दोनों की लुगाई-8

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अचानक मस्ती में आए ब्रेक से रानी भी विचलित हो गयी पर फिर भी लज्जा से बोली – धत्त, हम कैसे अपने हाथ से ये करेंगे. हमको शरम आती है.

जग्गा बोला –ई तो जायज़ नही है गुड़िया, तुम पूरा मज़ा लो और हम दर्द सहते रहे.
जग्गा के इस नरम बनावटी शिकायत से रानी मान गयी.
उसने दोनो के सर अपनी गोद में रख लिए और अपने हाथों से एक-एक चूची थामकर उनके होठों पर सटा दी.

अब रंगा-जग्गा मज़े से रानी की चूचियों का रास्पान करने लगे. रानी पर पूरे शराब के बॉटल जितना नशा छाया हुआ था और धीरे-धीरे वो मीठा एहसास उसे जांघों के बीच में भी महसूस हुआ.
एक अजनबी एहसास जो उसके चूत के दानों पर सरसराहट कर रहे थे. रानी को ऐसा महसूस हुआ जैसे पेट के नीचे कोई बाँध टूटने वाला है और वो बेहोश होने वाली है. ये एहसास मीठा था पर बिल्कुल अंजाना इसलिए डरते हुए वो बोली – अजी सुनते हैं! हमको अंदर कुच्छ अजीब सा लग रहा है.
दोनो ने चूची चुभलना छ्चोड़ दिया और रंगा नेउत्सुक होके पूछा- क़ा बात है हमारी चिड़िया, कहाँ क्या अजीब लग रहा है?

रानी भोलेपन से बोली – पता नही जब आपलोग हमरी छाती पे कुछ-कुछ करते हैं तो पेट के नीचे अजीब सा गुदूम-गुदूम होता है और………

रंगा ने उसकी आगे की बात काट कर बोली – छाती नही रानी और कुछ-कुछ भी नही. बोलो, जब चूची चूसते हैं तो……बोलो, शरमाओ मत अब हमारे बीच में कोई परदा थोड़े ना है.

रानी शरमाते हुए बोली – हां वही…..जब आप चू…ची चू…स्ते है तो पेट के नीचे कुछ होता है.

जग्गा ने जिग्यासा से पूछा – कहाँ रानी जान?? यहाँ का???
ये कहते हुए उसने अपनी एक हथेली रानी की चूत पर रख जाँच लिया.
रानी ने लाज की अधिकता से ‘हाई राम’ कहते हुए मूह फेर लिया. रंगा ने रानी के गाल पर हाथ रख उसका मूह फिर अपनी ओर किया और बोला – इसमे घबराने की कोई बात नही है मेरी गुड़िया, ऐसा तो हर लड़की के साथ होता है जब वो अपने पति परमएश्वर के साथ चुदाइ करती है तो.

जग्गा बोला- देखो चिड़िया, आज तुम्हारे लिए सब कुछ नया होगा, इसलिए घबराओ मत और सब कुछ हम पर छ्चोड़ दो. गॅरेंटी देते है की जो होगा तुम्हे सुख देने के लिए होगा और तेजस्वी प्रतापी संतान के लिए. बिना कोई डर के खुलकर हमारे साथ मज़ा लो तभी तो तंदूरुस्त पुत्र होगा, समझी??

रानी जग्गा की इन बातों को सुनके थोड़ा शांत हुई और अज्ञानता के कारण अपने आपको उनके हवाले कर दिया. अब उसने सोच लिया की जब ये मेरे परमेश्वर है तो उसे परेशान होने की क्या ज़रूरत. उसने निस्चय किया की वो बिना कोई सावल-जवाब किए उनकी एक-एक बात मानेगी और उनको खुश करने का पूरा प्रयास करेगी.

रानी ने फिर से अपनी चूची थामकर दोनो के होठों पर सटा दिया. जब उसका ध्यान चूचियों पर पड़ा तो उसने देखा जगह-जगह पर काटने की वजह से लाल निशान पड़ गये थे.
रंगा-जग्गा बच्चों की तरह रस-पान करने लगे. जब भी दोनो में से कोई चूची या घुंडी को दातों से काट लेता तो रानी के मूह से एक सिसकारी निकल जाती और तभी उस दर्द को भूलने के लिए कोई उसके नंगे बगलों में उंगलियों से गुदगुदी कर देता. इस तरह ये खेल कुछ 10 मिनिट तक चलता रहा और रानी भी मस्ता कर सोचने लगी की ये स्त्री-पुरुष का मिलन तो इतना भी बुरा नही है जैसा माला कह रही थी. दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा आपसे पूंछरहा हूँ क्या माला की ये सोच सही है ???

रंगा-जग्गा ने महसूस किया की रानी के वक्ष कड़क हो गये थे और किशमिश के दाने भी टाइट और पूरी तरह तन गये थे. अब उन्हें दूसरे राउंड की तैयारी करनी थी.

जग्गा चूची चूसना छ्चोड़ बिस्तर पे खड़ा हो गया और अपनी धोती खोल दी. रानी ने एक चूची की मस्ती में कमी महसूस की और आँखें खोली तो सामने जग्गा का मोटा और लंबा लंड लहराते देखा.
रूम के नाइटबूलब के मधिम प्रकाश में अचानक इतना काला और लंबा हिलता हुआ कुछ देख एक बार को रानी हकबका गयी और उसके मूह से हल्की चीख निकल गयी.
रंगा की तद्रा भंग हुई और उसने वो नज़ारा देखा तो हंस पड़ा. साथ में जग्गा भी हंसते हुए बोला – का रे गुड़िया रानी, रंगा बाइक पे बोला था ना प्यार करे का समान के बारे में. यही है वो. इसी का तुमको रोज पूजा करके प्रसाद निकाल के पान करना होगा.

हालाकी संभोग का ग्यान माला ने रानी को दिया ज़रूर था पर अपनी कलाई जितनी मोटे और 10“ लंबे साप की तरह फुफ्कारते लंड की उसने कल्पना भी नही की थी. गाओं के नेक्कर वाले लड़को को उसने तालाब के किनारे पेसाब करते देखा था तो कभी ये ना सोचा था की उमर के साथ उनका लंड कितना बढ़ेगा.

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