loading...

चलती कर में चूत बेकरार

लेखिका – कशिश
अनुवाद तथा संपादन – मस्त कामिनी

वो दोनों कुछ ऐसी पोज़िशन में थे की मैं सांवली का चेहरा नहीं देख पा रही थी।

डॉक्टर, कुर्सी पर दरवाजे की तरफ मुँह कर के बैठा हुआ था और मैं डॉक्टर का मुँह और सांवली की गाण्ड देख पा रही थी।

अब सांवली नीचे बैठ गई थी और डॉक्टर ने अपनी पैंट की ज़िप खोली तो सांवली ने अपने हाथ से उसका लौड़ा पकड़ कर, बाहर निकाल लिया…

मैं इतनी दूर थी.. फिर भी, मैंने साफ़ साफ़ देखा की डॉक्टर का लण्ड काफ़ी बड़ा था और उसके चारों तरफ काले काले, बड़े बड़े बाल थे…

मस्त कहानियाँ हैं, मेरी सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर !!! !!

अब पढ़िए आगे –

सांवली, अपने हाथों से उस की झांट को पीछे कर रही थी ताकि वो उसके काम के बीच ना आए..

सांवली ने डॉक्टर के काले और बड़े लौडे को चूमा और धीरे धीरे उसको हिलाने लगी…

डॉक्टर अपनी कुर्सी पर पीछे सिर टीका कर बैठ गया और अपने लण्ड पर, सांवली के कमाल का मज़ा लेने लगा…

थोड़ी देर उसका लण्ड हिलाने के बाद, उसने लण्ड का सुपाड़ा अपने मुँह में ले कर कुछ देर तक चूसा..

फिर, वो उसके लण्ड को पकड़ कर मुट्ठी मारने लगी.. जब की डॉक्टर के काले लण्ड का सुपाड़ा, उस के मुँह में ही था..

मुझे पता चल चुका था की वहाँ शायद लण्ड और चूत की चुदाई नहीं होने वाली है, सिर्फ़ हाथ और मुँह का कमाल ही होगा..

मैंने भी अपनी जीन्स की ज़िप खोल ली और चड्डी के किनारे से अपनी बीच की उंगली, अपने पैर चौड़े करके अपनी चूत तक ले गई…

मैंने जल्दी जल्दी, अपनी उंगली अपनी चूत के दाने पर फिरनी चालू की ताकि मैं जल्दी से झाड़ सकूँ..

और वहाँ, सांवली तेज़ी से डॉक्टर का लौड़ा चूसते हुए, मूठ मार रही थी।

मेरी उंगली की रफ़्तार भी, मेरी चूत में बढ़ गई थी..

मैंने देखा की डॉक्टर की गाण्ड, कुर्सी से ऊपर हो रही है और अचानक ही, उसने सांवली का सिर पकड़ कर अपने लण्ड पर दबा लिया..

ज़रूर उसके लण्ड ने, अपना पानी छोड़ दिया था..

सांवली मज़े से, डॉक्टर के लण्ड रस को पी रही थी।

मेरी चूत पर मेरी उंगली के काम से, मैं भी अब झड़ने के करीब थी…

मैंने अपनी उंगली तेज़ी से अपनी गीली फुददी पर हिलनी शुरू कर दी और मैं भी अपनी मंज़िल पर पहुँच गई।

मेरी चड्डी, मेरे चूत रस से और भी गीली हो गई..

मैंने एक शानदार काम, चूत में उंगली करने का ख़तम किया और मेरी आँखें खुद ही संतुष्टि से बंद हो गई..

जब मैंने आँखें खोली तो देखा की सांवली डॉक्टर का लण्ड, अपना मुँह, अपनी गर्दन और अपनी चूचीयाँ कपड़े से साफ़ कर रही थी।

शायद, डॉक्टर के लण्ड से निकला पानी, उसके बदन पर भी फैल गया था..

तभी मैंने शुभम की सफेद गाड़ी को अपने घर की तरफ आने वाली, सड़क पर देखा..

बरसात, अब रुक चुकी थी…

मैं खड़ी हुई और अपने कमरे की तरफ दौड़ी।

मैंने दूसरी चड्डी ली और अपनी गीली चूत, टिश्यू पेपर से साफ़ करने के बाद उसे पहन लिया।

मैं जल्दी से, अपने प्रेमी का स्वागत करने नीचे आई।

वो अपनी कार पार्क करने के बाद, घर के अंदर आया तो मेरी माँ भी आ गई थीं।

हम सब ने साथ साथ शाम की चाय पी और हल्का नाश्ता किया।

वो ज़्यादातर मेरी माँ से ही बात कर रहा था और करीब 5:00 बजे, हम अपने बनाए हुए प्रोग्राम पर रवाना हुए..

हम जालंधर के हाइवे पर थे और  से बरसात शुरू हो गई थी, इस बार ज़ोर से…

तेज बारिश के कारण, बाहर अंधेरा हो गया था..

मैं अपना सिर उसके कंधे पर रख कर बैठी हुई थी और बाहर हो रही बरसात, मुझे सेक्सी बना रही थी, गरम कर रही थी…

वो बहुत सावधानी से, कार चला रहा था..

रास्ते पर, उस वक़्त बहुत कम गाड़ियाँ थी।

उसने मेरे गाल पर चुंबन लिया तो मैं अपना आपा खोने लगी..

मैंने भी, उसके गाल को चूमा..

गाड़ी चालते हुए, उस ने मेरी चूचियों को दबाया…

जो मैं चाहती थी, वो हो रहा था..

उस ने फिर एक बार मेरी चूचियों को दबाया और मसला, इस बार ज़रा ज़ोर से…

चलती गाड़ी में जितना संभव था, उतना मैं उस से चिपक गई..

अब मेरी चूचीयाँ, उस के हाथ से रगड़ खा रही थी…

मैंने उस के शर्ट के ऊपर का बटन, खोल दिया..

मेरी उंगलियाँ उस की चौड़ी, बालों भारी छाती पर, उसके मर्दाना निप्पल पर घूमने लगी…

मैंने महसूस किया की उस की निप्पल, मेरे सेक्सी तरीके के कारण कड़क हो गई थी…

मैंने एक के बाद एक, उसकी दोनों निप्पल को मसला तो उसे मज़ा आया..

मैंने नीचे देखा तो पाया की उसकी पैंट में, हलचल हो रही थी।

मैंने मुस्कुराते हुए, उस की निप्पल को छोड़ कर, अपना हाथ नीचे किया..

लोग अभी ये कहानियाँ पढ़ रहे हैं

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *