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नई नई भाभी को चोदा

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मेरा नाम सुनील है और मैं गुजरात का रहने वाला हूँ। मैं गुजरात के दहज की एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता हूँ। मैं काफी समय से सेक्स कहानी हिंदी पढता आया हूँ। अच्छा लगता हैं जब लो अपने अनुभव लोगों से बांटते हैं। और मैंने सोचा की मैं भी अपने अनुभव को लिख के भेजूं। मैं ऑलमोस्ट 6 फिट का हूँ और मेरा लंड 6 इंच का हैं। मैं किसी भी औरत को खुश कर सकता हूँ। मैं आज आप को जो कहानी बताने के लिए आया हूँ वो मेरे भाभी को चोदने की हैं।
मेरे मामा वलसाड के पास रामपुर में रहते हैं। रामपुर में मेंगो का बड़ा मार्किट हैं और बड़े बड़े फ़ार्म में अच्छी किस्म की मेंगो फार्मिंग होती हैं। मेरे मामा का बिजनेश भी उसी का हैं और मेरे मामा का बेटा हैं वो ही सब काम देखता हैं।

मेरी भाभी दिखने में बहुत ही अच्छी हैं। वो सेम टू सेम प्रियंका चोपड़ा के जैसी ही लगती हैं। मेरी और भाभी की अच्छी बनती हैं। जब मैं वहां पहुंचा तो मैं घर में फ्रेश हो के मेरे मामा के दुकान पर पहुंचा। वहाँ सब बीजी थे काम में। मैं वही भाई के साथ बैठ के सब कुछ हिसाब किताब देखने लगा। ये सब करते करते वही पर रात के 11 बज गए।
मैं और मेरा भाई सब कुछ काम निपटा के घर गए। भाभी और मेरी वाइफ बैठ के बातें कर रहैं थे। उन्होंने हमें खाना परोसा। खाने के बाद भाई बोला की मैं सामने अपने घर में सोने के लिए जाता हूँ। मेरे भाई और भाभी वैसे तो मामा मामी के साथ रहते थे। पर उनका अपना खुद का अलग मकान भी था जो मामा के घर के सामने ही था। भाई और भाभी दोनों वही पर सोने के लिए जाते हैं, बाकि पूरा दिन वो लोग मामा के घर में ही रहते हैं।
भाई बोला की मैं सोने के लिए जा रहा हूँ आप लोग बैठ के बातें करो। वो पुरे दिन दिकान का काम देख कर थक जाता हैं तो सो गए। मैं मेरी वाइफ और मेरी भाभी अभी भी बैठ के बातें कर रहैं थे। 1 बज गया तो हम सब सोने के लिए अपने अपने रूम में गए। फिर रात के शायद 2 – 2:30 बजे मैं पेशाब करने के लिए गया। मैंने देखा की तब टॉयलेट के अंदर कोई था। मैं बहार ही खड़ा रहा।
फिर थोड़ी देर में भीतर से भाभी निकली। मैं समझ गया की वो सोने के लिए यही रुक गई थी लेट होने की वजह से। अभी तक मेरा कोई ऐसा वैसा गन्दा इरादा नहीं था भाभी को ले के। लेकिन तब भाभी नाईट स्यूट पहन के संडास से निकली थी। और वो उसके भीतर इतनी सेक्सी लग रही थी की मैं उसे देखता ही रह गया। पता नहीं मेरे दिमाग में उस समय क्या चल गया की मैंने भाभी को पकड ही लिया। मेरा लंड आधे मिनिट से भी कम समय में मुतने से चोदने के मोड़ पर आ गया था। वो बोली, छोड़ दो क्या कर रहैं हो सुनील?
मैंने कहा छोड़ने के लिए थोड़ी पकड़ा हैं आप को!
भाभी एकदम घबराई हुई सी लग रही थी और मेरा हाथ छुड़ाना चाहती थी। लेकिन मैंने भी जोर से पकड रखा था इसलिए वो छुड़ा नहीं सकी। फिर मैंने उन्हैंं कमरे से पकड़ कर मेरी तरफ खिंच लिया वो वो जरा सा और जोर दिखने लगी। मैं बोला देखो ज्यादा उछल कूद मर करो। और मैंने कहा भाभी मुझे कुछ और नहीं करना हैं, बस आप अपने होंठो से एक प्यार भरी चुम्मी दे दो तो मैं सो जाऊँगा लंड को हिला के।
वो बोली, ये क्या बोल रहैं हो?
मैंने कहा मैं जो कहा वो सच हैं। और फिर मैं जबरन भाभी के होंठो को चूमने लगा। भाभी काफी टाइम मना कर रही थी और वो मेरे सकंजे से छूटने की भी कोशिश में लगी थी। मैं भाभी के मम्मे भी मसल रहा था। और उन्हैंं किस भी दे रहा था। थोड़ी देर में भाभी भी गर्मी महसूस कर के मुझे साथ देने लगी थी। और अब उसके मुहं से मोअनिंग की आवाज आने लगी थी। फिर तो मुझे और भी जोश चढ़ गया। और मैं भीतर से गुड फिल करने लगा था। मैं भाभी का हाथ पकड़ के उसे रसोईघर में ले गया। वहां पर थोड़ी टफ था क्यूंकि कोई मुतने के लिए आता तो हमारी बात पकड़ी जाती।
किचन के भीतर वो भी पूरी तरह से खिली हुई थी। और भाभी ने मेरे हाल्फ पेंट को निकाल दिया और वो मेरे लोडे को चड्डी के ऊपर ऊपर से ही दबा के सहलाने लगी। मैं भी उनके नाईट स्यूट को उतार के उनकी पेंटी को देखने लगा। भीतर भाभी ने कोई ब्रा नहीं पहनी थी। नाईट स्यूट के निचे बस ये पेंटी ही थी।
मैंने भाभी को मेरा लोडा मुहं में ले के चूसने को कहा तो उसने मना कर दिया। लेकिन मैंने उसके मुहं को पकड़ के उसे जबरदस्ती से निचे बिठा दिया। और एक हाथ से उसके मुहं को दबा के लौड़े को मुहं में भर दिया। अब भाभी भी मेरे लंड को चूस रही थी। कुछ देर लोडा चुसाने के बाद मैंने भाभी को किचन के प्लेटफोर्म के ऊपर चढ़ा के उसकी पेंटी निकाल फेंकी। अब मेरा मुहं भाभी की रसीली भोसड़ी के ऊपर था। मैं उस देसी भोसड़ी से निकलते हुए पानी को चाटने लगा था। भाभी की चुत से मूत ककी स्मेल आ रही थी। भाभी मचल रही थी और उसके बदन में एंठन भी आने लगी थी। वो मेरे माथे को पकड के जोर जोर से चुत के ऊपर दबा रही थी। और मैंने भी उसकी चुत के भीतर अपनी पूरी जबान डाल दी थी।

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