दोनों की लुगाई-6

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करीब1 घंटे बाद जब दोनो बाहर निकले तो रंगा-जग्गा ठिठक कर देखते रह गये.

सर से पाव तक अप्सरा जैसी लग रही थी वो. लाल चटकदार जारी वाला घाघरा, डोरियों वाली लाल चोली चोली जिसपे छ्होटे-छोटे काँच की बिंदी जो सितारों जैसे चमचमा रही थी, बाल की माँग में बड़ा सा माँग टीका, कानों में बड़े बूँदों वाले झुमके, नाक में नथ्नि जो लेफ्ट कान तक चैन में अटॅच्ड थी, और गले में 20 तोले की चैन. चोली और घाघरा के बीच का वो नग्न पेट पर झालारदार तगड़ी (कमरबुंद) और नाभि पर एक सोने का सिक्का.हाथों में लाल-सफेद और सोने की चूड़ियाँ थी जो वृस्ट से कोहनी तक भरे थे. उंगलियों में 4-4 अंगूठियाँ और फास्ट-ड्राइ मेहंदी. गालों पर मस्कारा और होठ पर चेररी रेड लिपस्टिक उसकी सावली काया को और सेक्सी बना रहे थे.पैरों में भी मेहंदी लगी थी और दोनो पैरों में एक-एक सोने का घुँगरू वाले पायल थे.
उसके वजन से ज़्यादा शायद रानी के बदन पर जेवर और कपड़े थे.
उन सब पर लाल बूटियों वाला दुपट्टा जो उसके आधे चेहरे तक झुका हुआ था, पूरे सजावट की सोभा बढ़ा रहा था.
रंगा-जग्गा ही क्या किसी इंपोटेंट इंसान का भी लंड खड़ा हो जाता.

उस खामोशी को माला ने तोड़ा – क्या बात है कोई साप देख लिया क्या. ये तुम्हारी लुगाई है!
दोनो जैसे नींद से जागे. उनके मूह में लार भर आया और धोती आगे की तरफ तंबू जैसी बन गयी.

माला सबको लेकर शादी के टेबल के तरफ आई और कुछ झूठ मूठ पूजा का स्वांग कर दोनो को एक मंगलसूत्रा दिया और पहनाने को कहा.
दोनो ने वो फॉरमॅलिटी ख़तम की और एक-एक कर रानी के माँग में सिंदूर भर दिया.
इसके पस्चात रानी ने दोनो के पाव छूए. तब माला ने रानी से कहा – दुल्हिन, अब जो हम कहेंगे उसे हमारे पीछे दोहराना.
रानी ने हामी में सर हिला दिया.
माला बोली – आज से रंगा-जग्गा ही मेरे भगवान है. मैं इनका पुर लगन से सेवा करूँगी और कोई भी शिकायत का मौका नही दूँगी. मेरा पूरा बदन और ये जनम सिर्फ़ अपने देवताओं के सुख के लिए बना है. चाहे कितनी भी तकलीफ़ हो पर मैं तन-मॅन से उनकी सेवा करूँगी. अपने देवताओं का अमृतमयी प्रसाद का पान मैं हमेशा अपने सारे छिद्रों से करूँगी और उसके प्रताप से उन्हे हर 2 साल पर एक प्रतापी संतान दूँगी. अब मेरा पूरा जीवन इनके चरणों में समर्पित है.
रानी ने सब रिपीट किया और झुक कर माला के चरण छू लिए.

माला नेउसे आशीर्वाद दिया और फिर उसे लेकर उपर के एक कमरे में आ गयी जो की नीचे वाले बेडरूम का ड्यूप्लिकेट था. पर यह सुहाग कक्ष जैसा सज़ा हुआ था. और बिस्तर पर लाल गुलाब के पंखुड़ी बिखरे हुए थे.
रूम के कॉर्नर में एक छ्होटी अंगीठी रखी थी जिसमे चंदन के लकड़ियों का अंगार जल रहा था.
माला ने रानी से कहा की वो अंगीठी को अपने टाँगों के बीच रखकर खड़ी हो जाए.
रानी ने जिग्यासा से माल को देखा तो वो बोली – गुड़िया, ऐसे तुम्हारी चूत और गांद खुसबूदार हो जाएगी और तुम्हारे मरद को अच्छा लगेगा.

शरम से लाल रानी गर्दन झुकाए अंगीठी पर खड़ी हो गयी. अंगीठी उसपे पैरों के बीच था और घाघरा के अंदर इसलिए चंदन की खुश्बू पूरी तरह से उसके चूत और गांद पर अपनी छ्चाप छोड़ रही थी. चड्डी तो उसने पहन रखी नही थी सो रानी को 5 मिनट बाद हल्की गर्मी लगने लगी तो माला ने उसे बस करने को कहा.
अटॅच्ड बातरूम में ले जाकर माला ने रानी को पहले गुलाब जल और फिर शाद से कुल्ले करवाए.

अब उसने रानी को बिस्तर पर बैठा दिया और कहा थोड़ा इंतेज़ार करो तुम्हारे मारद को भेजती हूँ.

नीचे आकर माला ने आँख मारते हुए रंगा से कहा – जाओ सरकार, आपकी नन्ही परी आसमान में उड़ने को तैयार है!

जग्गा नेहँसते हुए बोला – रुक साली! जाने के पहले ज़रा मेरा लॉडा तो चूस थोड़ा बहुत टनटना गया है!
माला ने आग्या का पालन किया और घुटनों के बल बैठ कर जग्गा की लूँगी उपर की. ऐसा करते ही अचानक लंड फंफना कर उसके होठों पे लगा.

माला चुटकी लेते हुए बोली – सरकार, इसको तो सह में खाली करना होगा नही तो आपकी नाज़ुक लुगाई तो आसमान में उड़ते हुए परलोक पहुँच जाएगी.

ये कहते हुए उसने अपने होंठ उसके लंड पर रख दिए. लंड में तो जैसे आग लगी थी. उसकी चटख से एक बार तो माला ने लंड पे से मूह हटा लिया पर फिर उसे धीरे-धीरे मूह में लेकर चुसकने लगी. गरम होंठों की गर्मी और जीभ की सरसराहट से जग्गा पागल हुआ जा रहा था. उसने माला का सर पीछे से दोनो हाथों से थाम लिया और ज़ोर ज़ोर से उसे आगे पीछे करने लगा. उसका 10” लंबा लंड माला के गले तक चोट कर रहा था और उसकी आँखें बाहर की तरफ उबलने लगी थी. वासना में पागल जग्गा पूरा हैवान नज़र आ रहा था. उसका चेहरा तमतमा कर लाल हो गया था और उसके कानों के उधर आग लगी हुई थी. माला के आँखों से आँसू निकल गये और उसके गले से गो-गो की भरराई आवाज़ आने लगी. 2 मिनिट में ही जग्गा के लंड से गरमा गरम वीर्य निकला जो माला के मूह में ऐसा लगा जैसे किसीने गरम लावा पिचकारी में भरके मारा हो. 15 सेकेंड तक जग्गा ने अपना बीज माला के मूह में गिराया और फिर अपना लॉडा बाहर निकालके माला का मूह बंद कर दिया और बोला – पूरा पी ले कुतिया, कुछ भी गिरना नही चाहिए!

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