दोनों की लुगाई-2

जब दिमाग़ सोचने की हालत में हुआ तो पाया की वो करीब 4-5 किलोमीटर आगे गाओं के बाहर निकल गये थे.

रंगा ने उसका बस्ता निकाल के सड़क के किनारे नाल्ले मैं फेक दिया और रानी के मूह पर से हाथ हटा दिया. तेज बारिश की वजह से सड़क सुनसान था और वैसे भी वो अब हाइवे पे शहर के बाहर आ गये थे. डेढ़ घंटे का सफ़र था उनके घर तक का.

रानी मूह पर से हाथ हट ते ही रोते हुए मचलने लगी की उसे छ्चोड़ दो, कहाँ ले जा रहे हैं हमको, हमारे घर जाना है इत्यादि. रंगा ने अपनी लूंबू रामपुरी निकाल के उसके गर्दन पे रखा और कहा – तू कहीं नही जा रही गुड़िया, हमारे साथ स्वर्ग में चलो. कामदेव का प्यार देंगे और तुमको परी बना देंगे.

रानी कुछ समझ ना पाई और सुबुक्ते हुए कहने लगी – मा मारेगी अगर लेट हुए तो, बाबूजी तो बेल्ट से मारेंगे. आज खाना भी नही मिलेगा अगर घर पहूचके काम नही किए तो.

रंगा प्यार भरे स्वर में बोला – का गुड़िया, मा और बाबूजी प्यार नही करते का तुमको.
रानी बोली – नहीं, बहुत मारते हैं कहे है कि हम लड़का नही हैं इसलिए. बाबूजी मा के मारते हैं और मा हमारे उपर गुस्सा निकालती है.
रंगा – कौनो बात नही गुड़िया रानी, अब तुमको घर जावे की कौनो ज़रूरत नही. हमारे साथ चल खूब सुख से रहेगी. खूब खाए पिए के मिली और रानी बना के रखेंगे, का नाम बा तोहार. ( क्या नाम है तुम्हारा )
रानी – रानी!

रंगा – अरे वा तोहार तो नाम भी रानी है. चल हमारी रानी बन के रहेगी तोका कुच्छ भी करे के ज़रूरत ना पड़ी.
रानी ये बातें सुनके थोड़ी शांत हुई पर उसे ये समझ नही आ रहा था कि कोई क्यूँ उसे महारानी बना के रखेगा.
असमंजस में वो बोली – पर हमको कहाँ ले जैबे ( हमको कहाँ ले जा रहे हो ) और काहे कुच्छ भी ना करे के पड़ी. हम तो ग़रीब घर के नसीब फूटल लड़की बनी?
अब रंगा ने मुस्कुराते हुए उसके गाल पर एक पप्पी ली और कहा – गुड़िया रानी, समझो हमको भगवान ने आपन सबसे सुंदर गुड़िया का खूब अच्छा से ख़याल रखे खातिर भेजा है. हम दोनो अप्सरा जैसन सुंदर अपनी रानी का खूब देखभाल करब और बदला में तुम हमार.
रानी – धत! हम कहाँ सुंदर बनी.सब हमको काली कहके चिड़ाते है.
रंगा – दुर ( हट) पागल! काली होने से कोई असुंदर थोड़े हो जाता है. तुम तो काजोल के जैसी सुंदर और प्यारी हो.
रानी लजा गयी और सर झुका के मुस्कराने लगी.

रंगा जो अब तक उसके कमर पे अपने दोनो हाथ रखे हुए था अब उसके चूचियों पर दोनो हथेलियों को रखके बोला – गुड़िया रानी, तुम हम दोनों की लुगाई बनोगी ना?

रानी थोड़ा सपकपाई और पूछी – दोनो की लुगाई???

रंगा – हां रानी, और इसमे बुराई का है. पांडवों की भी तो एक ही लुगाई थी द्रौपदी. फिर हम तो दो ही हैं . और फिर हम दोनो जब तुम्हारा खूब ख़याल रखेंगे तो तुमको भी तो दोनो के तरफ आपन लुगाई वाला काम करे के पड़ी ना. रोज तोहरा के खिलौना, जेवर, कपड़ा, पकवान तो हम दोनो लाईब ना? अब देखो हमको भगवान ने कहा की तुमको पूरा सुख दे जो तुहरा के अभी तक ना मिला. उ बोले की दिन-रात तुमको प्यार देवे और कभी अपने से अलग ना करे. और बोले की ई एक ही तरह से हो सकत है अगर हम दोनो तुमसे बियाह कर के आपन दुल्हन बना ले.

रानी “ धत” कहते हुए पीछे रंगा के छाती में मूह छिपा लिया.

इन अनपढ़ काले ग़रीब घर की लड़कियों को चाहे कोई ज्ञान ना हो पर इतना ज़रूर एहसास होता है की 15-18 साल के उमर तक पहुचते ही शादी करके अपने मरद का घर सजाना होता है और लड़के जानके घर चलाने में मदद करना.

हालाकी रानी को ये एहसास ना था की मर्द की किन ज़रूरतों का ख़याल रखना होता है और बच्चे कैसे जनते है. फिर भी वो ये सोचके खुश थी की उसे अपनी मा के जैसा पति नही मिला.
इन्ही ख़यालो में वो खोई थी जब रंगा ने उसका टी-शर्ट धीरे से खींच कर स्कर्ट से निकाल दिया और उसके अंदर हाथ डालके रानी के कमर को थाम लिया. रानी उस गर्मी का एहसास कर चिहुक पड़ी.

रंगा ने उसे अपने करीब खीचके अपने जांघों पे बिठा दिया.

रानी चिहुकते हुए बोली – उईईईई माआआ! कुछ गड़ रहा है.

रंगा हस्ते हुए बोला – अरे गुड़िया इहे तो हमार प्यार करे के समान बा इहे तो तोहरा के सुंदर बच्चा देबे.
रानी कुछ समझ ना पाई और उत्सुकता से पूछी – उ कैसे

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