देसी विलेज़ गर्ल से दूसरी मुलाकात में चुत चुदाई

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नमस्कार दोस्तो, एक बार फिर मैं एक बार फिर अपने साथ घटी एक रसीली सी घटना का जिक्र एक कहानी के रूप में कर रहा हूँ. पहली चुदाई की कहानी
पहली चुदाई में सील टूटी और गांड फटी
काफी सराही गई, काफी लोगों ने मेल किए, उस पर कुछ कमेंट्स भी आए. मैंने अधिकतर के रिप्लाई किए, कुछ का नहीं कर पाया, उसके लिए माफ़ी चाहता हूँ. कुछ ऐसों ने मेरी मेल आई डी पर मेल किए थे, जिनके साथ मैं अभी भी बात करता हूँ. कुछ नए दोस्त भी मिले हैं तो मैं अन्तर्वासना साईट को धन्यवाद देना चाहूँगा कि उसने मेरी कहानी पब्लिश करके कुछ नए दोस्त मिलाए.. जिन्होंने मुझे बताया कि शायद मैं एक अच्छा राइटर हूँ.

मेरी पहली कहानी की नायिका प्रेमा के साथ यहाँ दूसरी मुलाकात लिख रहा हूँ, जो करीब दो माह बाद हुई. इस बीच में कभी कभी प्रेमा से मुलाकात हो जाती थी, पर कभी भी दुबारा सेक्स का नाम नहीं लिया क्योंकि मेरे एक माह तो एग्जाम चले थे और डर भी लग रहा था. इसलिए न तो मैंने उससे इस बारे में कहा और न ही उसने.

अब जब एग्जाम समाप्त हो गए थे तो एक माह बाद गाँव गया था, जब उसके घर के तरफ गया था तो उसने एक नजर मेरी तरफ देखा और फिर एक लड़की से बात करने लग गई. उसकी नजरों में गुस्सा सा फूट रहा था. फिर मैं उस लड़की के पास गया, जिससे वो बात कर रही थी. उसका नाम मोनी था.

उसने मुझे देखा और बोली- अरे भैया, अबके तो तुम बला(बहुत) दिनान में(दिनों में) आए हो, का गामें (गाँव को) भूल गए का?
“अरे नाएं(नहीं)..” मैं बोला- पेपर चल रहे थे.
“कैसे हेगे(हो गए) पेपर?”
मैंने कहा- ठीक हो गए, पूरे साल तो पढ़ाई करी नाई(नहीं), अब एक महीना में कैसे पेपर होगें.. ये तो तू जानती है.

प्रेमा मोनी से बोली- चल भीतर चलते हैं. वो दरवाजे पर खड़े रहकर बात कर रही थी तो मोनी बोली- चलो भैया, भीतर ही बात करंगे.
मैंने कहा- ये तेरा घर थोड़ी है, जो तू बोल रही है.. जिसका घर है वो तो दरवाजे से भागने दे लिए तुमको अन्दर ले जा रही रही है.
तो प्रेमा बोली- जिसे जो समझना हो समझ ले.

फिर मैं ख़राब मूड में उसकी तरफ तीखी निगाहों से उसे देखा और अपने घर आ चला आया, पर उसने ये नहीं कहा कि रुक जाओ.

अब तो गुस्सा सातवें आसमान पर था, सोचा साली घर में बिठाने की भी नहीं बोल रही है. रूपेश अब तो तेरा पत्ता कट गया. इस एक माह में किसी और ने उसे पटा लिया और ये ही सोचते हुए अपने घर पर पहुँच गया.

मेरी उतरी सूरत देखकर मेरी बहन बोली- का हेगो (क्या हो गया) भैया?
मैं बोला- कुछ नहीं.
वो बोली- कछु तो हे गयोय…
मैं बोला- दिमाक खराब मत करे..

ये कहते हुए मैं अपने कमरे में चला गया और उससे बोला- अगर कोई आए तो मना कर देना कि मैं घर पर नहीं हूँ. मैं सो रहा हूँ, कोई डिस्टर्ब न करे.

मैं जाकर अपने बेड पर लेट गया और उस बारे में सोचने लगा. उस कशमकश में जाने कब नींद आ गई और पता नहीं कितना टाइम हो गया. मैं सपने में देख रहा था कि कोई दरवाजा खटखटा रहा था, दो तीन बार दरवाजा बजाया गया था. मैं उठा तो देखा कि सच में कोई दरवाजे को खटखटा रहा है.

मैंने घड़ी देखी शाम के छह बज गए थे. मैं उठकर दरवाजा खोलने गया और आवाज लगाई- कौन है?

तो उसने सपना का नाम लिया, जो मेरी बहन का नाम है. ये आवाज जानी पहचानी थी, तो मैंने झट से दरवाजा खोला और वो आवाज प्रेमा की थी.
दरवाजा खोलते ही वो अन्दर आ गई, मैं इससे पहले में कुछ कहता वो अन्दर आते आते “सपना-सपना..” बुलाने लगी.

मैं बोला- सपना यहाँ नहीं है.
वो बोली- मुझे पता है.
“पता है तो फिर यहाँ क्यों आई?” मैंने कहा.
वो बोली- तुमसे मिलने.
“और सपना कहाँ है? मैंने पूछा.
वो बोली- ईधन लेने गई है.
“तुझे कैसे पता?”
“जब वो (सपना) ईधन लेने के लिए जा रही थी, तो मैंने देख लिया और सोचा अब घर पर कोई नहीं होगा, चलो अब बात करते हैं वो नाराज भी होगें.. नाराज हो?”
मैं बोला- तुम्हें क्या मतलब?
“अच्छा हमें क्या मतलब.. एक महीने में आज खबर सूद(सुध) लेने आये हो.. एक महीना कैसे गुजरा है.. हमसे पूछो. पूरे दिन तुम्हारे घर पर तुम्हारे कमरे में हो जाती है.. रोजाना इसी इंतजार से तुम्हारे घर पर रहती हूँ कि तुम आ रहे होगे.
मैं उसको सुनता रहा.

वो आगे बोली- मम्मी कहती है.. लाली तू ऐसे कर तू वहीं सो जाया कर, सुबह शाम तू तो रोटी बना कर, वहीं दिखती है.. नैक(कुछ) घर के और भी काम कर लिया कर. मैंने कहा काहे माँ रोजाना वहीं पहुँच जावे हो (क्यों वहां रोजाना पहुँच जाती हो). फिर मैं मम्मी से सपना का नाम ले देती हूँ कि हम दोनों वहां पढ़ाई तो कर लेते हैं.
मैं बोला- तो अब?
“अब..” उसने दोनों होंठों से फ्लाइंग किस दी.

फिर मैंने उसके दोनों हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अपनी बाँहों में भर लिया. उसने भी मुझे कस के पकड़ लिया और करीब एक दो मिनट तक ऐसे ही रही.
वो बोली- कितनी शांति मिल रही है.. आज तो बस तुम्हारी बाँहों में मर जाने को जी चाहता है, तुम्हें नहीं पता है ये एक महीना मुझे एक सदी सा लगा है. दो चार दिन और हो जाते, तो मैं भरतपुर आ जाती.
मैं भरतपुर में रह कर पढ़ाई कर रहा था.

मैं बोला- तूने सपना से नहीं पूछा कि मैं कब आऊंगा?
बोली- पूछा था.. तो उसने आज का ही बताया था, पर मुझ पर तो एक एक दिन भारी पड़ रहा था. एक पल एक दिन और एक दिन एक महीना लग रहा था.
मैं बोला- यार, मैं भी तुम्हारी याद में बहुत तड़पा हूँ, पर क्या करूँ एग्जाम जो थे. घर वालों ने साफ़ मना किया था कि जब तक पेपर न हो जाएं, तब तक घर पर मत आ जाना.
वो बोली- क्या घर वालों को शक हो गया है.
मैं बोला- नहीं बस आवारागर्दी में घूमता था, तो उसके लिए मना किया था.
मैं बोला- अब बात नहीं.
वो बोली- मुझे तो बहुत बात करनी है.
मैं बोला- फिर कभी देखेंगे, अभी तो एक प्यारी सी किस दे.

उसने मेरे गाल पर एक लम्बा सा चुम्मा दिया, तो मैंने उसके होंठों से होंठ लगा दिए और होंठ चूसने लगा. वो भी साथ देने लगी.

दो तीन मिनट ही हुए होंगे कि किसी ने दरवाजा खटखटाया. हम दोनों झट से अलग हो गए और बाहर से आवाज आई- भैया… भैया..
मैं बोला- हाँ.
मैं प्रेमा से बोला कि तुम मेरे कमरे में जाओ.. और वो मेरे कमरे में चली गई.

मैंने दरवाजा खोला तो उसके (सपना) सर पर ईधन रखा था (चूल्हे में जलाने वाली लकड़ी). वो उनको चूल्हे पर डालकर दुबारा जाने को हुई.
तो मैंने पूछा कि अब कहाँ जा रही है?
तो बोली कि कंडे (गोबर के उपले) ले आऊँ. कोई काम है?
मैंने कहा- हाँ भूख लगी है.
बोली- अभी दस मिनट में आती हूँ. अब शाम को तो ब्यारी (रात का खाना) बनेगी ही.

सपना ये कहकर चली गई. मैं दरवाजा लगाकर अपने कमरे में आ गया. प्रेमा बेड पर लेटी थी. मैं जाकर उसकी बगल में लेट गया और किस करने लगा.

वो बोली- सपना आ जाएगी.
“उसे अभी आने में दस मिनट हैं. ये कह कर मैं एक भूखे शेर ही भांति उस पर टूट पड़ा. वो भी भूखी शेरनी की भांति मुझ पर टूट पड़ी. हम दोनों एक दूसरे में ऐसे समा गए कि दो जिस्म एक जान हों.
ऊपर से चूमते चूमते मैंने उसको निर्वस्त्र कर दिया और उसने मेरे भी कपड़े उतार दिये, अब मैं चड्डी में था और वो भी चड्डी में थी.

फिर हम दोनों प्यार करने लगे. मैंने अपनी और उसकी पेंटी उतार दी.
वो बोली- कुछ हो गया तो?
मैं बोला- कुछ नहीं होगा.

फिर सोचा कहीं उस दिन के जैसा हो गया तो फिर क्या होगा. अभी दस मिनट में सपना भी आने वाली है. दो तीन मिनट ही शेष बचे थे, तो मैं उसके ऊपर से हट गया और बोला- कपड़े पहन ले सपना आ रही होगी.
मैं खुद भी प्यासा रह गया और उसे भी प्यासी छोड़ दिया. हम दोनों ने कपड़े पहन लिए.
मैं बोला- अभी तू जा और रात में मिलते हैं.

वो बेमन से जाने लगी. मैं दरवाजे के पास छोड़ने गया और उसे एक बार गले से लगाया और किस किया.
उसने ही दरवाजा खोला. मैं उसके पीछे था और फिर देखा तो सामने मेरी मम्मी खड़ी थीं.
हम दोनों ही घबरा गए..
“प्रेमा तू..!” मम्मी बोलीं
“हाँ ताई.. सपना कहाँ है?
मम्मी ने मेरी तरफ देखा- रूपा तू? (घर पर मुझे रूपा कहा जाता है)
“हाँ..” मैंने उन्हें नमस्ते बोला और उनके पैर छुए.
मम्मी बोली- कब आया?
मैं बोला- करीब 3 बजे आ गया था.

अब हम तीनों अन्दर की तरफ आ गए. “पेपर कैसे हेगे (हुए)?
मैंने कहा- बढ़िया हेगे.
प्रेमा बोली- सपना तो कंडा (उपले) लेबे गई है ताई, मैं अभी बईऐ पूछवे आई. (उसी को पूछने आई)
“एक गिलास पानी लाना..” मम्मी ने कहा.
प्रेमा पानी लेने के लिए चली गई.
मम्मी बोलीं- लाला रोटी खा लई का..?
मैं बोला- अभी सपना बनाने वाली है.

इन्हीं बातों का सिलसिला काफी देर तक चलता रहा. प्रेमा पानी लाई और मम्मी को देकर अपने घर की तरफ चली गई.

उस रात हम नहीं मिले. अगले दिन बस थोड़ी देर के लिए मिले, बात की पर ऐसी कोई बात नहीं हुई. हाँ अगले दिन गाँव में हमारे साथ के एक लड़के की लगन सगाई थी, तो तीन दिन बाद बारात थी. तो आज ही “रतजगा..” जो होता है तो उसमें सब औरतें और लड़कियां रतजगे में पूरियां और कुछ खाने का सामान बनाती हैं. उसी रतजगे में प्रेमा से मिलने का प्रोग्राम बनाया. रात के करीब 11 बजे थे.

मैं उस लड़के के घर गया, जिसके घर पर शादी थी और वहां पर प्रेमा, उसकी माँ, गाँव की और औरतें और हमारी मम्मी और सपना भी वहीं थीं. मैंने प्रेमा से आँखों से इशारा किया और मैं चला आया. वो भी मेरे पीछे कुछ कह कर चली आई. मैं तो अपने घर पर चला आया, वो भी पीछे पीछे मेरे ही घर पर ही आ गई. मैंने घर का दरवाजा बंद किया और उसे अपनी गोदी में उठाकर अपने कमरे में ले आया. मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया. उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मैं गिर गया.

मैंने पूछा- क्या कह कर आई है?
बोली- मैंने कह दिया कि मैं सोने जा रही हूँ.
तो फिर सोने क्यों नहीं गई? मैंने पूछा.
“सोने ही तो आई हूँ.” वो इठला कर बोली.

फिर हम दोनों चुम्मा चाटी में लग गए. मैंने उससे कपड़े उतारने को कहा तो बोली- तुम्हीं उतार दो न.
मैंने उसके कपड़े उतार दिए, उसने धीरे धीरे मेरे भी कपड़े उतार दिए.
दोनों नग्न अवस्था में थे. एक दूसरे को प्यार करने लगे. मेरे हाथ तो उसकी छाती पर उसके बोबों को दबा रहे थे और उसके हाथ मेरी पीठ पर थे.

अतिआनंद आ रहा था. मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने सोनू (लंड) को पकड़ा दिया.. तो उसने हाथ खींच लिए. बड़ी जिद करके उसे हाथ से लंड पकड़वाया, पर उसने पकड़ कर फिर छोड़ दिया.
वो बोली- मुझे अच्छा नहीं लग रहा है.
मैं बोला- पर मुझे अच्छा लग रहा है.
बोली- तो तुम ही पकड़ लो.
मैं बोला- तुम्हारे हाथ से पकड़वाना अच्छा लग रहा है प्लीज पकड़ कर आगे पीछे कर ना.

बड़ी मिन्नतों के बाद वो मानी. अब जब वो लंड आगे पीछे करने लगी तो नशा और चढ़ गया.
मैं बोला- मुँह में ले ले एक बार.
तो उसने छोड़ दिया बोली- पागल हो गए हो क्या.. कोई मुँह में लेता भी होगा?
मैं बोला- हाँ सेक्सी मूवी में मुँह में लौंडियां लेती हैं.
“ऐसी भी कोई मूवी होती है?” उसने कहा.
मैंने कहा- हाँ.
उसने कहा- दिखा ना.
मैं बोला- कल दिखा दूँगा, पर अभी मुँह में ले ले.
बोली- नहीं, हाथ में पकड़ कर ही बड़ा अजीब सा लग रहा है.. और तुम मुँह की बात कर रहे हो.

मैंने सोचा ये नहीं मानेगी तो उसे किस करने लगा, वो भी साथ देने लगी.
थोड़ी देर बाद मैं बोला- चूत चाटूं?
वो बोली- छी: कैसी गन्दी बात करते हो.. ये भी कोई चाटने की चीज़ है.
मैं बोला- हाँ.. इंग्लिश मूवी में चाटते हैं.
“वो चाटते होगें.. मैं नहीं चटवाऊंगी.”
मैं बोला- मैं चाट रहा हूँ न.

और मैं उसकी चूत की तरफ मुँह ले गया और उसकी नाभि को चूमा, फिर पेडू को (चूत से ऊपर का और नाभि से नीचे का हिस्सा) चूमा और जैसे ही अपना मुँह और नीचे ले गया तो उसने अपनी दोनों जाँघों को भींच लिया. मैं दोनों टांगों को अलग करने की कोशिश करने लगा. मैंने दोनों टांगों को चौड़ा भी कर दिया और जैसे ही अपना सर उसकी चूत के पास ले गया तो उसने फिर उसने टांगों को भींच लिया.
वो बोली- अगर तुमने ये चाटी तो मैं फिर तुम्हें किस नहीं करूँगी.

उसने ये कहा तो फिर मैं पीछे हट गया और उसकी बगल में आकर लेट गया. अब मैं उसे किस करने लगा और एक उंगली उसकी चूत में करने लगा. उसने झट से मेरा हाथ पीछे कर दिया और बोली- तुम भी ना.. क्या क्या करते हो. तुम शहर में रहकर बहुत बिगड़ गए हो ताई को कहना पड़ेगा.
“तो फिर सारी बातें ही ताई को बता दियो.. अभी तो सब कर लेने दे.”

फिर मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके बोबे, गर्दन, गाल, होंठ सभी को चूमने लगा. वो भी गर्म होने लगी और मेरी पीठ पर हाथ फिराने लगी. मेरी पीठ में अपने नाख़ून गड़ाने लग गई. इससे मुझ में भी जोश आ गया और मैंने उसकी छाती पर अपने दाँतों के निशान बना दिए, जिससे वो कराह उठी. उसके मुँह से जोर से आह की आवाज निकल गई.

वो अपनी कमर को उठाने लगी. मैंने समझ लिया कि अब ये तो ठीक से गरम हो चुकी है और अपने लंड पर थूक लगाकर उसकी चूत पर टेक दिया. वो मदमस्त आवाज में बोली- कहीं पहले जैसी न हो जाए, मुझे डर लग रहा है.
मैं बोला- अब नहीं होगा.
मेरे सोनू(लंड) को उसकी चूत में दो इंच तक प्रवेश मिल गया. अभी भी चूत कसी हुई थी.
वो बोली- दर्द हो रहा है.. अह अह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… अह..उई… माँ.. मरी.. हम्म्म्म..
प्रेमा सीत्कार करने लगी- प्लीज.. ह्म्म्.. प्लीज बाहर निकाल लो.. बहुत दर्द हो रह अहै…हा..
वो कराहती हुई आवाज में मुझे मदहोश कर कर रही थी.

“प्लीजज्ज.. छोड़ दो.. कुछ और कर लो.. आआह दर्द हो रहा है..”
“बस दो मिनट की बात है.. अभी दर्द बंद हो जाएगा.”

मैं धीरे धीरे झटका देने लगा. फिर 15-20 हल्के झटके देने के बाद चूत से पानी रिसने लगा था, तो वो गीली हो गई और चूत ने भी जगह बना दी थी. अब तो पूरा का पूरा सोनू अन्दर चला गया था. वो अभी भी कराह रही थी “आ आ.. आ.. आ.. जोर से..”

फिर मैंने अपने झटके तेज कर दिए उसकी भी सांसें तेज हो गईं और उसने मुझे बहुत चूमते हुए मुझे कस कर पकड़ लिया. मैं छूटने की कोशिश करने लगा पर उसकी पकड़ इतनी टाईट थी कि मैं अपने आपको छुड़ा ही नहीं पाया.
वो अपने चूतड़ों को उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी. मेरे होंठों को अपने होंठों में बड़े ही बुरी तरीके से दबा कर मेरा नीचे का होंठ अपने दांत से काट दिया.

वो इतने आवेश में थी कि इंग्लिश वाली स्मूच किस भी उसकी किस के सामने फीकी लगे. मैं क्या बताऊँ मैं यहाँ लिख नहीं सकता. उस समय मुझे और उसे कैसा लग रहा होगा. शायद ये अहसास उसी को हो सकता है, जो उस स्थिति में पहुँच कर ही जाना जा सकता है.

शायद वो अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच चुकी थी. उसने मेरी पूरी पीठ में नाख़ून गड़ा दिए थे. उसने अपनी दोनों टांगों मेरी मेरी टांगों में ऐसे फंसा दिया कि मैं ऊपर होऊं चोदने के लिए तो भी न होए. करीब दो मिनट बाद उसमें मुझे ढीला छोड़ा और मेरे बालों में हाथ फेरने लगी. मेरे होंठों को ऐसे जकड़ लिया कि जाने खा ही जाएगी.

मैंने भी अपनी रफ्तार तेज कर दी और पच्चीस तीस झटकों के बाद मैं भी उसके ऊपर धराशायी हो गया. अब मैं उसे चूमने लगा, वो भी साथ देने लगी.
दोनों ही निढाल होकर बेड पर पड़े हुए थे.. फिर 5- 6 मिनट के लिए दोनों एक दूसरे से चिपके ऐसे ही रहे.

हम दोनों की सांसें तेज थीं, दोनों पसीने में लथपथ थे. पंखा चल रहा था पर दोनों के शरीर से मानो आग निकल रही थी.
मैंने उससे पूछा- कैसा लगा?
वो बोली- चुप रहो और सो जाओ.
मैंने कहा- आज की रात सोएगी.. आज तो हम मजे लेंगे.. बड़े दिनों के बाद मिली है. सारी कसर निकाल लूँगा.
वो बोली- और कुछ कसर रह गई है का?
मैं बोला- हाँ.. मुँह में ले ले..
वो बोली- तुम भी न.. अब मैं सो रही हूँ और उसने मेरी बाजू पर अपना सर रख कर एक हाथ मेरी छाती पर और एक पैर मेरी टांगों में रखकर रात का आनंद लेने लगी.

पर अभी सोये करीब आधा घंटा हुआ था. हम दोनों आराम करने के बाद बातचीत करके फिर से सेक्स का मजा लेने लगे.

ये सिलसिला पूरी रात चलता रहा, न तो वो सोई न ही मैं.. और सेक्स के लिए न तो उसने मना किया, न ही मैंने.

अगली बार सेक्स बड़ी ही अलग इंग्लिश स्टाइल और कामसूत्र की स्टाइल में किया. वो चुदाई की कहानी कभी और दिन लिखूंगा.

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