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चलती ट्रेन में चुदाई (हॉट स्टोरी)

Antarvasna:प्रेषक :- साहिल…
हाय गर्ल्स, भाभीयों और आंटियों आप जो भी नाम मुझको दोगी वह मुझको मंजूर है. फिर भी मैं आप सभी की जानकारी के लिये बता दूँ कि, मेरा नाम साहिल है और मैं पेशे से एक प्लेबॉय हूँ और मेरा काम सेक्स से असंतुष्ट लड़कियों, भाभियों और आंटियों को पूरी तरह से सन्तुष्ट करना है.
दोस्तों मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ और यह बात आज से 2 महीनें पहले की है, तब मैं अपनी एक कस्टमर को सन्तुष्ट करके पटियाला से वापस दिल्ली आया था.
दोस्तों उस सेक्सी मसाज वाली चुदाई के बाद मेरा पूरा बदन टूट रहा था तो मैं मसाज पार्लर जाकर अपनी बॉडी की मसाज करवाकर आया था और अब मैं खुद को थोड़ा ठीक महसूस कर रहा था और मेरी बॉडी से थकान भी दूर हो गई थी.
हाँ तो दोस्तों मैंने भी अब यह सोचा है कि, मैं आप सभी को मेरे पटियाला वाले अनुभव से रूबरू करवाऊँ.
हाँ तो दोस्तों मेरा यह अनुभव कुछ इस तरह से था-
दोस्तों आज से 2 महीनें पहले मुझको पटियाला से एक फ़ोन आया, और मैंने बात करी उनसे, उनकी उम्र 28 साल की थी और उनका एक 3 साल का बेटा भी था, वह एक शादीशुदा औरत थी. उनके पति किसी कॉलेज में थे और उन्होंने मुझको बताया की रविवार की सुबह मुझको उनके घर पर पहुँचना है क्योंकि रविवार की सुबह 4 बज़े उनके पति कहीं बाहर जा रहे थे और सोमवार की शाम को वह वहाँ से वापस आएँगे. दोस्तों मैंने आपना चार्ज उनको बताया तो उन्होंने कुछ परेशान होते हुए थोड़े कम पैसे लेने की बात कही, और तब मैंने कुछ सोचा और फिर उनके यहाँ जाने के लिए हाँ बोल दी थी!
और फिर शनिवार की शाम को मैंने ट्रेन से वहाँ के लिए रवाना हुआ तो मेरा रिजर्वेशन नहीं था, इसलिए मैं जनरल डिब्बे में ही चढ़ गया था. उस डिब्बे में भीड़ तो कम थी पर सभी सीट भरी हुई थी. और फिर मैंने देखा कि, एक सीट पर चार लोग बैठे हुए थे जिनमें 2 औरतें और 2 आदमी थे और उनमें से एक आदमी दूसरे आदमी की गोद में अपना सिर रखकर सो रहा था और उसके बाद वह दोनों औरतें खिड़की की तरफ बैठी हुई थी. और फिर मैंने उनसे जगह देने की लिए निवेदन किया और मैंने उनको बोला कि, और दूसरी सीटों पर भी 5-5 लोग बैठे है, और फिर उन्होंने खिड़की के पास मेरे लिए ज़गह बना दी और फिर मैं भी झट से वहाँ बैठ गया था. और फिर मेरे बाजू में जो औरत बैठी थी मैंने उसका जायजा लिया तो वह करीब 35-36 साल के आस-पास की थी, वह गोरी थी और उसका बदन भरा हुआ था, उसके बड़े-बड़े बब्स थे. जगह कम होने के कारण उसके कन्धे पूरी तरह से मेरे सीने पर लग रहे थे. और मेरे सामने की सीट पर 3 बच्चे और एक आदमी–औरत बैठे थे और उनकी उम्र लगभग 55-60 साल की होगी, शायद वह उन बच्चों के दादा-दादी थे. और वह सो रहे थे, लेकिन फिर भी जनरल डिब्बे में लाईट जल रही थी. दोस्तों जनरल डिब्बे में सभी लोग सोते नहीं है, कुछ लोग जागते भी रहते है. और फिर रात के 11 बज़ रहे थे और ज्यादा रात भी नहीं थी.
और फिर कुछ देर तक मैं वैसे ही शरीफ़ बनकर बैठा रहा और फिर मैंने आपने बैग में से एक मैगज़ीन निकाली और फिर मैं उसको पढ़ने लगा था. दोस्तों ट्रेन धीरे-धीरे हिल रही थी इस कारण से मेरी बाहँ की कोहनी मेरे पास में बैठी हुई औरत की बाहँ के नीचे से उसके बब्स को बार बार छू कर रही थी. और फिर कुछ देर तक वह सब वैसे ही चलता होता रहा, और बीच-बीच में मेरी कोहनी कभी-कभी थोड़ी ज़ोर से उसके बब्स को छू रही थी पर उसने मुझसे कुछ भी नहीं कहा था. और फिर कुछ देर के बाद मैंने महसूस किया कि, उसकी बाहँ और बब्स के बीच कुछ और जगह बन गई है जिसके कारण मेरी कोहनी अब और भी आसानी से उसके पूरे बब्स पर रखी जा सकती थी और उस वजह से मैं उसके शरीर की गर्माहट को महसूस कर रहा था और फिर उसने खुद ही जानबूझकर अपना हाथ थोड़ा सा आगे खिसका दिया था जिससे मेरी कोहनी के लिए और भी जगह बन जाए. दोस्तों रात के समय उस पूरे डिब्बे में खामोशी थी सभी लोग अपनी आँखें बन्द करके बैठे हुए थे और वह भी अपनी आँखें बन्द करके बैठी हुई थी.
और फिर मैंने हिम्मत करके इसबार अपनी कोहनी को उसके बब्स के पास कुछ ज्यादा ही अन्दर तक जाने दिया. और फिर लगभग उसका आधा बब्स मेरी कोहनी के नीचे था लेकिन मैंने अपनी कोहनी का पूरा भार उसपर नहीं रखा था. और फिर हल्के से मैंने अपनी कोहनी उसके बब्स पर फिराई तो उसने मुझको कुछ नहीं कहा और वह बस अपनी आँखें बन्द किए हुए चुप-चाप बैठी रही, उससे मेरी हिम्मत और भी बढ़ गई थी. और फिर मैंने धीरे से अपनी कोहनी और अन्दर डाली, और फिर उसका पूरा बब्स अब मेरी कोहनी के नीचे था. और फिर धीरे-धीरे मैंने अपनी कोहनी से उसके बब्स पर दबाब देना शुरू किया, लेकिन वह फिर भी चुप-चाप बैठी रही थी. और फिर अब मैं समझ गया था कि, तवा गरम है बस अब उसपर रोटी सेकना बाकी है. और फिर वह थोड़ा सा कसमसाई तो तुरन्त ही मैंने थोड़ा डरते हुए अपना हाथ वापस खींच लिया था. उसी हाथ में मैंने मैगज़ीन पकड़े हुए थी.
और फिर उसने अपनी आँख खोलकर मुझे एक नज़र देखा तो उसके होठों पर हल्की सी मुस्कान थी, और फिर यह देखकर मैं खुश हो गया था कि, लगता है अब मेरा काम बन गया है और फिर मैंने राहत की साँस ली क्योंकि इतनी भीड़ में एक औरत को पटाने में जो खतरा होता है अब वह तो टल गया था.
और फिर उसने अपने बैग में से एक कम्बल निकाला और फिर उसने उससे उसने अपने आप को ढक लिया था. दोस्तों उसके साथ बैठी हुई औरत और वह दोनों आदमी उसके ही साथ थे. और फिर कुछ देर तक मैं वैसे ही बैठा रहा और फिर मैंने फिर से अपनी कोहनी को उसके बब्स से लगाना शुरू किया और फिर मैं अपनी कोहनी से ज़ोर-ज़ोर से उसके बब्स को मसलने लग गया था, और फिर मैंने धीरे से अपनी मैगज़ीन को अपनी गोद में रखकर अपना एक हाथ धीरे से उसके कम्बल के अन्दर डालना शुरू किया. दोस्तों पहले मेरा हाथ उसकी कमर और जाँघों के पास पहुँचा और फिर मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ सरकाकर अपनी हथेली उसके पेट पर रख दी, और वह चुप-चाप अपनी आँखें बन्द किए हुए बैठी रही. और फिर मैंने अपना हाथ थोड़ा और आगे बढ़ाया तो अबकी बार मैंने उसके बब्स के नीचे के भाग को महसूस किया. और फिर थोड़ा काँपते हुए मैंने अपना हाथ थोड़ा ऊपर उठाया और उसके बब्स पर रख दिया तो वह भी सिहर गई थी और अब मेरी भी धड़कन काबू में नहीं थी. और फिर मैं उसके बब्स को धीरे-धीरे सहलाने लग गया था और मेरे ऐसा करने से वह भी मदमस्त होने लग गई थी. और फिर मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसके दूसरे बब्स को सहलाने लगा, जिससे वह बहुत गरम हो गई थी. और फिर उसने कम्बल के अन्दर से ही मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रखा जो कि, उसके बब्स पर था और फिर उसने ज़ोर से मेरा हाथ दबा दिया था और उसकी साँसें तेज-तेज चल रही थी.
और फिर करीब आधे घन्टे तक मैं उसके बब्स से खेलता रहा और उसे भी मज़ा आ रहा था, और फिर मैंने उसके पूरे शरीर पर अपना हाथ फेरना शुरू कर दिया था. और फिर मैंने उसके बब्स पर से अपना हाथ थोड़ा नीचे खिसखाया और फिर उसके पेट पर से होते हुए उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा. और फिर मैंने उसकी साड़ी के अन्दर अपना हाथ डालने की कोशिश करी मगर मैं नहीं डाल पाया था. और फिर मैंने धीरे-धीरे उसकी साड़ी को ऊपर खींचना शुरू किया, कम्बल से नीचे पाँव तक वह ढके हुए थी और वह अपने दोनों पाँव सीट के ऊपर करके बैठी हुई थी इसलिए उसको भी कोई दिक्कत नहीं हुई थी. और फिर मैंने धीरे-धीरे उसकी साड़ी ऊपर करी और फिर मैंने उसकी चूत पर अपना हाथ रख दिया था. दोस्तों मैंने जब उसकी चूत पर अपना हाथ रखा तो वहाँ पर मुझको बहुत गीला सा लगा था क्योंकि वह शायद एकबार झड़ चुकी थी. और फिर भी मैं उसकी चूत को सहलाने लगा और मैं अपनी एक ऊँगुली उसकी चूत में डालकर अन्दर-बाहर करने लगा और मेरे ऐसा करने से वह अब बहुत बैचेन हो गई थी और उसने मेरा हाथ पकड़कर अलग कर दिया था और वह ज़ोर-ज़ोर से साँसें भरने लग गई थी. और फिर उसने अपनी तिरछी नज़र से मुझे देखा और फिर उसने धीरे से अपनी आँख से इशारा किया और फिर वह थोड़ी सी कसमसाई और फिर उसने अपनी साड़ी ठीक करी और फिर वह खड़ी हो गई थी और मैं अपनी मैगज़ीन की तरफ देखने लग गया था. और फिर वह उठकर बाथरूम की तरफ जाने लग गई थी, और जाते-जाते मैंने उसको देखा तो उसने फिर से मुझे कुछ इशारा किया. और फिर उसके जाने के करीब 2 मिनट के बाद मैंने आस-पास का जायजा लिया कि, कोई हमको देख तो नहीं रहा है. और फिर पूरी तरह से सन्तुष्ट होकर मैं भी बाथरूम की तरफ चला गया था. और फिर वहाँ पर पहुँचकर मैंने देखा कि, एक बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था और एक का बन्द था, और फिर मैंने धीरे से बन्द वाले दरवाजे पर दस्तक दी तो तुरन्त ही वह दरवाजा खुल गया था और मेरे सामने वही औरत थी और फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अन्दर खीच लिया था. और फिर मेरे अन्दर आते ही उसने दरवाजा बन्द कर दिया था, और फिर वह झट से मुझसे लिपट गई थी. और फिर वह अपने दोनों हाथ मेरी पीठ पर फिराने लग गई थी.
और फिर मैंने भी उसे अपनी बाहों में भरकर उसे चूमना और सहलाना शुरू कर दिया था. दोस्तों हम दोनों अभी तक खड़े हुए थे और मैंने उसके होठों को चूमना और चूसना शुरू किया और साथ मैं अपने एक हाथ से उसके बब्स को भी सहलाने लग गया था जिससे वह और भी बेकाबू हो रही थी और फिर उसने जल्दी-जल्दी मेरी पेन्ट को खोलना शुरू कर दिया था, दोस्तों वह बहुत जल्दी में लग रही थी. और फिर उसने मेरी पेन्ट को खोलकर नीचे सरका दिया था. और फिर उसने मेरी पेन्ट में हाथ डालकर मेरे 7” के लम्बे लंड को आपने हाथ में ले लिया था. दोस्तों मेरा लंड उसके हाथ में आते ही उसने एक लम्बी साँस भरी और फिर वह झट से मेरा लंड पकड़े हुए नीचे बैठ गई थी. और फिर वह मेरा लंड अपने मुहँ में लेकर ज़ोर–ज़ोर से चूसने लग गई थी. और फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उसको पकड़कर उठाया और फिर बाथरूम की दीवार पर उसकी पीठ टिकाकर मैंने उसकी साड़ी ऊपर कर दी थी. दोस्तों जब मैंने उसकी साड़ी ऊपर करी तो मैंने देखा कि, उसने काले रंग की बहुत ही सेक्सी पैन्टी पहन रखी थी और फिर मैंने उसकी वह पैन्टी नीचे खिसका दी थी, और फिर उसकी पैन्टी को नीचे करते ही उसकी रसभरी चिकनी चूत मेरे सामने थी. दोस्तों उसकी चूत को देखकर तो मैं भी एकदम मदमस्त हो गया था, दोस्तों कसम से क्या फूली हुई चूत थी उसकी एकदम चिकनी. दोस्तों वह अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी पकड़कर ऊपर किए हुए और अपनी आँखें बन्द करके दीवार से टिकी हुई खड़ी थी और उसकी साँसे ज़ोर-ज़ोर से चल रही थी. और फिर मैंने नीचे अपने घुटनों पर बैठकर अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी तो वह मछली की तरह तड़प उठी थी और फिर कुछ देर तक उसकी चूत को चाटने के बाद मैं खड़ा हुआ और फिर मैं अपना लंड उसकी चूत पर रखकर उसकी चूत के अन्दर डालने की कोशिश करने लगा तो मुझको सही पोजीशन नहीं मिलने के कारण मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर नहीं जा रहा था. तो फिर मैंने अपने दोनों हाथ उसके दोनों कन्धों पर रखे और उसको थोड़ा नीचे के तरफ धकेला, अब उसकी पीठ तो दीवार पर टिकी हुई थी लेकिन उसके पैर फैले हुए थे और इस कारण उसकी कमर थोड़ी झुक गई थी.
और फिर अब वह मुझपर झल्लाने लगी और फिर उसने धीरे से मुझको बोला कि, जल्दी से अन्दर डालो ना… मेरी जान निकली जा रही है और फिर यह कहते हुए उसने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के मुहँ पर रख दिया, और तभी मैंने ज़ोर से एक झटका दिया और एक ही झटके में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में सनसनता हुआ घुस गया था और उसके मुहँ से हल्की सी चीख निकल गई थी. और फिर हम दोनों खड़े-खड़े ही चुदाई कर रहे थे, और फिर मैंने उसकी दोनों जाँघों को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और फिर मैं जोर-जोर से अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लग गया था. दोस्तों उस समय उत्तेजना में उसकी आँखें बन्द थी और उसके मुहँ से हल्की-हल्की सी…सी… की आवाज़ आ रही थी. और साथ ही साथ वह अपनी गांड भी ज़ोर-ज़ोर से हिलाकर मेरा साथ दे रही थी. और फिर करीब 5-10 मिनट तक लगातार उस ट्रेन की रफ़्तार के साथ-साथ हमारी चुदाई की ट्रेन भी तेज़ स्पीड से चलती रही. और फिर आचनक से मैंने अपनी चुदाई की ट्रेन की रफ़्तार थोड़ी और बड़ा दी थी, और वह भी उस चुदाई में मेरा बराबर साथ दे रही थी एसलिए हमारी उस चुदाई का मज़ा दुगना हो गया था और फिर कुछ देर के बाद हम दोनों ने एक साथ पानी छोड़ दिया था.
और फिर हम दोनों बुरी तरह से हाँफ रहे थे,मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में ही था. और फिर उसने अपने दोनों फैले हुए पैरों को समेटा और दीवार से टिकी हुई ही वह मुझे अपनी बाहों में लिए हुए खड़ी रही, और मैं भी अपना लंड उसकी चूत में डाले हुए ही उससे चिपककर खड़ा रहा. और फिर थोड़ी देर के बाद हम एक-दूसरे से अलग हो गये थे और उसके चेहरे पर एक अजीब सी ख़ुशी और सन्तुष्टी थी. और फिर हम लोगों ने अपने आप को साफ करके अपने-अपने कपड़े ठीक किए और फिर जब हम बाहर निकलने को तैयार हुए तो मैंने धीरे से दरवाज़े को खोलकर बाहर का जायजा लिया और फिर बाहर कोई नहीं था तो मैंने उसको बोला कि, पहले तुम जाओ. और फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे गाल को चूमा और फिर वह बाहर निकल गई थी. और फिर उसके जाने के बाद मैं भी बाथरूम से बाहर आ गया था पर मैं अपनी सीट पर नहीं गया, और मैं ट्रेन के दरवाज़े पर खड़ा हो गया और फिर मैंने अपनी जेब से सिगरेट निकालकर सुलगाई. उर फिर करीबी 5 मिनट के बाद मैं अपनी सीट पर वापस आया और बैठ गया और मेरे बाज़ू में वही बैठी थी, और उसके होठों पर हल्की सी मुस्कान थी, बाकी उसके साथ वाले सब गहरी नींद मे सो रहे थे. उसने कम्बल ओढ़ रखा था और कम्बल के अन्दर से ही उसने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया था और ट्रेन चलती रही और हम बैठे रहे.
और फिर सुबह जब मेरा स्टेशन आया तो मैं उतर गया था और उसको आगे कहीं और जाना था.
धन्यवाद कामलीला के प्यारे पाठकों !!

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