दोनों की लुगाई-14

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रानी सहम्ते हुए बोली – देख लीजिए, आप ही का गुड़िया हैं, कहीं कुछ हो गया तो आपलोग का सेवा नही कर पाएँगे!
जग्गा ने श्योर करते हुए कहा – कुछ नही होगा, अब तो तुम दो-दो लंड लेने के लिए तैयार हो चुकी हो मेरी रानी! एक चूत में और एक गांद में.

रानी ने उसकी धूर्त बातें सुनकर ‘धात’ कहके शर्मा गयी.

जग्गा ने अपनी बीच की उंगली पर ढेर सारा थूक लगाया और पीछे से रानी के चूत पर फिराते हुए आधा अंदर घुसा के पेलने लगा. फिर से चूत में कुछ महसूस कर पहले तो रानी को हल्का सा दर्द हुआ पर फिर मज़ा आने लगा.
अब उसे माला और जग्गा की बात सही लग रही थी की ‘पहली बार सज़ा, बाद में फिर मज़ा’.

5 मिनट में रानी की चूत गीली हो गयी और वो उखड़ी साँसों से सीसीयाने लगी.
अया …………. धीरे कीजीएना………..अच्छा लग रहा है………..हाआआअन हां…..और थोडा अंदर डालिएना………आआआआआआः………….सीईईई………..सीईईईईईईईईईईईईई……सी….सी.
जग्गा ने महसूस किया की रानी के चूची और घुंडी टाइट हो गये थे तो उसने सही वक़्त जान अपने लंड को चूत के मुहाने पर लाया और हल्के से एक दबाव से 3” अंदर घुसा दिया.
हल्के दर्द से रानी के मूह से एक हल्की ‘आह’ निकली और वो आगे की तरफ सरकी पर जग्गा ने उसे थामे रखा. उसने रानी के दोनो पैर घुटनो से मॉड्कर छाती तक उपर उठा दिया था जिससे चोदने में आसानी हो रही थी. उसने रानी को अब यूँ जाकड़ रखा था जैसे वो रब्बर की एक गुड़िया हो और रुई की तरह हल्की. सक-सक करता हुआ वो रानी के चूत की गहराई अपने लंड से मापता जा रहा था.
8” तक पेलने के बाद रानी को थोड़ा दर्द हुआ तो वो उसके गर्दन और कान की लाओं पर चूमने-चाटने लगा. रानी झट से मस्ता गयी और धीरे-धीरे अपनी कमर को जग्गा के धक्कों के साथ मेल करती हुई आगे-पीछे करने लगी. उसकी आँखें बूँद थी और उसे लग रहा था की वो सातवे आसमान में उड़ रही हो. चेहरे पर मस्ती से मुस्कुराहट छाइ हुई थी और लबों से कुछ भी आंट-शॅंट निकल रहा था…. हाआन………ऐसे ही उड़ना है हमको……….एकदम हलका लग रहा है………………बहुत बादल है यहाँ……………..अहह……..माआआअ……….ज़ोर उड़ाएना हमको…………

जग्गा उसकी भोली बुदबुदाहट सुनकर और मस्त हो गया और उसने एक हाथ से रानी की चूचियों को कस्के जकड़ा और दूसरे से उसकी मुड़े पैरो को उठा लिया और धक्के की रफ़्तार बढ़ा दी. अब उसका पूरा 10” रानी के गर्भ पर दस्तक कर रहा था. च्चप्प्प्प्प……….ठप्प्प्प….ठप्प्प्प्प्प्प्प………सट-सटासट आवाज़ के साथ पिस्टन गाड़ी की रफ़्तार बढ़ाए जा रही था. इसके साथ रानी के पायल की चमचमाहट भी माहौल में रंग भर रही थी.
10 मिनट में रानी के बदन ने 2 बार झटके लेकर ये सूचित कर दिया था की उसके खेत में बाढ़ आ गयी थी.
पर जग्गा तो 15 मिनट तक अपने 2” मोटे लंड से रानी की गुलाबी चूत को पेलता रहा और फिर अपने कमर को एक करारा झटका देकर रानी की गांद पर दबा दिया और रानी के बगीचे में पानी से सीचाई कर दी. ये पानी खाद का काम कर एक दिन मोहक फूलों को जनम देंगे.
गरमागरम वीर्य की धार गर्भ में महसूस करते ही रानी के मुँह से एक ठंडी आआआआअहह निकल गयी.

और 5 मिनट तक ये तसल्ली होने पर की सारा वीर्या रानी की क्यारी में जब्त हो गया है तो जग्गा ने धीरे से अपना लंड नहर से निकाल लिया.

इस चुदाई से रानी को बहुत आनंद आया था. पहले अनुभव के बाद उसने सोचा भी नही था की ये क्रीड़ा इतना सुख देगी.
उसे जग्गा पर बहुत प्यार आया और वो उसकी तरफ करवट कर खुद से उसके होठों को चूमने लगी. जग्गा ने उसे अपने बाहों में भर कर अपनी छाती से चिपका लिया और उसे प्रगाढ़ चुंबन लेने लगा. रानी की लार जी भर पीने एके बाद उसने रानी को अलग किया. फिर रानी ने जग्गा के विशाल छाती में अपना सर च्छुपाया और अपनी एक जाँघ उसके उपर रख नन्ही गुड़िया जैसे सिकुड़कर सो गयी.
सुबह करीब 9 बजे रंगा-जग्गा की नींद खुल गयी. रानी अभी भी सो रही थी. उसके दोनो पैर वी-शेप में फैले हुए थे और एक हाथ सर के उपर और दूसरा बॉडी के साइड में. पूरी बेफिक्री से सो रही थी वो. उसके चेहरे की मासूमियत और दुल्हन जैसा सज़ा-धज़ा बदन देख दोनो सोचने लगे की अच्छा हुआ जो इसने उनके बहकावे में आकर अपना सब-कुच्छ लुटाने को तैयार हो गयी नही तो उन्हे भी रानी का रेप करना पसंद नही आता.

रंगा ने एक 10“ के हाइट और 3 फीट चौड़ाई वाले टब में ढेर सारा रूम डालकर रख दिया और रानी के उठने का इंतेज़ार करने लगा.
करीब 10 बजे रानी की नींद उचट गयी और वो पलंग पर उठ बैठी. अपनी नगनवस्था पर उसके गाल लाल हो गये और वो झॅट से अपनी चोली पहन ली और घांघरा नीचे सरकाते हुई बेड से उतरी.
चूत और कमर तो अभी भी टूट रहा था इसलिए वो थोड़ा लड़खड़ा गयी. खुद को संभालते हुए वो नीचे रसोई में आ गयी. दोनो उसे कहीं नज़र नही आ रहे थे. इतने में रंगा उसे बाथरूम से निकलता नज़र आया तो उसकी तरफ लपकी और सर पे पल्लू लेते हुए झुक कर उसके पैर छू लिए.
रंगा ने उसे आशीर्वाद देते हुए बोला – गुड़िया! रात ठीक से नींद आया रहे की ना? हमरे सोने के बाद कुच्छ आवाज़ हो रहा था और पलंग हिल भी रहा था. वो मुस्कुराते हुए बोला.
उसे मालूम था की जग्गा ने रात में दूसरी पारी खेली थी.
उसके इस सवाल पे रानी झहेप गयी और लजा कर मूह फेर कर किचन में आ गयी.
रंगा उसके पीछे आया और बोला – नही बताना चाहती तो ना बताओ, पर ई तो बताओ की हमरे प्रसाद का कब भोग करोगी बाकी जगह.
चुहलबाज़ी करते हुए रंगा ने रानी के कमर पर चुटकी काटी.
रानी को जग्गा के लंड का अपनी चूत पर हुए क्रूर प्रहार याद आ गये और उससे पैदा होने वाली मस्ती की सोच वो मस्ता गयी.

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