दोनों की लुगाई-7

माला का चेहरा भयानक लग रहा था. आँखें लाल, होंठो की लिपस्टिक आस-पास फैल गयी थी, आँसू की वजह से काजल चेहरे पर फैल गया था.

उसने पूरा वीर्य पी लिया और सहम्ते हुए बोली – सरकार, आपको पक्का यकीन है ना की ये लड़की आपकी गर्मी से मरेगी नही??

“तू डर मत कुतिया”, खुद से चुदने को जो तैयार हो जाए उसे हम गुड़िया जैसा चोद्ते और रखते है. हमारी प्यारी चिड़िया बनेगी पर पिंजरे की और उसको जब हम मसलेंगे तो उसको भी बहुत मज़ा आएगा. कुच्छ दीनो में जब रति-क्रीड़ा के बारे में सब सीख जाएगी तो वो खुद ही चुदवाने के लिए तड़प्ती रहेगी. तू देखती जा. – रंगा बोला.

माला के जाने के बाद दोनो उपर कमरे में आ गये.
अंदर घुसते ही रंगा ने दरवाजे की कुण्डी लगा दी. दोनो बिस्तर के तरफ बढ़ने लगे.

घूँघट में से रानी ने देखा की दोनो पलंग के दोनो साइड पर खड़े हैं तो वो अपने आप में और सिमट गयी.
इस पल के बारे में माला ने उसे अच्छी तरह से समझा दिया था इसलिए वो अंदर से बहुत सहमी हुई थी. रंगा ने एक साइड से उसके हाथ लगाकर घूँघट को धीरे से उठना चाहा तो रानी मारे शरम के अपने हाथेलियो से चेहरा ढक लिया.
दूसरी तरफ से जग्गा बिस्तर पे चढ़ आया और रानी के बाजू में बैठता हुआ उसकी एक नाज़ुक हथेली अपने तगड़े हाथ से पकड़कर हौले से खीचते हुए बोला – गुड़िया रानी! अपने भगवान से शर्मा रही हो. अभी तो खाली घुघाट उतरा है, आगे और क्या कया उतरेगा मालूम है??

हालाकी उन दोनो को रानी के शरमाने से कोई एतराज़ नही था क्यूंकी ये उनकी प्यास और बढ़ा रहा था पर साथ ही वो उसके कमसिन, भोले, और सजे-धजे मुख का दीदार भी करना चाहते थे.
दूसरे तरफ से रंगा भी रानी के बाजू बैठ गया और हौले से अपने होठ उसके कान के करीब लाकर लवो को चुभलने लगा. इस अप्रत्याशित क्रीड़ा से रानी के हथेली अनायास ही अपने चेहरे से हट गयी और वो बच्चों जैसे हँसने लगी.
रंगा के होठों की सरसराहट और उसकी मूछों से पैदा हुई गुदगुदी रानी को सर से पाव तक कपकपा गयी.
अब उसका सेक्सी चेहरा दोनो के सामने था जो स्वर्ग की अप्सरा जैसा दिख रहा था. बड़ी-बड़ी कजरारी आखें, गालों पर मास्कारा, होठों पे लिपस्टिक कातिलाना लग रही थी.
नज़रें तो उसकी नीचे ही झुको हुई थी की अचानक उसे रंगा-जग्गा की धोती में सामने की तरफ वो तंबू जैसा फिर नज़र आया. उसे अब ये ग्यात हो गया था की ये उनके विशालकाय लंड है. और उसी एहसास से उसके अंदर एक सर्द लहर बिजली के भाँति गुज़र गयी.
माला के अनुसार आज की रात रानी के लिए काफ़ी दर्द भरी होगी क्यूंकी उसके देवता उसके पिछले जनम के पाप पहले उतारेंगे फिर दूसरे दिन से उसे स्वर्ग का आनंद मिलेगा.
गाओं की भोली, नादान रानी इन बातों को सच जान मंन-ही-मंन अपना तन-मंन उन दोनो को समर्पित कर चुकी थी.

जग्गा, जिसने रानी की राइट कलाई को थाम रखा था अब रंगा की तरह उसे कान और गर्दन पर चूमने लगा.
रानी की आँखें मस्ती और मीठी गुदगुदी से बंद होने लगी.
उसी मस्ती में डूबी थी जब रंगा ने अपना एक हाथ रानी के पीछे ले गया और उसके चोली के डोरियों से खेलने लगा. उसने तीनो डोरियों को हौले से उंगलियों की हरकत से खोल दिया. तभी जैसे रानी को होश आया और वो बकरी की तरह मिमियाते हुए बोली – ई का कर रहे हैं जी?? हमार चोली उतर जाएगा, नंगा हो जाएँगे हम!!
रंगा गरम साँसे लेते हुए उसके कान में फुसफुसाया – अब बर्दाश्त नही होता है गुड़िया रानी, अपना रसीला चूची से दूध नही पिलाओगी का हमको??
रानी रंगा की गरम साँसों से सनसानाते हुए अपने आप में सिकुड़ते हुए भोलेपन से बोली – ई का कह रहे है आप?? भला हमारे छाती से दूध कहाँ निकलेगा??
रंगा हँसते हुए बोला – निकलेगा रानी निकलेगा! दूध नही पर यौवन रस निकलेगा.
ये कहते हुए वो धीरे-धीरे रानी के चोली की एक बाह पकड़ कर उसके हाथ से बाहर खीचने लगा. दूसरे तरफ से जग्गा ने भी सहयोग किया और रानी के शर्मीले ना-नुकुर पर भी चोली निकाल कर दूर कोने में फेक दी.

अपने छाती पर ए/सी का ठंडा पन रानी नेएक पल महसूस कर शरमाते हुए अपने दोनो हाथों से छाती को ढक लिया.
रंगा बड़े लाड से बोला – अपने देवता को नाराज़ नही करते चिड़िया! आओ हमसे क्या शरम. हम तो तोहरे मरद हैं. ई वीराने में दूर दूर तक कोई नही है जो तुमको देख सकता है.
पुचकारते हुए उसने रानी के हाथ उसकी छाती से हटाने में सफलता प्राप्त कर ली.
उन यौवन घाटियों का दर्शन पा दोनो निहाल हो गये और एक ठंडी साँस बाहर छ्चोड़ी. उनकी ललचाती नज़रें रानी के नंगे छाती पर काटो जैसी छुभन पैदा कर रहे थे. इसलिए झेंप कर उसने अपनी हथेलियों से अपना मूह छिपा लिया. हालाकी रानी सावली थी फिर भी शरम की अधिकता की वजह से उसका चेहरा लाल हो गया था.
नंगी छाती पर वो तोतापरी आम के आकार के चूची और उसके एंड पर भूरा सा 1 से. मी लूंबी घुंडी दोनो को दीवाना बना गये.
उन्होने रानी को पालती मारकर बैठने को कहा जिसका पालन रानी ने अपने चेहरा ढके ही किया.
अपने आस पास के हालात से अन्भिग्य रानी बस ये शोच रही थी की अब ये दोनो उसकी चूचियों का क्या करेंगे.
दोनो ने रानी के गोद में दोनो तरफ से सर रख दिया और छाती की तरफ मूह करके अपने गरम होठ उसकी चूचियों की एक-एक घुंडी पर रख दिया.
रानी के पुर जिस्म में एक बिजली का झटका स्सा लगा और उसने हाथ हटा कर फ़ौरन बिस्तर पर पीछे सरकने को हो गयी. पर दोनो ने शायद इसकी कल्पना पहले ही कर ली थी इसलिए उन्होने अपने एक-एक हाथ को रानी के पीठ पर रख कर उसे मजबूती से जाकड़ लिया.
रानी 1” भी पीछे ना सरक सकी और जल बिन मछ्ली की तरह छटपटाकर रह गयी.
अब तक दोनो मज़े से रानी की आधी चूची को अपने विशाल मूह में भरकर चूस- रहे थे. दोनो के दाँत जब चूची पर कभी गढ़ते या वो घुंडी को जानबूझ कर काट लेते तो रानी के मूह से दर्दभरी सिसकी निकल जाती.
1-2 मिनिट बाद रंगा-जग्गा की क्रीड़ा जो रानी को अत्याचार लग रही थी अब उसे मदमस्त किए हुए थी. इस मस्ती की कल्पना उसने कभी ना की थी. जब दोनो घुंडी को अपने होठों के बीच लेकर चूसते तो कई बार रानी को यही लगता था की उसके पूरे जिस्म और छाती से होती हुई कोई सुई की धार समान तरल उसके घुंडीयों में पहुँच रही हो.
दोनो बच्चों के जैसे रानी के चूचियों को चूस रहे थे.
रानी की उम्र की लड़कियों के हालाकी काफ़ी भरे स्तन हो जाते है पर इसकी 4’5” की काया थोड़ी नाबालिग बच्चियों जैसी थी जिसपर ये स्तन बाकियों से हटकर तोतापरी आम जैसे थे.
कम हाइट की वजह से कमर भरी भरी लगती थी पर वजन फिर भी एक 15 साला लड़की जितना था.
रंगा-जग्गा की गर्दन हवा में होने की वजह से थोड़ी अकड़ने लगी तो रंगा बोला – आए दुल्हिन हमरा तो गर्दन दुखने लगा और तुमको तो पूरा मज़ा आ रहा है. ई कौन सा न्याय है. चलो अब अपने हाथ से हमको अपना चूची पान कराओ

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