दोनों की लुगाई-4

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रूम की शांति भंग करते हुए जग्गा ने पूछा – का रे गुड़िया, कैसन लगा हमारा शयन-कक्ष?
रानी शरमाते हुए बोली – खूब सुंदर है पर ई सब गंदा फोटो काहे लगा रखे हैं.
जग्गा बोला – अरे मेरी चिड़िया! अब तो तू हमारी लुगाई बन रही है तो तुमको मालूम तो होना चाहिए ना की बियाह के बाद का करते हैं. और फिर ई सब से सीख कर ही तो तुम हमको खुश कर पाओगि ना. और मरद-लुगाई के बीच में कुछ भी गंदा नहीं होता है. ई तो तुमको समझ में आ ही गया होगा जब हम तुम्हरा पेसाब पीए थे.

रानी को जैसे एहसास हुआ की उसने कुछ ग़लत कह दिया और वो अफ़सोस भरे लहजे में बोली – हमको माफ़ कर दीजिए. हमको लुगाई का कौनो कर्तव्य का ज्ञान नही है इसी से पूछ लिए.
रंगा हँसते हुए बोला – कोई बात नही गुड़िया, अब तो अपना जनम-जनमान्तर का साथ होगा. धीरे-धीरे सब सीखा देंगे.
रानी ने फिर जिग्यासा से पूछा – ई रूम में खाली एक ही पलंग क्यूँ है?
इस बार जग्गा के हँसने की बारी थी – अरे लाडो रानी, जब हम तुम्हारे मरद बन जाएँगे तो क्या हमसे अलग सोओगी? और अलग सोओगी तो हमारे बीच प्यार कैसे होगा और फिर नन्ही रानी कैसे आएगी. बोलो?

रानी की शरम से नज़रें ज़मीन में गढ़ गई.
इतने में रंगा बाजू के कपाट में से एक लाल घुटनों तक का घांघरा, लाल डोरियों वाली चोली और एक लाल दुपट्टा ले कर आया और रानी को देते हुए बोला – ले लाडो पहीन ले. नहा धो के रसोई में जाकर ज़रा सबके लिए चाइ और नाश्ता बना दे.

रानी ने कपड़े हाथ में लेकर उलट-पुलट कर देखने लगी तो रंगा पूछा – क्या हुआ गुड़िया?
रानी उत्सुकता से पूछी – सब ठीक है पर इसमे कछी क्यूँ नही है.
इसपर जग्गा हँसते हुए बोला – अरे पगली! यहाँ हमारे घर में चड्डी तो छ्चोड़ो कोई कपड़ा ही नही पहीनता है. धीरे-धीरे तुमको सब समझ जाएगा. पर इतना याद रखना की अगर कभी चड्डी पहना तो हम लोग नाराज़ हो जाएँगे.

रानी को कुछ अजीब लगा पर वो उन्हे नाराज़ नही करना चाहती थी इसलिए हौले से सिर हां में हिला दिया और कपड़े लेकर अटॅच्ड बाथरूम में घुस गयी.

बारिश से भीगा बदन जब झरने के गुनगुने पानी से नहाया तो सारी थकान और नींद उड़ गयी.
करीब आधे घंटे बाद रानी फारिग होकर बाहर निकली. वो अपने गीले कपड़े लिए दूसरे कमरे में पहुँची तो हकबका गयी. रंगा-बिल्ला बिल्कुल जनमजात अवस्था में सोफे पे बैठ टीवी देख रहे थे. पूरे बदन पर कपड़े का एक भी रेशा नही था. उनके शरीर पे सिर-से-पाव तक भालू जैसे बॉल थे. चेहरे पर घनी दाढ़ी, सर पे लंबे बाल, छाती और पीठ बालों से भरे, और झाँटे तो इतनी घनी की लंड उस वक़्त 5” होने पर भी दिखाई नही दे रहा था. पूरे पैरों में भी घाने बाल थे. पूरे-के-पूरे शेलेट-फिरते आदि मानव.
रानी को देख दोनो आसचर्यचकित थी. रानी बिल्कुल लाल परी लग रही थी. उन्हे अपने शिकार पर गर्व हो रहा था और आगे की कल्पना कर उनके लंड फुल टाइट हो गये.दोस्तो टाइट आपका भी हो रहा होगा शांति रखो यार अभी तो सुहाग रात मनानी बाकी है
अब फिर से चौकने की बारी रानी की थी जो उन घने झाटों में लंड को ताड़ नही पायी थी. अब उन लपलपाते घोड़े जैसे लौड़ों को देख उसका सारा जिस्म सर-से-पाव तक काप गया.
कुछ पल की चुप्पी को रंगा ने तोड़ा और छेड़ते हुए बोला – अरे वाह गुड़िया, खूब जच रही है ई कपड़ों में. एक दम घरवाली जैसन लग रही है! अच्छा जाओ और कुकछ सामान है रसोई में, चाइ और नाश्ता बना लो. फिर थोड़ी दे में पुजारीन आती होगी!!

रानी ताज्जुब से पूछी – पुजारीन! वो क्यूँ? घर में कोई पूजा करवाना है क्या.

रंगा बोला – पूजा ही तो है रानी जान. हमारा बियाह होगा तो पूजा तो होगा ही ना?

धात कहते हुए रानी रसोई की तरफ लपक ली.

रंगा जिसकी बात कर रहा था वो कोई और नही बल्कि पास के गाओं की एक वैश्या थी जो जवानी में उनका शिकार बनी थी. उसे ही पुजारीन बनाकर वो रानी को ये एहसास दिलाना चाहते थे की उनकी शादी हो रही है ताकि वो पूरी जान लगाकर बिना शिकायत किए अपने पतियों की सेवा करे.

रानी रसोई में उपमा और चाइ बनाकर कमरे में ले आई. उनको सर्व करने के बाद वो बाजू के चेर पे बैठ गयी. अभी भी वो उनके इस अवतार को देख कर कंफर्टबल नही हुई थी. रंगा ये ताड़ गया और तारीफ़ करते हुए बोला – वा! चाइ और उपमा तो बहुत बढ़िया है!! गुड़िया, तू तो बहुत अच्छी रसोइया लगती है. लगता है अब हम दोनो को खूब स्वाद खाना मिलेगा.
उनकी तारीफ सुन रानी नज़रें नीची कर मुस्कुराने लगी. इतने में रंगा बड़े लाड से बोला – यहाँ आओ मेरी चिड़िया! आओ हमारी गोद में अपने हाथ से तुमको खिलता हूँ.
रानी को कुत्ते की तरह पुचकारते हुए वो उठा और रानी की एक बाह पकड़कर उसे अपनी तरफ हौले से खीच लिया. हालाकी रानी उनकी नग्नता से अभी भी सकुचा रही थी पर उनके प्यार से वो छुप रही. आज तक किसीने ने उसके साथ इतने प्यार से व्यवहार नही किया था. और अच्छा खाना, रहने को इतना बड़ा घर, अच्छे कपड़े, प्यार; इन सबके एहसानों तले वो दबी जा रही थी.
इन्ही सोचों में उलझी वो रंगा के गोद में जा बैठी.
रंगा ने उसे एक जाँघ पे बैठाया और दोनो अपने बाजू रानी को दोनो तरफ लपेट दिए. राइट हाथ में उपमा का प्लेट लिए लेफ्ट हाथ में चम्मच से उठा कर खिलाने लगा.
रानी को रंगा का लाड बहुत अच्छा लगा.

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