहे हो तुम? ये सब ग़लत कर रहे हो|
मैं अपनेंं आपको मखनचु से छुड़ानेंं की पूरी कोशिश कर रही थी! पर मखनचु नहीं रुका| उसनेंं एक-एक करके मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मैं अब उसके सामनेंं बस ब्रा और पैंटी में थी|
उसनेंं भी अपनेंं सारे कपड़े उतार दिए| पहली बार मैंनेंं लाइव अपनेंं सामनेंं किसी मर्द का लंड देखा था| उसका लंड लगभग 8 इंच का था|
मुझे बहुत डर लग रहा था और ये अनुभव मेरे लिए बिल्कुल नया था| दोस्तो मैं आपको बता दूँ इससे पहले मैं अभी तक किसी लंड से नहीं चुदी थी| इससे आप लोग अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मेरा क्या हाल हो रहा होगा|
मेरी साँसें जोर-जोर से चल रही थीं| मखनचु मेरे पास आया और लंड की तरफ इशारा करके बोला- चल पकड़ इसे और इसको सहला|| मेरी जान आज से ये तेरी चुत का पति है|

अब मैं समझ चुकी थी कि आज मैं चुदनेंं वाली हूँ|
मखनचु नेंं मुझे किस करते हुए बोला- नीता प्लीज़! मैं तुम्हारी मर्जी के खिलाफ तुम्हें कुछ नहीं करूँगा|

फिर मखनचु नेंं मेरी ब्रा को ऊपर उठाया और मेरे मम्मों को चूसनेंं लगा|
क्या बताऊं दोस्तो|| मम्मे चुसवानेंं का मस्त क्या एहसास था|| सच में मुझे बहुत अच्छा लगा और गुदगुदी भी हो रही थी| मखनचु मेरे दोनों मम्मों को दबानेंं लगा| इस तरह वो लगभग 15 मिनट तक मेरे मम्मों के साथ खेलता रहा|

फिर उसनेंं मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी पैंटी उतार दी|| और मेरी चूत पर हाथ फेरनेंं लगा|
थोड़ी देर हाथ फेरनेंं के बाद मेरी चुत को अपनी जीभ से चाटनेंं लगा| मेरे मुँह से गरम सिसकारियां निकलनेंं लगीं और मैं उसनेंं मुँह को अपनी दोनों टांगों के बीच दबानेंं लगी| मखनचु की तरफ से छूटनेंं की कोशिश करनेंं लगी! पर अब मखनचु मुझे छोड़नेंं वाला नहीं था|
उसनेंं मेरी चुत को खूब चाटा और चूसा| अब मुझे भी मज़ा आ रहा था| थोड़ी देर बाद मेरी चुत नेंं अपना पानी छोड़ दिया| मखनचु मेरी चुत का सारा पानी पी गया|
थोड़ी देर बाद मखनचु उठा और बोला- अब तुम मेरे लंड को मुँह में लो|

मैंनेंं कहा- छी: मखनचु मैं ऐसा नहीं करूँगी|
उसनेंं मुझे काफ़ी रिक्वेस्ट की! पर मैंनेंं मना कर दिया- ये मुझे बहुत गंदा लगता है|

मखनचु नेंं कहा- कोई बात नहीं|
अब उसनेंं अपनेंं लंड पर थोड़ा थूक लगाया और सहलानेंं लगा| फिर मेरी चुत पर अपनेंं लंड को रख कर सहलानेंं लगा! मैंनेंं मखनचु को मना किया- मखनचु रहनेंं दो|| ऐसा मत करो मैं मर जाऊंगी|
पर मखनचु पर तो कामदेव आ चुके थे! वो अब रुकनेंं वाला नहीं था| मैं बिस्तर पर चित लेटी हुई थी| मखनचु नेंं मेरी दोनों टाँगें फैलाईं और अपना लंड मेरी चुत पर रखकर एक हल्का सा धक्का मारा|

मेरी तो जान ही निकल गई और मैं दर्द के मारे जोर से चिल्लाई- अऔच|| ओह गॉड|| प्लीज़ मखनचु इसे निकाल लो! मुझे दर्द हो रहा है|

पर मखनचु नेंं मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी और मुझे किस करनेंं लगा|
मैं रोनेंं लगी! मेरी आंखों से आँसू निकल रहे थे| सच में मुझे बहुत दर्द हो रहा था| थोड़ी देर के बाद मखनचु नेंं धीरे-धीरे धक्के लगाकर अपनेंं लंड को थोड़ा और अन्दर करते हुए मेरी चुत में डालनेंं लगा| मैं सहमी सी पड़ी थी! तभी उसनेंं एक और धक्का दे दिया| अब उसका आधा लंड मेरी चुत में घुस चुका था|
थोड़ी देर बाद उसनेंं एक और धक्के के साथ पूरा लंड मेरी चुत में घुसेड़ दिया| थोड़ी देर रुकनेंं के बाद मखनचु मेरी चुत में धक्के पर धक्के देनेंं लगा और मेरी चुदाई करनेंं लगा|
अब उसनेंं अपनी स्पीड थोड़ा बढ़ाकर मुझे चोदनेंं लगा| वो बोले जा रहा था- नीता तू कितनी सेक्सी है|| अह|| कितनी हॉट है|| तेरे जैसे माल के लिए तो कोई भी कुछ भी कर जाए|

मैं भी खूब चीख रही थी! चिल्ला रही थी| मेरी चीख और सिसकारियों की वजह से वो और उत्तेजित हो रहा था|

‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ मैं इस तरह से आवाजें कर रही थी|
लगभग 20 मिनट के बाद उसनेंं एक जोरदार धक्का मेरी चुत में मारकर अपनेंं लंड से पिचकारी छोड़ दिया| मेरी चुत में ही झड़ गया! उसनेंं अपना सारा पानी मेरी चुत में छोड़ दिया|
हम ऐसे ही एक-दूसरे की बांहों में थोड़ी देर तक लेटे रहे| मैं अभी भी थोड़ा रो रही थी|
तो मखनचु नेंं कहा- आई’म सॉरी मेरी जान|| मुझे माफ़ कर दो! मैं खुद को कंट्रोल नहीं कर पाया|| देखो तुम जो चाहो मुझे कर सकती हो! लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ|| ये सच है|
मैंनेंं कुछ नहीं कहा! मैं बस लेटी रही| थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम में फ्रेश होनेंं चली गई| इसके बाद हम दोनों नेंं साथ में खाना खाया|
दोस्तो जब भी मौका मिलता था! मखनचु मुझे ऐसे ही चोद लेता था|
फ्रेंड्स आपको मेरी पहली बार चुदाई की कहानी कैसी लगी|| मुझे मेल ज़रूर कीजिए|

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