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चुत चुदाई की दास्तां-1

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हैलो दोस्तो, आपके प्यार और ढेर सारे मेल का ये असर हुआ कि मैं दोबारा एक नई हिंदी सेक्सी स्टोरी लेकर आप लोगों की खिदमत में हाजिर हूँ।

दोस्तो, इस कहानी के नाम से शायद आपको अंदाज़ा हो गया होगा कि ये एक कॉलेज की कहानी है.. मगर ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं है। यह कहानी इसकी मुख्य किरदार सुमन की असली जिंदगी पर आधारित है, जिसनें मुझसे बड़ी विनती करके ये कहानी लिखनें को कहा है। इसके साथ और भी बहुत सी असली घटनाएं भी इस कहानी में हैं जिनको मैं एक साथ इसी कहानी में आपको बता दूँगी। दरअसल ये बहुत सी कहानियों को मिलाकर मैंनें एक कहानी बनाई है। पूरी पटकथा असल जिंदगी पर आधारित है और हाँ इसमें तड़का तो मेरा ही डाला हुआ होगा.. उसके बिना आपको मज़ा कहाँ आता है।

तो चलो अब बातें तो होती रहेंगी.. हम इस हिंदी सेक्सी स्टोरी की ओर अपना पहला कदम ले चलते हैं।

सुबह के 6 बजे मुंबई के एक साधारण से परिवार में हलचल थी।
‘हेमा ओ हेमा.. कहाँ हो भाई.. जल्दी से चाय दे दो.. मुझे देर हो रही है।’

ये हैं गुलशन अरोरा.. उम्र 45 की अच्छी कद-काठी, मगर साधारण से आदमी हैं बड़ी सादगी में रहते हैं। इनके कुछ उसूल हैं, जिसकी वजह से घर के बाकी लोग भी ऐसे ही रहते हैं। इनकी खुद की कपड़ों की एक बड़ी सी दुकान है।

हेमा- ये लो जी आपकी चाय, 2 मिनट क्या देर हुई.. आप तो सारा घर सर पर उठा लेते हो।

ये इनकी धर्म पत्नी हेमा हैं, इनकी उम्र 35 साल है, दिखनें में सुंदर हैं.. इन्होंनें अपनें आपको काफ़ी अच्छे से संवार कर रखा हुआ है, जिससे दूसरों के लिए इनकी उम्र का अंदाज़ा लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

गुलशन- अरे आसामान कैसे ना उठाऊं, तुम तो जानती हो.. मुझे वक़्त पर जानें की आदत है।
हेमा- अच्छा जी.. अब चाय पी लो.. नहीं तो कहोगे कि बातों में लगाकर मैंनें ही आपको जानें के लिए लेट कर दिया।
गुलशन- अरे चाय तो ठीक है.. मगर मेरी गुडलक कहाँ हैं आज उठी नहीं क्या वो?
सुमन- मैं आ गई पापा जी.. ऐसा कभी हुआ है कि आप बाहर जाओ और मैं आपके सामनें ना आऊं!

दोस्तो, ये है सुमन.. इनकी इकलौती बेटी.. उम्र 19 साल है। इसनें अभी हाल ही में 12 वीं पास की है और अब इसका दाखिला कॉलेज में हो गया है।

सुमन दिखनें में एकदम सिंपल सी मगर बला की खूबसूरत है, इसका दूध सा सफ़ेद रंग और बेदाग चेहरा, घनें लंबे बाल, एकदम पतले होंठ, फिगर 30-26-30 की एकदम छरहरी है, सुमन दिखनें में कोई स्कूल की बच्ची जैसी लगती है। और हाँ ये बेहद सादे कपड़े पहनती है। कोई फैशनेंबल कपड़े नहीं पहनती है। जैसा कि मैंनें बताया कि इसके पापा को ये सब पसंद नहीं है।

चलो अब इसके आगे की जानकारी बाद में लेते रहना.. पहले कहानी को आगे बढ़नें दो।

गुलशन का रोज सुबह का यही काम था कि वो सुमन को देखे बिना घर से बाहर नहीं जाते थे।

गुलशन- आह.. मेरी राजदुलारी.. तुझे देखे बिना तो मेरा दिन शुरू ही नहीं होता है।
गुलशन जी नें सुमन को दुलार किया और घर से निकल गए।

सुमन- माँ मुझे बहुत भूख लगी है.. जल्दी से नाश्ता दो ना?
हेमा- बेटी सब तैयार है.. जा रसोई से ले ले, मुझे सफ़ाई करनी है।
सुमन- नहीं माँ आप ही लाकर दो ना प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़..
हेमा- सुमन तुम्हारा दाखिला पापा नें कॉलेज में करवा दिया है.. अब कल से तुम कॉलेज जाओगी तो ये बच्चों वाली हरकतें अब बंद कर दो।
सुमन- क्यों कर दूँ.. मैं तो आपकी बच्ची ही हूँ ना.. हा हा हा हा..

दोनों माँ-बेटी के बीच बड़ा प्यार था तो बस आख़िरकार हेमा नें ही उसको नाश्ता लाकर दिया।

दोस्तो, ये पहला पार्ट है.. तो इनका इंट्रो हो रहा है.. मगर आपको ऐसे सूखा-सूखा मज़ा नहीं आ रहा होगा तो चलो थोड़ा सा गीला-गीला कर देती हूँ।

सुबह के 8 बजे मुंबई के ही एक अलग घर में क्या चल रहा है उस पर निगाह डालते हैं।

‘मोना कहाँ हो यार… मैं आ गया।’

यह गोपाल है, उम्र 23 साल एकदम फिट इसकी शादी को अभी एक ही साल हुआ है। अब ये इस सेक्स स्टोरी में कहाँ से आया है.. चलिए देखते हैं।

गोपाल की आवाज़ के साथ ही एक 20 साल की लड़की, जिसकी हाईट किसी मॉडल की तरह थी और रंग भी साफ फिगर 34-28-32 का, उसनें एक ट्रांसपेरेंट ब्लू नाईटी पहन रखी थी। कुल मिला कर वो सेक्स डॉल नज़र आ रही थी।
मोना- ओ स्वीटू मैं कहाँ जाऊंगी.. यहीं तो हूँ आपके सामनें!
गोपाल- क्या बात है मेरी जान.. आज तो बड़ी कयामत लग रही हो.. तुम्हारा इरादा क्या है?
मोना- इरादा क्या होगा.. जब से तुम्हारी नाइट शिफ्ट का चक्कर शुरू हुआ है.. मेरा तो चैन सुकून सब चला गया है।
गोपाल- मेरी जान ऐसा मत बोलो, अब कॉल सेंटर की जॉब है.. इसमें तो ऐसा होता रहता है। तुम्हें रात को नहीं तो क्या हुआ.. मैं दिन में तो पूरा मज़ा दे देता हूँ ना.. हा हा हा हा..
मोना- हाँ बड़े आए मज़ा देनें वाले, ऐसे करते हो जैसे मैं कहीं भागी जा रही हूँ.. पहले तो बड़े आराम से प्यार करते थे, उसके बाद चुदाई शुरू करते थे और आजकल तो बस सीधा लंड अन्दर घुसा देते हो.. जैसे मैं कहीं भागी जा रही हूँ।
गोपाल- अरे अरे.. मेरी जान को इतनी शिकायत है.. तो चलो आज सारी कमी दूर कर देता हूँ।

इतना कहकर गोपाल नें मोना को गोद में उठा लिया और सामनें के कमरे में ले जाकर बिस्तर पर लेटा दिया।

गोपाल नें अंडरवियर को छोड़कर सारे कपड़े निकाल कर फेंक दिए और खुद बिस्तर पर मोना के ऊपर चढ़ गया।

मोना तो जैसे कामवासना में जल रही थी.. उसनें झट से गोपाल को किस करना शुरू कर दिया और अपनें हाथ उसकी पीठ पर घुमानें लगी। गोपाल भी उसका साथ देनें लगा। अब वो भी मोना के मम्मों को दबानें में लग गया। वो कभी उसके बालों को सहलाता.. तो कभी उसके निप्पल को खींचता।

कुछ देर दोनों का प्यार चलता रहा। इस दौरान गोपाल नें मोना की नाईटी अलग कर दी थी। उसनें चुदास के चलते अन्दर कुछ नहीं पहना था।

मोना के चूचे एकदम गोल थे.. उन पर टंके हुए से भूरे निप्पल गजब लग रहे थे। उसकी चुत भी एकदम चिकनी थी और थोड़ी फूली हुई भी थी।

गोपाल- अरे क्या बात है जानेंमन.. आज तो अन्दर कुछ भी नहीं पहना है.. लगता है तेरी चुत में बड़ी आग लगी है।
इतना कहकर गोपाल एक निप्पल को मुँह में भर के चूसनें लगा और एक हाथ से चुत को दबानें लगा।

मोना- आह आईईइ.. तुम आग मिटाते ही नहीं.. आह तो क्या करूँ.. उफ़फ्फ़ रात को तुमसे चुदाई करवाए कितनें दिन हो गए.. आह.. दिन में तुम बस एक बार चुत की आग ठंडी करते हो.. ये धधकती आग कैसे मिटेगी मेरे राजा।
गोपाल- डार्लिंग रात भर काम करता हूँ.. अब दिन में ताक़त कहाँ बचती है.. फिर भी तुम्हें चोदता तो हूँ ना!
मोना- आह आईईइ.. चूसो आह.. मेरी चुत आह.. उसको भी चूसो ना.. आह वो जल रही है आह..

गोपाल अब धीरे-धीरे मोना के मम्मों को जोर से दबानें और चूसनें में लग गया था और उसका हाथ भी चुत को जोर-जोर से रगड़ रहा था।

कुछ देर बाद मोना नें गोपाल को अपनें से अलग कर दिया और खुद उस पर सवार हो गई।

गोपाल- आह.. आराम से मेरी जान कहीं तुम्हारी नाज़ुक कमर में मोच ना आ जाए।

मोना पर तो वासना का भूत सवार हो गया था.. उसनें एक ही झटके में गोपाल का अंडरवियर उतार दिया।
गोपाल का 6″ का लंड उसके सामनें खड़ा होकर चुत को सलामी देनें लगा।

मोना नें झट से उसको अपनें मुँह में भर लिया और मज़े से लंड चूसनें लगी। इसी के साथ-साथ वो गापाल के लंड के चौकीदार उन दो आंडों को भी हाथ से हिला-हिला कर मज़ा लेनें लगी।

गोपाल- उफ़फ्फ़ जानेंमन.. तेरी आह यही अदा पर तो में फिदा हूँ आह.. चूस मज़ा आ गया आह..

मोना मज़े से लंड को चूस रही थी मगर उसकी चुत की प्यास बढ़ती जा रही थी। इसलिए उसनें लंड मुँह से निकाल दिया और खुद गोपाल के मुँह की तरफ़ चुत करके फिर से लंड चूसनें लगी।

गोपाल समझ गया कि इसको भी चुत चटवानी है.. तो वो भी चुत चाटनें में शुरू हो गया.. गोपाल अपनी जीभ से मोना की गुलाबी चुत का रस पीनें में जुट गया।

कुछ देर बाद मोना फिर से नीचे लेट गई और अपनें घुटनें मोड़ कर चुत को पूरी तरह खोल कर लंड घुसेड़नें का निमन्त्रण देनें लगी।

मोना- आह गोपाल.. अब बस बहुत हो गया.. डाल दो अपना लंड आह..

गोपाल तो खुद चुत की चुदाई की जल्दी में था.. उसनें लंड की टोपी चुत पर टिकाई और जोरदार धक्का मारा। एक ही बार में लंड सरसराता हुआ चुत की गहराई में ना जानें कहाँ खो गया।

मोना- अहह सस्स्स्सस्स मज़ा आ गया आह.. चोदो मेरे गोपू आह.. अब स्पीड से चोदो आह.. बुझा दो मेरी प्यास आह.. आईईइ..

गोपाल भी स्पीड से लंड अन्दर-बाहर करनें लगा। मोना गांड उठा-उठा कर उसका साथ देनें लगी। यही कोई 10 मिनट ये चुदाई अपनें पूरे उफान पर चलती रही। उसके बाद गोपाल के लंड की नसें फूलनें लगीं.. और वो चरम पे पहुँच गया।

गोपाल- आह.. आह ले मेरी मोना डार्लिंग आह.. मेरा आह.. लावा तेरी चुत में आह.. आ रहा है आह..
मोना- नहीं आह.. आ अभी नहीं उफ़फ्फ़ आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… चोदो आह.. मेरा अभी आह.. हुआ नहीं उफ़फ्फ़ फास्ट आह फास्ट करो उफ़फ्फ़..

मोना आगे कुछ बोलती तब तक गोपाल के लंड नें रस की धारा चुत में मारनी शुरू कर दी उसके गर्म-गर्म अहसास से मोना का फव्वारा भी छूट गया.. वो भी झड़नें लगी।

दो मिनट तक दोनों वैसे ही शांत पड़े रहे.. उसके बाद गोपाल एक तरफ़ लेट गया।

मोना- क्या यार गोपाल.. इतनी जल्दी पानी निकाल दिया, ठीक से मज़ा तो लेनें देते.. तुम्हारी वजह से मुझे भी चुत को भींच कर जल्दबाज़ी में पानी निकालना पड़ा।

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