दोनों की लुगाई-3

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रंगा- घबराव मत घर पहूचके बता देंगे.

फिर रंगा ने अपनी हथेली रानी की लेफ्ट चुचि पे रख दी.
ये क्या कर रहे है आप?? – रानी ने कसमसाते हुए रंगा से पूछा.
रंगा प्यार से उसके गर्दन पर एक चुम्मा लेते हुए बोला – कुछ नही दुलारी ये तो बस इतना देखने के लिए था की अभी और कितना बड़ा और सुंदर बनेगा तुमरा चूची.

ऐसी गंदी बातें रानी जैसी अनछुई लड़की के लिए बिल्कुल नया था सो ये सुन वो फिर से लजा गयी और ‘धत’ कहते हुए रंगा की छाती में मूह छुपा दिया.

उसी अवस्था में वो सकुचाते हुए पूछी – लेकिन हमको तो प्यार-व्यार के बारे में कुछ नही मालूम है. हम कैसे आप दोनो को सुखी रखेंगे?? और हमसे कुकछ कमी हो गया तो भगवान कभी हमको माफ़ नहीं करेंगे.
ये सुनकर रंगा हस्ने लगा और रानी की राइट चूची मसलते हुए उसके कानों के पास फुसफुसाते हुए बोला – गुड़िया रानी! जब बियाह हो जाएगा और सुहाग रात में हम लोग बिस्तर पे नंगे होंगे तो तुमको पता चल जाएगा की मरद को प्यार कैसे किया जाता है.

ये कहते हुए उसने रानी के हल्के-फुल्के बदन को घुमा कर अपने मूह के तरफ कर लिया. अब रानी उसके तरफ मूह करके नज़रें शरम से नीचे गढ़ाए बुलेट पर बैठी थी.
रंगा की गंदी बातें सुनके और चूचियों की तिलमिलाहट से उसका जिस्म गरम हो गया था और चूत पनियाने लगी थी. ये एहसास उसके लिए बिल्कुल नया था और उसकी कुकछ समझ नहीं आ रहा था की भला चूचियों का और गंदी बातों का और चूत का आपस में क्या संबंध है?
फिर भी उसे अच्छा लग रहा था और घर की याद तो उस दुखियारी ग़रीब को सता ही नही रही थी. शायद उसके लिए अच्छा ही हुआ जो उसे उस नरक से छुटकारा मिल गया. ओर इस तरह ????

उसी अवस्था में 10 मिनिट रंगा की छाती से चिपके रहने के बाद रानी हौले बकरी जैसी मिमियाते हुए बोली – सुनिए! हमको पेसाब लगा है.

ये सुनते ही जग्गा के पैर ब्रेक पर जम गये. वो समझ गया ही बारिश की ठंडक और रंगा के हाथों की गर्मी ने ये किया है. सड़क के साइड में बाइक लगाकर रंगा ने रानी को इशारा करते हुए करीब में एक झाड़ी के उधर मूतने के लिए बोला.

रानी झाड़ के तरफ बढ़ने लगी तो पाया की रंगा-जग्गा भी साथ आ रहे थे. झाड़ तक पहुँच के वो असमंजस में खड़ी रंगा-जग्गा को देखने लगी. दोनो उसकी बेचैनी को भाप गये और रंगा बोला – गुड़िया, अपने होने वाले पति-परमेश्वर से कुच्छ भी छुपाना नहीं चाहिए. फ्रॉक उठाओ और हमको भी तो छटपटा कचौरी का दर्शन दो. और फिर हमको भी तो पेसाब लगा है. तुम्हरे साथ ही कर लेंगे. ऐसे तुमको भी हमारे प्यार का औज़ार दिख जाएगा!

पता नहीं क्यूँ रानी को उनकी गंदी बातें अच्छी लग रही थी. शायद इसलिए की ये सब उसके लिए बिल्कुल नया था और दर्धालि के दिनों से मुक्त एक आज़ादी.

रंगा की ये बात सुनके रानी ने शरारत से अपने होंठ दातों तले दबाते हुए उंगली नचाकर बनावटी अंदाज़ में कहने लगी – आप लोग बहुत गंदे हैं! शादी के पहले ही दुल्हन को सता रहे हैं.

जग्गा ने हँसते हुए रानी से बोला – चलो-चलो अब ज़्यादा शरमाओ मत और हल्का हो लो.
ऐसा कहते हुए वो लपक कर रानी के करीब आया और उसके फ्रॉक के अंदर हाथ डालके चड्डी उतारने लगा.
ये देख रानी उसी शरारती अंदाज़ में उछलके जग्गा के गिरफ़्त से आज़ाद हुई और जीभ निकालके ठेंगा दिखाते हुए चिढ़ा कर बोली – ए..ए..ए..ए..छूट गयी, छूट गयी!

पर इतने में रंगा उसके पीछे से आया और बिजली की गति से रानी के फ्रॉक में हाथ डालके उसकी चड्डी नीचे खीच दी. रानी ने सकपकाकर पीछे देखा और बनावटी मायूसी से बोली – उउउउउउउ….आप बड़े बदमास हैं. जीत गये आप.

रंगा जो अपने घुटनो के बल था इनाम के स्वरूप रानी की चड्डी उसके पैरों से निकाल कर सूंघने लगा. जग्गा के आँखों में लालच थी जिसे देख रंगा ने चड्डी उसकी तरफ उछाल दी. जग्गा भी पागलों के समान उस पीली चड्डी को सूंघने लगा. उसकी आँखें मदहोशी में डूबने लगी.

उनकी इस हरकत को देख रानी को बड़ा अचरज हुआ और उसने पूछा – छी-छी, ई क्या कर रहे हैं आपलोग. गंदा चीज़ को सूंघ के इतना मज़ा ले रहे हैं???
रंगा हसा और बोला – अरे हमारी रानी, तुम्हार खुश्बू में इतना नशा है जितना हमार गांजा के चिलम में भी नही है. चलो अब साथ में मूतेन्गे.
पर रानी को अब भी थोड़ा लाज आ रहा था. दस साल के उमर के बाद तो उसके बापू ने भी उसे कभी नंगा नही देखा तो फिर अब तो वह जवान थी और ये बिल्कुल अजनबी.
वो इस सोच में डूबी थी की देखा रंगा-जग्गा ने अपनी ज़िप खोलके अपने लंड निकाले और शुरू हो गये.
लंड का मूतने के सिवा क्या काम होता है ये मालूम ना होने के बावजूद भी रानी उनके लंड का साइज़ देख कर सिहर उठी और बदन में एक ठंडी लहर दौड़ी जिसके वजह से उसके रोंगटे खड़े हो गये.
उसकी हैरानी तब टूटी जब रंगा अपने लंड को झटकते हुए ज़िप में डाला और बोला – का सोच रही है बचिया! मूतना नही है का?
रानी के मूह से सिर्फ़ इतना ही निकला – ह….हां.
तो फिर मूत – रंगा बोला.
रानी तो वैसे भी समझ गयी थी की मूतना उसे इनके सामने ही पड़ेगा सो उसने आख़िर ट्राइ किया – आप लोग मूह तो फेर लीजिए ना!
ठीक है, ठीक है. ये कहकर दोनो ने मूह फेर लिया.
रानी ने धीरे से अपना गीला फ्रॉक कमर से सरकाते हुए घुटनों तक लाई और नीचे बैठ कर मूतने लगी.
मूत की धार की आवाज़ सुन दोनो झट से पलट गये और रानी की आगे पीछे आकर झुक गये और उसकी चूत और गांद देखने लगे. रानी बिलकुर शर्मा के झेप गयी. पर पेसाब इतने ज़ोर से लगी थी की बीच में कंट्रोल भी नही कर पा रही थी.
उसने मिमियाते हुए गिडगीडा कर बोली – आपलोग चीटिंग किए. ई अच्छी बात नही है.
रंगा जो की आगे की तरफ था रानी के मूत की धार को सूंघ रहा था और उसकी अनछुई फूले कचौरी जैसी चूत को देखकर पागल हो गया और छप से अपना मूह रानी के चूत के करीब लाया और पेसाब की धार को पीने लगा.
पीछे जग्गा अपना नाक रानी के गांद के छेद में सटा कर सूंघ रहा था और मस्त हुआ जा रहा था.
कुकछ सेकेंड्स में रानी खाली होकर उठी और घिन से मूह बनाते हुए बोली – आप लोग बहुत गंदे हैं. कही कोई पेसाब थोड़े पीता है किसी का?
रंगा जो अभी भी उस जायके का चटखारा ले रहा था, होठों पे जीभ फेरते हुए बोला – गुड़िया रानी, तुम तो हमार जिंदगी का हिस्सा बनने वाली हो तो फिर तुमसे कैसा शरम. हमारा सब अच्छा बुरा तुम्हारा और तुम्हारा सब हमारा. मा बच्चे को दूध पिलाती है तो का गंदा बात है? दो प्रेमी चुम्मा लेते है तो एक दूसरे क़ा थुक पीते है, का वो गंदी बात है? जब ई गंदा नही है तो हमारी रानी का पेसाब हम पिए तो कौन सा घिन है??
रंगा का ये तर्क बनावटी थे रानी को सुनके ऐसा लगा जैसे वो दोनो उसे बहुत चाहते है और वो सचमुच उसके लिए भगवान द्वारा भेजे हुए फरिश्ते है.
रानी ने नेज़रें नीचे झुकाए बोली – हमका माफ़ कर दो. हम बहुत छ्होटे हैं ई सब बात समझने के लिए. आप दोनो सचमुच फरिश्ता है जो हमको नरक से निकालके स्वर्ग ले जा रहे हैं.
फारिग होने के बाद रानी ने उनसे अपनी चड्डी माँगी तो रंगा ने उसे दूर झाड़ियों में उच्छाल दिया और बोला – अब इसका कौनो ज़रूरत नाही है. और वैसे भी गीली चड्डी पहेनोगी तो ठंड लग जाएगी.
रानी को भी उसकी बात सही जान पड़ी.
जग्गा ने बाइक स्टार्ट की और रानी पहले की तरह रंगा के तरफ मूह करके थकान की वजह से उसके छाति में सर च्छूपा के सो गयी.
बाकी पूरे 1 घंटे के सफ़र में रंगा के हाथ रानी के नंगे चूतडो पर सरसराते रहे और कभी उसके गांद तो कभी चूत पर क्रीड़ा करते रहे. कभी बीच बीच में रानी चिहुक कर उठ जाती अगर रंगा उसके चूत के दानो पर हरकत करता. पर रंगा ने अपनी हद लिमिटेड रखी और रानी को ज़्यादा परेशान नही किया.
उन दोनों को मालूम था की ये सिर्फ़ शुरूवात है और आज रात शादी और सुहाग रात के बाद अभी उन्हे रानी के साथ और भी खेल खेलने है!!!!!!!!
रानी की नींद खुली जब एक झटके से बाइक रुकी और उसका सर रंगा के ठुड्डी से टकराया. उसने अचकचाते हुए आँखें खोली तो देखा की वो जंगल के मॅढिया में कही थे और वहाँ एक दो मंज़िल का पक्का मकान था. रंगा ने उसे गोद में उठाया और जग्गा के साथ अंदर आ गया. यह ड्रॉयिंग रूम था. कुछ सोफा-कुर्सियों के अलावा यहाँ एक छ्होटा टेबल बार भी था जिसमे देसी-विदेशी सब तरह के विस्की-रूम और बियर रखे थे. अगला बेडरूम था. उफ्फ…. ऐसा इंटीरियर जिसे देखकर किसी इंपोटेंट इंसान का भी लंड खड़ा होकर झाड़ जाए. ये एक गोलाकार कमरा था जिसमे चारो तरफ दीवारों पर अश्लील फोटो चिपके हुए थे. कामसुत्रा के सारे आसान भी डेपिक्टेड थे. कमरे के बीचो-बीच 8’*8’ का बड़ा गद्देदार पलंग था जिसपर मखमल का चादर और कंबल था. बिस्तर के दोनो तरफ शोकेस थे जिसमे प्राचीन पत्थरों की मूर्तियाँ थी जो स्त्री-पुरुष के संभोग की व्याख्या कर रहे थे.
ये सब देखकर रानी शरम से लाल हुए जा रही थी. उसका दिल जोरो से धड़क रहा था और ना जाने क्यूँ उन तस्वीरों को देख उसे एक मीठा एहसास हो रहा था जो उसके जांघों के बीच बार-बार एक सिरहन पैदा कर रही थी.
इन्ही एहसासों में खोई थी जब रंगा ने उसे गोद से नीचे उतरा और एसी ऑन कर दिया.
हालाँकि गर्मी का मौसम ना था पर इन सांड़ों को तो हमेशा ही गर्मी होती रहती थी

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