दोनों की लुगाई-5

इतने में दरवाजे पर दस्तक हुई तो जग्गा ने लपक कर अपना धोती उठाई और कमर पर लपेट उठ गया. उसके दरवाजा खोलते तक रंगा भी अपना धोती लपेट चुका था.
जग्गा ने डोर खोला तो सामने माला को पाया.
ये वोही औरत थी जिसकी बात वो रानी से कर रहे थे.

30-35 साल की उम्र होगी उसकी. रानी ने देखा वो सर से पाव तक भग्वे चोगे में थी.
लंबे बॉल, माथे पे टीका, गाले में रुद्राक्ष की माला, सचमुच किसी मंदिर की पुजारीन लग रही थी वो वैश्या.

माला अंदर आकर रानी को उपर-से-नीचे तक देखा और उसके गाल पर चिकोटी काट बोली – तो ये है नन्ही दुल्हिन? अरे रंगा आप तो बोले थे की 18 की है पर ये तो और मासूम दिख रही है? खूब मस्त दुल्हिन लाए है अपने लिए, हां??

रानी के गाल शरम से लाल हो गये और नज़रें नीचे गड़ गयी.

माला मज़ाक करते फिर बोली – अरे वाह ई तो लजाती भी है? क्या रे गुड़िया बियाह करेगी इन बैलों से???

रानी के तो होंठ ही सील गये थे जैसे.

माला उसकी अवस्था समझते हुए बोली – आ तुझे तैयार कर दू.
ये कहते हुए दोनो बेडरूम में चले गये.

रंगा-जग्गा नेतब तक उस रूम के एक कॉर्नर में टेबल पे भगवान के नाम पर रति-कामदेव (सेक्स गोद-गॉडेस) की मूर्ति लगाए और दीप-धूप-लोबान-फूल और दूसरे पूजा के समान लगा दिया.

उधर माला नेकमरे मैं पहुँचके रानी को एक बार फिर उपर-से-नीचे तक देखा और अपनी जवानी उन दोनो के हाथ लुटने की याद कर अंदर से सिहर उठी. आज फिर एक मासूम और नादान उनके चंगुल में फँस के लुटने वाली थी. शायद 2-3 साल बाद रानी भी उसी के कोठे की शोभा बढ़ाएगी.
वो रंगा-जग्गा के ख़ौफ्फ से अंजान भी ना थी इसलिए उन ख़यालों को भूल वो अपने बेग से दुल्हन के साज़-शृंगार का सब समान निकालने लगी.
माला ने पूछा – का रे गुड़िया, सुहाग रात में का का होता है कुकछ मालूम है की नही??
रानी ने मासूमियत से इनकार में गर्देन झुका दी.
माला ने मुस्कुराते हुए बोला – अरे तो कैसे खुश करेगी अपने मरदो को??
रानी भोलेपन से बोली – खूब अच्छा खाना खिलाएँगे, घर संभालेंगे, कपड़े धोएंगे, बदन दबाएँगे; कोई दुख नही होने देंगे.

माला ज़ोर से हँसते हुए बोली- अरे ई सब तो कोई नौकरानी भी कर देगी फिर लुगाई का का फ़ायदा? और बच्चा कैसे पैदा करेगी अपने मर्दों के लिए??

ये तो रानी ने सोचा ही ना था. अचरज में डूबी उसने पूछा – ई तो हमको मालूम ही नही है.

माला उसके बालों में हाथ फेरती बोली – बैठ यहाँ तुझे सब समझाती हूँ.

फिर दोनो पलंग पर बैठ गये और माला बोली – देख गुड़िया, मरद को खुश करने का मतलब है भगवान को खुश करना. और उनको खुश करने के लिए उनके लिंग को खूब खुश रखो. जबही भी वो खड़ा हो तो उसे शांत करने के लिए उसका अमृत पीयो.

रानी आँकें फाड़ कर उसे देख रही थी.

माला समझाते हुए बोली – लिंग यानी उनका लंड.

फिर उसने रानी की चूत पर हाथ रखते हुए बोली – यहाँ तुम्हारा गड्ढा है और उनका डंडा. जब लिंग लुगाई के हर गड्ढे में घुसकर अपना प्रसाद यानी अमृत देगा तभी औरत को सुंदर और गोल-मटोल बच्चा होगा.
पुरुष का अमृत कभी बर्बाद नही हों चाहिए नही तो भगवान नाराज़ हो जाते है.

औरत का तो सब छेद खाली पुरुष का लिंग को घुस्वाने के लिए बना है. और एक बात, तुम्हारे मर्दों का जितना अमृत निकलॉगी उतना वो तुमसे खुश रहेंगे. समझी!!

समझना क्या था, रानी तो हक्की-बक्की आखें फाड़ माला को देखे जा रही थी. इन बातों के बारे में ना तो उसे कुकछ मालूम था ना कुकछ कल्पना. अभी उसे समझ आ रहा था की उसका बाप रात में उसकी मा के जांघों के बीच क्या ढूनडता था.

जब बोलने लायक हुई तो डरते हुए बोली – माताजी, अगर ऐसा है तो हम अपने भगवान को कभी दुखी नही होने देंगे. पर हम उनका लिंग देखे हैं, वो तो हमारे छेदों में कैसे जाएगा.

सब जाएगा बेटी, तुमको मालूम नही है पर एक औरत 13” लंबा लिंग अपने योनि में ले सकती है. पहला बार बहुत तकलीफ़ होगा. समझ लेना भगवान तुम्हारा इम्तिहान ले रहे है. बाद में फिर तुमको स्वर्ग का एहसास होगा. अब तुम्हारे नरक के दिन ख़तम हो गये है गुड़िया रानी. अब तुमको भगवान मिल गये है और वो भी दो-दो.

माला की इन बातों से रानी के चेहरे की मुस्कान फिर लौट आई और वो साज़ समान उलट-पुलट देखने लगी.

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *